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Thursday, December 24, 2009
जनवरी से सस्ते हो सकते हैं खाद्य पदार्थ
अहलूवालिया ने कहा कि इस समय उत्पादों के खुदरा मूल्य उनके थोक मूल्यों से काफी आगे निकल गए हैं। फिर भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंची कीमतों के कारण बिना सब्सिडी आयात नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा, ‘यह एक जटिल स्थिति है और सिर्फ मौद्रिक उपायों से इसका ठीक होना मुश्किल है। सूखे के बाद कीमतों में आए उछाल का प्रमुख कारण सट्टेबाजी है। सरकार के पास खाद्यान्न के पर्याप्त भंडार मौजूद हैं और जनवरी से उनकी कीमतों को कम किया जा सकता है।’
गौरतलब है कि खाद्य पदार्थों की कीमतें 10 वर्षों के शिखर पर चल रही हैं। दिसंबर के पहले सप्ताह में मुद्रास्फीति करीब २क् फीसदी दर्ज की गई है। आलू समेत अन्य सब्जियों व दालों की कीमतें आसमान छू रही हैं।
प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार समिति के चेयरमैन सी रंगराजन ने कहा था कि रिजर्व बैंक बाजार में तरलता घटाकर और ब्याज दरें बढ़ाकर महंगाई काबू करने का प्रयास कर सकता है।
तिलहन के वायदा कारोबार पर लगे अंकुश : एसईए
उन्होंने कहा है कि तिलहन के वायदा सौदे वर्तमान के 6 माह की बजाय अधिकतम 2 माह के लिए होने चाहिए। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय और नियामक को लिखे गए एक पत्र में एसईए ने तर्क दिया है कि 6 महीने के लिए होने वाले वायदा सौदों से अटकलबाजी बढ़ती है और इससे कीमतों में बढ़ोतरी होती है। यह भारतीय बाजार के लिए बढ़िया नहीं है।
एसईए के निदेशक बीवी मेहता ने कहा कि इस समय तिलहन की आपूर्ति कम है और इसे देखते हुए इसके बारे में किसी तरह की अटकलबाजी पर रोक लगाई जानी चाहिए।
अपनी मांग की पुष्टि करते हुए मेहता ने कहा, 'वनस्पति तेलों के आयात पर इस समय भारत की 28,000 करोड़ रुपये के बराबर की विदेशी मुद्रा का व्यय हो रहा है। इस पर लगाम लगाई जा सकती है। सरकार को कुछ अटकलबाजी हरकतों पर लगाम लगानी होगी, जो तिलहन के बीज को लेकर लगाई जा रही हैं। साथ ही बुआई के क्षेत्रफल में बढ़ोतरी कर पैदावार में भी बढ़ोतरी करनी होगी।'
2008-09 के दौरान कुल तेल आयात 37 प्रतिशत बढ़कर 86.6 लाख टन हो गया है, जो 28,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का है। इसके पहले साल 63.1 लाख टन तेल का आयात हुआ था, जिसकी कीमत 25,000 करोड़ रुपये थी।
इस साल (नवंबर-अक्टूबर) भारत में तेल की कुल खपत 155 लाख टन रहने की उम्मीद है, जबकि उत्पादन 65 लाख टन पर स्थिर रहने के आसार हैं। इस समय तेल मिलें अपनी क्षमता का 50 फीसदी ही काम कर रही हैं।
Saturday, December 19, 2009
अमूल का मक्खन 20 रुपये महंगा
Thursday, December 17, 2009
खाद्य तेलों की खपत 5 प्रतिशत बढ़ी
तेल वर्ष 2007 में इसकी प्रति व्यक्ति खपत 11.4 किलोग्राम रही थी। मशहूर खाद्य तेल विशेषज्ञ और गोदरेज इंटरनैशनल के निदेशक दोराब मिस्त्री ने दिल्ली में एक सेमिनार में अनुमान जताया कि देश में वनस्पति तेल की प्रति व्यक्ति खपत इसी गति से बढ़ती रहेगी।
उन्होंने कहा, 'भारतीय बाजार कीमत के लिहाज से बड़ा लचीला है। यहां तेलों की कीमत कम होने से उसके उपभोग में वृद्धि होती है। नवंबर 2008 से अक्टूबर 2009 तेल वर्ष में वनस्पति तेलों की प्रति व्यक्ति खपत में तेजी से इजाफा हुआ। इससे सूरजमुखी और सोयाबीन तेलों का आयात करने को बाध्य होना पड़ा।'
पाम तेल के आयात में भी वृद्धि हुई। यहां की रिफाइनरियों ने दोहरे पृथक्करण के जरिए सुपर ओलीन नामक तेल का विकास किया है। इस बीच, थोक बाजार में आरबीडी ओलीन की कीमत में जबरदस्त कमी हुई। अक्टूबर 2008 में यह घटकर 42 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच गया था। मार्च 2008 में इसका मूल्य प्रति टन 62 हजार रुपये था। नंवबर-दिसंबर में यह घटकर 30 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच गया।
सीजन 2008-09 में तेल का आयात साल भर पहले के 63 लाख टन से काफी ज्यादा बढ़कर 86 लाख टन हो गया। बायोईंधन के लिए मांग और डॉलर की तुलना में रुपये की मजबूती के चलते आरबीडी ओलीन की कीमत अभी 38 हजार रुपये प्रति टन पर है। एक विश्लेषक ने बताया कि कीमतें घटने से ग्रामीण उपभोक्ता रुपये के बजाय ग्राम के आधार पर खरीदारी करने लगे।
2008 की शुरुआत में सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की ऊंची कीमत को देखते हुए कच्चे अपरिष्कृत वनस्पति तेलों पर आयात शुल्क खत्म कर दिया, जबकि परिष्कृत वनस्पति तेलों पर आयात शुल्क को घटाकर 7.5 फीसदी कर दिया। 2008 की दूसरी छमाही और 2009 की शुरुआत में सरकार महंगाई नियंत्रण नीति पर चलती रही।
यह नीति जनता के बीच लोकप्रिय हुई और इसने मास्टरस्ट्रोक का काम किया। इसके चलते महंगाई दर शून्य तक लाने में कामयाबी मिली। दालों के काफी महंगा होने से भी मूंगफली और सोयाबीन जैसे तिलहनों का उपयोग बढ़ा। इसलिए उम्मीद है कि इस साल प्रति व्यक्ति तेल की खपत 4 से 5 फीसदी बढ़ जाएगी। देश की प्रति व्यक्ति आय भी लगातार बढ़ती जा रही है।
भारतीयों की प्रति व्यक्ति आय अब 1,000 डॉलर पार कर चुकी है। इस स्तर को उपभोग के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। मिस्त्री ने कहा कि सभी खाद्य उत्पादों के महंगा होने के बीच वनस्पति तेलों की कीमत उपभोक्ताओं को राहत दे रही है
सोयामील निर्यात 30 प्रतिशत कम रहने का अनुमान
अमेरिका में सोयाबीन के उत्पादन में बढ़ोतरी और घरेलू बाजार में सोयाबीन के दाम ऊंचे होने के साथ ही डॉलर की कमजोरी से चालू वित्त वर्ष में भारत से सोया खली के निर्यात में तीस फीसदी कमी आने की आशंका है। चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से नवंबर तक भारत से सोया खली का निर्यात घटकर 11,47,307 टन का ही हुआ है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 24,20,255 टन का निर्यात हुआ था।सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के प्रवक्ता राजेश अग्रवाल ने बिजनेस भास्कर को बताया कि घरेलू बाजार में सोयाबीन के दाम ऊंचे होने के कारण प्लांटों को पड़ते नहीं लग रहे हैं। वैसे भी अमेरिका में सोयाबीन के उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है जिससे अमेरिका की सोया खली भारत के मुकाबले सस्ती पड़ रही है। रुपये के मुकाबले डॉलर कमजोर होने से भी बेपड़ता हो गया है। इसीलिए पिछले सात महीने में भारत में सोया खली की कीमतों में करीब 12 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। मई महीने में सोया खली के दाम बंदरगाह पहुंच बढ़कर 23,700 रुपये प्रति टन हो गए थे जबकि इस समय भाव घटकर 20,500 से 20,800 रुपये प्रति टन रह गए हैं। दाम घटने के बावजूद भी भारत से नवंबर महीने में सोया खली का निर्यात घटा है। नवंबर महीने में भारत से सोया खली का निर्यात घटकर मात्र 2,97,661 टन का ही हुआ है जबकि पिछले साल नवंबर महीने में 6,63,776 टन का निर्यात हुआ था।उन्होंने बताया कि निर्यातकों की कमजोर मांग को देखते हुए चालू वित्त वर्ष में भारत से सोया खली का निर्यात घटकर 30 लाख टन ही होने की संभावना है। जबकि वित्त वर्ष 2008-09 में 42।45 लाख टन सोया खली का निर्यात हुआ था। सोपा के अनुसार चालू सीजन में भारत में सोयाबीन का उत्पादन 97.24 लाख टन होने की संभावना है। उधर अमेरिकी कृषि विभाग के अनुसार अमेरिका में सोयाबीन का उत्पादन बढ़कर 903 लाख टन होने की उम्मीद है। साई सिमरन फूड लिमिटेड के डायरेक्टर नरेश गोयनका ने बताया कि स्टॉकिस्टों की सक्रियता के कारण घरेलू बाजार में सोयाबीन की कीमतें बढ़ गई थी जबकि रिकार्ड आयात होने के कारण सोया तेल में तो मांग कमजोर बनी ही हुई है। साथ ही सोया खली के निर्यात में भी लगातार कमी आ रही है। सोयाबीन के दाम उत्पादक मंडियों में मई में बढ़कर 2650 रुपये प्रति क्विंटल हो गये थे जबकि इस समय प्लांट डिलीवरी सोयाबीन का भाव 2350 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। इन भावों में भी मिलों की मांग कमजोर बनी हुई है जिससे मौजूदा कीमतों में और भी गिरावट की आशंका है।
Wednesday, December 16, 2009
Poor weather dims hopes for India's oilseed crop
Veg oils import up in Nov on lower palm prices
Lower prices for palm group of oils resulted in higher imports of vegetable oils in November compared with the same period a year ago.
According to the Solvent Extractors Association of India, vegetable oils import increased 36 per cent in November to 7.53 lakh tonnes (lt). Of this, edible oils comprised 7.12 lt and non-edible the rest.
Prices of refined, bleached and deodorised palmolein dropped to $708 a tonne in November compared with $715 in October, while crude palm oil rate slipped to $660 from $672. Prices of crude sunflower oil and crude soyabean oil, however, increased. In the case of soyabean oil, it was up at $867 ($818) and sunflower rose to $836 ($802).
Drop in palm imports
Of the oils that were imported, crude palm oil made up 4.50 lt and RBD palmolein 1.12 lt. A little over 55,000 tonnes of crude sunflower oil were imported while 78,000 tonnes of crude soyabean oil were brought into the country.
The percentage of palm group oils import dropped to 81 per cent from 98 per cent last year. This was mainly since last year, higher prices for soyabean and sunflower oils made the imports unfeasible.
चीनी की बढ़ती कीमत चिंताजनक : आनंद शर्मा
वनस्पति तेल आयात नवंबर में 36फीसदी बढ़ा
वैजिटेवल ऑयल आयात बढा
नई दिल्ली, 15 दिसम्बर (एनएनएस)। एसईए मुम्बई के कार्यकारी निदेशक डॉ. बीवी मेहता से प्राप्ता विज्ञप्ति के अनुसार नए तेल वर्ष का जो नवम्बर से श्रीगणेश हुआ उसका आगा*ा 5.55 लाख की बजाय लगभग 7.54 लाख टन वैजिटेबल ऑयल से हुआ। इसमें कुछ प्रमुख तेलों की क्वालिटी इस प्रकार रही कोस्टक में पूर्वाकडें हैं-
पामोलिन रिफाइंड (1.38 लाख) 1.13 लाख टन, कच्चा पामऑयल (3.64 लाख) 4.50 लाख से अधिक, कच्चा पामोलिन (शून्य) 3438 टन, तेल सूरजमुखी (8 हजार) 55688 टन, तेल सोयाबीन (शून्य) 78000 टन, तेल गोला (1999) 1199 टन, कच्चा पामगिरी तेल (7496) 11496 टन, सकल आयात (5.19 लाख) 7.13 लाख टन, अखाद्य तेलों में पीकेएफएडी (शून्य) 2295 टन, पीएफएडी (16496) 21998 टन, सीपीएस (5827) 3499, और सीपीकेओ (9988) 13497, अन्य (3999) शून्य, सकल आयात (36310) 41279 टन।
विदेशी तेल दाम
गत अक्टूबर माह में मुम्बई मार्केट में बंदरगाह पहुंच विदेशी तेलों के दाम इस प्रकार रहे कोस्टक में गत वर्ष नवम्बर के भाव दिये गए हैं-
पामोलिन रिफाइंड (565 डॉलर प्रति टन) 708 डॉलर प्रति टन पहुंच, कच्चा पामऑयल (475) 666 डॉलर, कच्चा तेल सोयाबीन (801) 867 डॉलर और तेल सूरजमुखी (825) 836 डॉलर प्रति टन।
उक्तावधि में मुम्बई मार्केट में तेलों के दाम इस प्रकार रहे कोस्टक में पूर्वाकडें हैं-
पामोलिन रिफाइंड (31750 रुपए) 35714 रुपए प्रति टन, कच्चा पामऑयल (25795) 31518 रुपए, सोयाबीन रिफाइंड ऑलय (37773) 42264 रुपए, तेल सूरजमुखी (57727) 40627 रुपए, रेपसीड ऑयल (60909 रुपए ) 50182 रुपए प्रति टन
ऑयलपाम को प्लांटेशन घोषित करो
मुम्बई, 15 दिसम्बर। गोदरेज इंटरनेशनल के निदेशक दोराब मिस्री के अनुसार भारत में ऑयल पाम के वृक्ष केरल, आंध्र, कर्नाटक, गोवा तथा कुछ अन्य क्षेत्रों में लगाए जा सकते हैं लेकिन सिंचाई की व्यवस्था होनी जरूरी है। ऑयलपाम प्लांटेशन फसल है जिसके लिए कॉरपोरेट फर्मिंग की जरूरत है। धारक के पास 50/100 हैक्टयर होने चाहिए। गोदरेज जैसी बडी कम्पनियां इतनी कृषि भूमि नहीं खरीद सकती इसलिए केन्द्र सरकार को ऑयलपाम प्लांटेशन फसल घोषित करनी चाहिए। इसकी मदद से देश में वैजिटेबल ऑयल उत्पादन काफी बढ सकता है और आत्मनिर्भरता भी मिल सकती है। वर्तमान स्थिति में तो देश की खपत का 70 प्रतिशत उत्पादन हो जाए तो गनिमत है। ऑयलपाम की खूबी उत्पादकता में है। एक हेक्टेयर में सरसों औसतन 900 किलो होती है जिससे 300 किलो तेल सरसों प्राप्त होता है। दूसरी ओर एक हेक्टेयर में ऑयलपाम से 3.5/4 टन पाम ऑयल मिल जाएगा। किसान भी इसके वृक्ष लगाना चाहेंगे लेकिन उन्हें चार साल इंतजार करना पडेगा। अगर ऑयल पाम वृक्ष के मध्य अन्य फसलों की खेती की जाए तो उसे अतिरिक्त आय हो सकती है तथापि केन्द्र सरकार को किसानों को अनुदान देना पडेगा। मलेशिया तथा इंडोनेशिया पाम ऑयल उत्पादन में प्रमुख दोनों देशों में फालतू वनीय भूमि है जहां कोई आबादी नहीं रहती। इन वनों को साफ करके मलेशिया में 45 लाख हेक्टेयर में ऑयल पाम बागान लगाए गए जिनसे 180 लाख टन पाम ऑयल हुआ। इंडोनेशिया ने उससे भी बढकर 65 लाख हेक्टेयर में ऑयल पाम वृक्ष लगाए और वहां 220 लाख टन पाम ऑयल उत्पादन हुआ ज्यादातर वृक्ष 1980 के बाद के हैं। इंडोनेशिया हर साल इनका एरिया 5 लाख हेक्टेयर बढा रहा है। (इससे यह संकेत मिलते हैं कि देश में एमपी, महाराष्ट्र, सुंदरवन बंगाल तथा पूर्वोत्तर के वनों की साफ-सफाई करके सिंचाई व्यवस्था के साथ ऑयल पाम के वृक्ष लगाए जा सकते हैं)। भारत में तेल आयात पर निर्भरता कुछ वर्षों में बढी है। पिछले तेल वर्ष में आयात 86 लाख टन हो गया जबकि 2000-01 में 48 लाख टन आयात हुआ था। जाहिर है कि उत्पादन बढाने के अलावा और चारा नहीं तथा पाम ऑयल इसमें समर्थ है
मांग कमःतेल गिरने लगा
MR DORAB MISTRY PAPER- POTS- India by mpoc at new delhi
Mr. Dorab Mistry’s Paper – POTS- India by MPOC at New Delhi
Tuesday, December 15, 2009
सोयाबीन तेल रपट गया
सरसों मजबूत बनी रहने की उम्मीद
नई दिल्ली, 12 दिसंबर (एनएनएस) । आने वाले दिनों में भी सरसों मजबूत ही बनी रहने की उम्मीद है क्योंकि इसकी बुआई में कमी आयी है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकडों में बताया गया है कि चालू सीजन के दौरान अभी तक सरसों की बिजाई में लगभग तीन प्रतिशत की कमी आयी है।
मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम आंकडों के अनुसार बीते 10 दिसंबर तक देश में कुल 77.77 लाख हैक्टेयर में विभिन्न रबी तिलहनों की बुआई हुई है। पिछले सीजन की आलोच्य अवधि में तिलहनों की हुई 83.80 लाख हैक्टेयर बुआई की तुलना में वर्तमान बिजाई 6.03 लाख हैक्टेयर या 8.87 प्रतिशत कम है।
तिलहनों की बुआई में यह कमी प्रमुख रबी तिलहन, सरसों की बुआई में आयी करीब 2.45 लाख हैक्टेयर की कमी से हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार चालू सीजन के आरंभ से लेकर अभी तक मौसम सामान्य की तुलना में तापमान ऊंचा रहने से सरसों की बुआई प्रभावित हुई है। मंत्रालय के नवीनतम अनुमानों के अनुसार गत् 10 दिसंबर तक सरसों की 60.85 लाख हैक्टेयर में बुआई हुई है जो कि एक वर्ष पूर्व की आलोच्य अवधि में हुई 63.29 लाख हैक्टेयर बुआई की तुलना में करीब तीन प्रतिशत कम है।
बुआई में कमी के समाचार आते ही घरेलू बाजारों में सरसों व इसके तेल की कीमतें बढनी शुरु हो गयी। हरियाणा की चरखी दादरी, जींद, हांसी, भिवानी और नारनोल जैसी मंडियों में सरसों तेल एक्सपेलर 5425/5550 रुपए प्रति क्विंटल के बीच बोला गया। एक दिन पूर्व की तुलना में इसमें करीब 25/50 रुपए की तेजी आयी। सरसों भी 20/25 रुपए बढाकर बोली जा रही थी।
भिवानी स्थिति व्यापारी विनय कुमार नकीपुरिया ने बताया कि तापमान ऊंचा होने की वजह से न सिर्फ भिवानी मंडल में ही बल्कि हरियाणा के अन्य उत्पादक क्षेत्रों व राजस्थान के भी कुछ क्षेत्रों में सरसों की फसल पर कीडे का प्रकोप हो गया है। यही वजह है कि मनोवृत्ति तेजी की बनी हुई है।
लागत से कम दाम पर बिक रहा है सरसों तेल
Monday, December 14, 2009
सोयाबीन में और तेजी की उम्मीद
Saturday, December 12, 2009
वैश्विक बाजारों का असरःखाद्य तेल सुधरे
पाम तेल पर यूरोप में टैक्स छूट संभव
Thursday, December 10, 2009
Palm falls 1.4pc ahead of stocks data
CPO FUTURES
JAKARTA: Malaysian crude palm oil futures tumbled yesterday as investors pocketed profits from the recent rally ahead of the release of end-November stocks data, traders said.
Industry regulator Malaysian Palm Oil Board (MPOB) is due to release end-November stocks data today.
“The market has been going up for many days, so it is normal to see some profit-taking especially prior to MPOB data,” said a trader at a Kuala Lumpur-based brokerage, adding that weak overseas markets further dented sentiment.
US soybean for January delivery dropped 1.04 per cent in Asian hours, while most-active September soybean oil contract in China’s Dalian exchange fell 2.4 per cent.
“The end (November) stocks are supposed to be higher and I think the market has anticipated it, so the price fall is temporary,” another Malaysian trader said.
A Reuters poll showed stocks hit a one-year high of 2.03 million tonnes in November as output was still higher than exports despite falling at a faster pace. Analysts have been bullish on a longer-term price outlook, with influential analysts James Fry and Dorab Mistry forecasting the palm oil price would go up to RM3,000 next year assuming that stocks will decline.
In the Malaysian physical palm oil market, asks/bids for December delivery were quoted at RM2,450/2,480
a tonne in the southern region and at RM2,450/2,470 in the central region
विदेश में अब सोयाबीन की पहले जैसी तेजी मुश्किल
मांग घटी:तेल की धार पतली:सीपीओ नरम
सटोरिया बिकवाली बढने से वायदे में सरसों दिसंबर डिलीवरी के भाव 6/7 रुपए टूटकर 619/650 रुपए प्रति 20 किलो रह जाने तथा तेल मिलों की मांग कमजोर होने से लारेंस रोड पर सरसों के भाव 50 रुपए घटकर 2675/2875 रुपए प्रति क्विंटल रह गया। तेल सरसों एक्सपेलर भी 5620 से घटकर 5500 रुपए रह गया। लुधियाना में बिनौला तेल के भाव 4360 की बजाय 4260 रुपए रह जाने की चर्चा यहां पर बिनौला तेल भी 50/100 रुपए घटाकर बोला गया। इंदौर में सोया रिफाइंड के भाव 4700 की बजाय 4620 रह जाने से यहां पर सोया रिफाइंड के भाव 100/125 रुपए टूटकर 4980 रुपए प्रति क्विंटल रह गए। तेल व चावल तेल में भी नरमी का रुख रहा।
साबुन निर्माताओं की मांग निकलने के कारण अखाद्य तेलों में भी कारोबार कमजोर रहा। एसिड ऑयल व पाम फैट्टी, राईस फैट्टी के भाव भी पूर्व स्तर पर सुस्त रहे। अरंडी तेल में 50 रुपए की गिरावट रही।
केएलसीई के माईनस में होने व सीपीओ के भाव दस डॉलर घटकर 740 डॉलर प्रति टन रह जाने की चर्चा व वनस्पति मिलों की मांग घटने से कांदला में क्रूड पाम ऑयल 348 से घटकर 345 रुपए प्रति 10 किलो रह गया
Tuesday, December 8, 2009
तेलों की बढती आवक से पामतेल चिंतित
India soybean futures ease on weak spot demand
India soybean seen weak on global leads, demand
India soybean drops on weak oilmeal exports
Monday, December 7, 2009
विदेशी गिरावट से सोना 460 रुपये लुढ़का
Refined Soy Oil bullish on long term
Soybean trade expected to trade lower
Mustard Seed demand from millers increase
Palm oil demand up on weak soybean crushing
चुस्त मांग ने उछाला सोयाबीन
शिकागो, 6 दिसम्बर। शिकागो वायदा व्यापार म गत सत्र लिवालों की भारी मांग से अमेरिकन सोयाबीन लगभग 1.3 प्रतिशत की ऊंची छलांग लगा गया। दूसरी ओर, निर्यात मांग में सुस्ती के कारा लिवाल गेहूं और मक्का से हाथ खींचे रहे। परिणामस्वरूप इन दोनों ही जिंसों के मूल्य गिरावट पर रहे। विश्लेषकों के अनुसार पिछले कुछ सप्ताह से खाद्यान्न व्यापार में जिंसों के मूल्य बाहरी व्यापारी के प्रभाव से रूघटते व बढते रहे हैं लेकिन इस दौरान क्रूड ऑयल यानी पेट्रो के लिए छितराए व्यापार और डॉलर की कमजोरी जैसे आंतरिक रुझान मक्का और गेहूं व्यापार पर भारी रहे और इनके मूल्यों को नियंत्रित करते रहे। दरअसल, विश्वभर में गेहूं उत्पादन में भरपूर वृद्धि यदि गेहूं के मूल्यों को दबाती रही तो दूसरी प्रमुख उत्पादन क्षेत्र मिडवेस्ट में अनुकूल मौसम के कारण उत्पादक किसान अंतत: मक्का का रिकॉर्ड उत्पादन समेटने में लगे हुए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इन दोनों ही जिंसों का रुझान तो हालांकि मंदी का ही है फिर भी इनका व्यापार फंड्स की ओर से उठाए जाने वाले कदम ही इन दोनों के मूल्यों में घटा-बढी के लिए जिम्मेदार हैं।
शिकागो वायदा में आलोच्य सत्र के दौरान दिसम्बर का मक्का 6.5 सैंट की हानि से 385 डॉलर प्रति बुशेल पर तथा दिसम्बर का कोमल लाल शरदीय गेहूं 4.5 सैंट की हानि से 5.50 डॉलर प्रति बुशेल पर तय हुआ। मक्का के वायदा मूल्य 24 नवम्बर से अब तक के न्यूनतम मूल्य रहे लेकिन आलोच्य सत्र में सोयाबीन के वायदा मूल्य निर्यात मांग में चुस्ती के कारण लाभ पर रहे। जनवरी का सोयाबीन 5.5 सैंट की बढत से 10.39 डॉलर प्रति बुशेल पर तय हुआ। सौलुमन सश ने अपने 3 माह और 6 माह के पूर्वानुमान 10.50 डॉलर प्रति बुशेल रहे जबकि इससे पूर्व के अनुमानों में यह मूल्य 10 डॉलर प्रति बुशेल जताए गए थे। गोल्डमन ने गेहूं के लिए 3 माह के पूर्वानुमान 5 डॉलर प्रति बुशेल तथा 6 माह के पूर्वानुमान 5.50 डॉलर प्रति बुशेल जताए हैं। अलबत्ता 12 माह के पूर्वानुमान में वृद्धि करते हुए गोल्डमन ने इन्हें 5.50 डॉलर के मुकाबले 6 डॉलर प्रति बुशेल जताया है। गेहूं के वैश्विक समाचारों के अनुसार कनाडा के गेहूं उत्पादन के लिए 365 लाख टन का अनुमान जताया गया है। कनाडा के सांख्यिकी विभाग द्वारा प्रस्तुत ये अनुमान व्यापारिक अनुमान से तो बढकर हैं ही विभाग द्वारा अक्तूबर में प्रस्तुत अनुमानों से भी 7.9 प्रतिशत अधिक हैं। अमेरिकी कृषि के अनुसार गत सप्ताह अमेरिकन गेहूं निर्यात 390707 से 450000 टन आंका जा रहा था। इजिप्ट के मुख्य गेहूं आयातक गास्क ने जताया कि इसने 1-15 फरवरी के बीच लदान योग्य लगभग 240000 टन रूसी और जर्मन गेहूं 198 डॉलर से 203 डॉलर प्रति टन के बीच मूल्यों पर खरीदा है जबकि अमेरिकन गेहूं का प्रस्ताव 231 डॉलर प्रति टन पर था
पाम तेल 6 माह के सर्वोच्च स्तर पर
कुआलालम्पुर, 5 दिसंबर । गत् सप्ताहांत इंडोनेशिया में चले पाम तेल सम्मेलन में प्रस्तुत टिप्पणियों से समर्थन पाकर मलेशियाई पाम तेल एक ही सत्र के मध्याहन तक 4.8 प्रतिशत की भारी बढत से 6 माह के अपने सर्वोच्च मूल्य स्तर को छूआ था। हालांकि सत्र के उत्तरार्द्घ में गत् मास स्टॉक में हुई वृद्घि तथा निर्यात में सुस्ती की वास्तविकता से दब कर इसके मूल्य कुछ लुढक गए। मलेशिया के बुर्सा वायदा में निर्देशक मास फरवरी के वायदा मूल्य देखते-देखते 118 रिंगिट के लाभ से 2596 रिंगिट (786.3 डॉलर) प्रति टन पर जा पहुंचा और अंतत: 2562 रिंगिट प्रति टन पर बंद हुआ। पाम तेल का यह मूल्य स्तर 5 जून के बाद पहली बार देखने में आया है। ध्यान रहे कि सम्मेलन में पाम तेल उद्योग के शीर्घस्थ विशेषज्ञों दोराब मिस्त्री तथा जेम्स फ्राई ने जताया कि बढती मांग और क्रूड ऑयल (पैट्रो) के मूल्यों में वृद्घि के कारण आगामी वर्ष (2010) में पाम तेल के मूल्य 3000 रुपए प्रति रिंगिट तक पहुंच सकते हैं। पाम तेल स्टॉक में चल रही कभी भी इसी प्रकार के संकेत दे रही है। उधर दूसरी ओर व्यसापारिक अनुमान है कि नवम्बर और दिसम्बर में पॉम तेल का बढता स्टॉक इसके मूल्यों को निरंतर दबाता रहेगा। अलबत्ता वर्षा के कारण इसके उत्पादन में कमी से इसके मूल्यों में वृद्घि की उम्मीद संभावना बन सकती है। उधर फण्ड्स की ओर से बिकवाली के कारण व्यापार में 25-25 टन के 22897 लाख टन की दोगुनी मात्रा व्यापार में उपलब्ध रही। एक सामान्य सत्र में 10 से 12 हजार लाट्स का ही निपटान हो पाता है। आलोच्य सत्र में अन्य वनस्पति तेल व्यापार हालांकि क्रूड ऑयल की नरमी से थोडा बहुत दिशा-निर्देश प्राप्त करते परंतु अधिकतर वे पाम तेल पर ही अपनी एकाग्रता बनाए रहे। जनवरी की डिलिवरी का अमेरिकन सोया तेल 1.4 प्रतिशत की बढत से व्यापार कर गया जबकि चीन के डालियन वायदा व्यापार में सर्वाधिक चर्चित सितम्बर 2010 का सोयाबीन लगभग 2 प्रतिशत की छलांग लगा गया।
विश्व में पाम तेल के सबसे बडे उत्पादक इंडोनेशिया में जकार्ता स्थित सरकारी विक्रय केंद्र में 9000 टन पाम तेल 7226 रुपए (0.768 डॉलर) प्रति किलोग्राम के मूल्यों पर बिका। जकार्ता में ही रिफाइनर्स ने आरबीडी पामोलीन पूर्व के 6900-6950 रुपए प्रति किलोग्राम की बजाय 7000 से 7150 रुपए प्रति किग्रा के मूल्यों पर बेचा
खाद्य तेलों में भारी तेजी के बाद नरमी:डीओसी तेज
नई दिल्ली, 5 दिसम्बर (एनएनएस)। खरीफ सीजन के तिलहनों का उत्पादन कम होने से सरसों में स्टॉकिस्ट माल बेचने से पीछे हट गये, जिसके चलते इसका भाव 50 रुपए महंगा होकर ठहर गया। सरसों तेल 220 रुपए बढने के बाद 40/50 रुपए मुलायम हो गया। इसी क्रम में सोया, मूंगफली, बिनौला एवं तिल तेल भी 50/100 रुपए बढकर कुछ नरम हो गये, जबकि सरसों डीओसी प्लांटों में माल की कमी होने से 500 रुपए एवं सूरजमुखी डीओसी 400 रुपए प्रति टन तेज हो गयी। तेल वाली खलों में भी 50/75 रुपए की तेजी रही।
सरसों की बिजाई कम होने के साथ-साथ सोयाबीन, मूंगफली, बिनौला का उत्पादन घटने से सरसों में स्टॉकिस्ट माल बेचने से पीछे हटने लगे हैं, जिससे 42 प्रतिशत कंडीशन की सरसों 50 रुपए बढकर 2940/2950 रुपए बिक गयी। इसका तेल भी 220 रुपए उछलकर ऊपर में यहां 5700 रुपए बिक गया। बाद में कुछ रि-सेलरों की बिकवाली आने से इसमें 50 रुपए की नरमी आ गयी। सोयाबीन की आपूर्ति घटने से इसका तेल भी 150 रुपए बढकर 5250 रुपए बिकने के बाद पुन: 5100 रुपए पर आ गया। बिनौला तेल भी घटबढकर सप्ताहांत में दब गया। हालांकि मलेशिया में सीपीओ 745 डॉलर पर 10/15 डॉलर प्रति टन सुर्ख रहा। जिससे कांदला में भी इसके भाव 40/50 रुपए तेज बोले गये। लेकिन बढे हुए भावों पर पर सप्ताहांत में ग्राहकी सुस्त पड गयी। वनस्पति घी में पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल एवं झारखंड की शादियों की मांग निकलने से 15/20 रुपए प्रति टीन की तेजी आ गयी। हल्के माल 630/640 रुपए से बढकर 650/660 रुपए प्रति टीन बिक गये। सरसों डीओसी अलवर लाइन में निर्यातकों की पकड मजबूत होने से 12000 से बढकर 12500 रुपए प्रति टन हो गयी, जिससे यहां भी इसके भाव में 13000 रुपए प्रति टन पर 700/800 रुपए की तेजी आ गयी। सूरजमुखी डीओसी भी 13500/13900 रुपए पर 400 रुपए उछल गयी। सोया डीओसी में भी 200 रुपए का और इजाफा हो गया। तेल वाली सरसों खल भी नए बारदाने में 1480 से बढकर 1575 रुपए बिक गयी।
जिंस (क्विं.) सप्ताह पूर्व वर्तमान
भाव भाव
सरसों 2875 2950
तेल सरसों 5580 5700
तेल सोया 5100 5150
तेल बिनौला 4550 4500
सरसों डीओसी टन 12300 13000
सोया डीओसी टन 21400 21600
मार्च तक सीपीओ 20 प्रतिशत और महंगा होने का अनुमान घरेलूसीपीओ बाजार भी तेज हुए
नई दिल्ली, 5 दिसम्बर (एनएनएस)। पाम तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमतों में और तेजी आने का अनुमान है। यह निष्कर्ष मलेशिया में हाल ही में हुई एक बैठक में उभर कर सामने आया है। गोदरेज इंटरनेशनल के लंदन स्थित निदेशक तथा प्रसिद्ध विश्लेषक श्री दोराब मिस्त्री का मानना है कि आगामी मार्च माह तक पाम तेल की वैश्विक कीमतें करीब 20 प्रतिशत और तेज हो सकती हैं।
श्री मिस्त्री के इस अनुमान के चलते न सिर्फ क्वालालम्पुर स्थित बुर्सा मलेशिया डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (केएलसीई) के सक्रिय तिमाही वायदों में ही तेजी का रुख बना हुआ है बल्कि खाद्य तेलों के घरेलू हाजिर व वायदा बाजारों में भी हाल ही में तेजी दर्ज की गई है। हालांकि सप्ताहांत की वजह से केएलसीई में आज कारोबारी अवकाश रहा लेकिन इससे पूर्व यानी शुक्रवार को काफी तेजी देखी गई। शुक्रवार को कारोबार के आरम्भिक सत्र के अंत में सक्रिय तिमाही वायदों में कोई विशेष तेजी नहीं आई थी। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण यह है कि आरम्भिक सत्र के अंत में नजदीकी माह की वायदा कीमतों में तो कोई उतार-चढाव ही नहीं हुआ था जबकि दूसरे व तीसरे माह के अनुबंधों में भी केवल 10 तथा 15 रिंगिट प्रति टन का ही सुधार हुआ था। लेकिन मध्यान्ह बाद का सत्र तूफानी तेजी का रहा।
विशेषज्ञों की बैठक से आ रहे निष्कर्षों के समाचारों के कारण मध्यान्ह बाद के सत्र के दौरान केएलसीई का नजदीकी माह अनुबंध जहां 19 रिंगिट तेज हुआ वहीं अन्य दोनों महीनों के सौदों में क्रमश: 90 व 97 रिंगिट प्रति टन की तेजी दर्ज की गई। दूसरी ओर, प्रतिस्पर्द्धी सोयाबीन तेल की वायदा कीमतों में नाममात्र का सुधार हुआ। शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड के सक्रिय त्रैमासिक वायदों में आज भी कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं हुआ।
इसके उलट, मल्टी कमॉडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया के सक्रिय वायदों में शुक्रवार को तेजी का वातावरण रहा था। शुक्रवार को सक्रिय दिसम्बर क्रूड पाम तेल वायदा जहां करीब 7 रुपए बढकर 351 रुपए पर पहुंच गया था, वहीं जनवरी वायदा 458 रुपए पर करीब सवा नौ रुपए उछल गया था। हालांकि आज इन वायदों में करीब एक-डेढ रुपए की नरमी आई, लेकिन धारणा मजबूती की ही बनी हुई थी।
अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू वायदा बाजारों में आई इस तेजी को देखते हुए हाजिर बाजारों में भी पाम तेल की कीमतें तेजी से बढ गई। मुम्बई खाद्य तेल बाजार में पाम तेल थोक में 395 रुपए कर अतिरिक्त के स्तर पर बोला जा रहा था। दो दिन के भीतर इसमें लगभग 15 रुपए की तेजी आ चुकी है। जलगांव स्थित अग्रणी व्यापारी कुशल खंडेलवाल ने बताया कि आने वाले दिनों में पाम तेल बाजारों में और तेजी की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय संकेत काफी मजबूती के हैं।
श्री दोराब मिस्त्री का कहना है कि मार्च, 2010 तक क्रूड पाम तेल (सीपीओ) लगभग 20 प्रतिशत बढकर 3000 रिंगिट प्रति टन का स्तर छू सकता है क्योंकि इसका उत्पादन बढती मांग की तुलना में काफी कम होगा। उन्होंने कहा कि अब से लेकर वर्ष 2010 के आरम्भिक तीन महीनों के दौरान सीपीओ बढता हुआ 2800 से 3000 रिंगिट प्रति टन के बीच पहुंच सकता है। उन्होंने सीपीओ में इस तेजी का प्रमुख कारण यह बताया कि अनेक देशों की आर्थिक सेहत में हो रहे सुधार को देखते हुए वर्ष 2010 के दौरान सीपीओ की मांग बढते हुए 55 लाख टन तक पहुंच जाने की उम्मीद है। इसके विपरीत इसका उत्पादन करीब 45 लाख टन के आसपास रहने का अनुमान है।
इधर भारत में प्रमुख खरीफ तिलहन, सोयाबीन, के उत्पादन में कमी आने के कारण खाद्य तेलों का आयात पुन: बढने की आशंका व्यक्त की जा रही है। हाल ही में समाप्त हुए नवम्बर माह के आरम्भ में मध्य प्रदेश की वाणिज्यिक राजधानी समझे जाने वाले इंदौर, में आयोजित हुए सेमिनार में उद्योग व व्यापार ने चालू तेल-तिलहन वर्ष के दौरान सोयाबीन का उत्पादन घटकर 85 लाख टन होने का अनुमान व्यक्त किया था। इससे पूर्व सीजन में इसका 89 लाख टन उत्पादन हुआ था। इतना ही नहीं, व्यापारिक सूत्रों द्वारा प्रमुख रबी तिलहन, सरसों, के उत्पादन के प्रति भी अभी से आशंकाएं व्यक्त की जाने लगी हैं। ऐसे में आशंका यह है कि चालू तेल-तिलहन वर्ष के दौरान खाद्य तेलों का आयात तुलनात्मक रूप से बढ सकता है।
यदि इस बार भी खाद्य तेलों का आयात बढता है तो इन तेलों के उपभोक्ताओं को भी ऊंची कीमतों के रूप में इसका खामियाजा चुकाना पड सकता है।
Sunday, December 6, 2009
उत्पादन घटने से मार्च तक 21 फीसदी बढ़ सकते हैं पाम तेल के दाम
पिछले तीन सप्ताह के भीतर पाम तेल की कीमतों में 300 रिंगिट की तेजी दर्ज की जा चुकी है। मिस्त्री ने आगाह किया है कि पाम तेल के भाव 2010 की पहली तिमाही के आखिर तक 2800-3000 रिंगिट हो जाएंगे।
सीपीओ में इस बढ़ोतरी के लिए उन्होंने मुख्य रूप से मलेशिया एवं इंडोनेशिया में सीपीओ के उत्पादन की बढ़ोतरी में ब्रेक लगने, विश्व स्तर पर खाद्य तेलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए उचित प्रयास नहीं होने के साथ बायोडीजल की बढ़ती मांग को जिम्मेदार बताया है।
आने वाले समय में पाम तेल की तेजी के लिए मिस्त्री डॉलर के कमजोर रहने, कच्चे तेल की कीमत प्रति बैरल 80 डॉलर के आसपास रहने एवं आगामी अप्रैल तक वनस्पति तेल के आयात पर भारत सरकार द्वारा कोई आयात कर नहीं लगाने को भी मुख्य कारण मानते हैं।
4 दिसंबर को इंडोनेशिया के बाली शहर में आयोजित पाम सम्मेलन में मिस्त्री के पेश किए आकलन के मुताबिक वर्ष 2009-10 (2009, नवंबर से 2010 अक्टूबर) के दौरान भारत में खाद्य तेल के आयात में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। लेकिन कच्चे पाम तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के लक्षण अभी से दिखने लगे हैं।
डॉलर के कमजोर होने एवं निर्यात मांग मजबूत होने के कारण भी पाम तेल की कीमतें बढ़ी हैं, लेकिन आने वाले समय में यानी कि वर्ष 2010 में पाम तेल के उत्पादन में भी गिरावट की आशंका जाहिर की गई है। दूसरी तरफ इंडोनेशिया सरकार ने पाम तेल से घरेलू बाजार के लिए बायोडीजल बनाने का भी फैसला किया है।
मिस्त्री के मुताबिक गत पांच सालों में विश्व के 17 देशों में खाद्य तेल एवं वनस्पति के उत्पादन में 27.34 मिलियन टन का इजाफा दर्ज किया गया है। इनमें से 11.95 मिलियन टन की हिस्सेदारी पाम तेल की है। ऐसे में पाम तेल के उत्पादन में कमी होने से या उसका बायोडीजल के लिए इस्तेमाल होने से विश्व खाद्य तेलों के भाव में बढ़ोतरी होना लाजिमी है।
मिस्त्री के मुताबिक पाम तेल के लिए पूरा विश्व मुख्य रूप से मलेशिया और इंडोनेशिया पर निर्भर करता है। लेकिन मलेशिया और इंडोनेशिया भी एक सीमा तक ही पाम तेल का उत्पादन कर सकता है। मलेशिया की सीमा समाप्त होने लगी है और इंडोनेशिया भी उस ओर अग्रसर है। और इसका सीधा असर खाद्य तेल की कीमतों पर पड़ेगा।
वर्ष 2010 में खाद्य तेल के उत्पादन में पाम तेल का योगदान कम होने जा रहा है। वर्ष 2008 में मलेशिया में कच्चे पाम तेल (सीपीओ) का उत्पादन 17.734 मिलियन टन रहा। और वर्ष 2009 में यहां सीपीओ का कुल उत्पादन 17.5 मिलियन टन रहने का अनुमान है।
वर्ष 2010 के दौरान मलेशिया के पाम पेड़ों के अधिक उत्पादकता के चक्र के समाप्त होने एवं निम्न उत्पादकता चक्र के शुरू होने के साथ अगले साल वहां एल नीनो असर के कारण पाम तेल के उत्पादन में कमी के आसार हैं। मिस्त्री ने कहा कि मांग के लिहाज से वर्ष 2010 में बायोडीजल की मांग के अलावा और कोई बदलाव आने की संभावना नहीं है।
वर्ष 2010 के लिए 30 लाख टन बायोडीजल की मांग का अनुमान लगाया गया है। लेकिन वे कहते हैं कि बायोडीजल की मांग 10 लाख से 25 लाख टन के बीच रहेगी। खाद्य तेल की मांग लगातार तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसके उत्पादन को बढ़ाने के लिए कुछ खास नहीं किया जा रहा है।