Tuesday, June 30, 2009

सोयाबीन की बुवाई पिछड़ी पर आगे तेजी आने की उम्मीद


मानसून में देरी का असर सोयाबीन की बुवाई पर दिखने लगा है। इस महीने के दौरान सोयाबीन के रकबे में करीब 80 फीसदी की गिरावट आई है। हालांकि उद्योग जगत ने इस साल भी पैदावार पिछले साल के बराबर रहने की उम्मीद जताई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल एक जून से 25 जून के दौरान करीब 163,000 हैक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई हो चुकी है। पिछले साल इस अवधि के दौरान करीब 811,000 हैक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई हुई थी। जानकारों का मानना है कि मुख्य रूप से मानसून के पिछड़ने से सोयाबीन की बुवाई भी पिछड़ रही है।

सोपा के प्रवक्ता राजेश अग्रवाल के मुताबिक आमतौर पर देश में सोयाबीन की बुवाई जुलाई में जोर पकड़ती है। लिहाजा मध्य जुलाई तक का रकबा महत्वपूर्ण होता है। जून के दौरान बुवाई पिछड़ने के बावजूद यदि जुलाई में मानसून जोर पकड़ता है तो रकबा पिछले साल के बराबर आसानी से जा सकता है। भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक अगले तीन-चार दिनों के दौरान देश के सोयाबीन उत्पादक इलाकों में मानसून जोर पकड़ सकता है। राजेश अग्रवाल का मानना है कि पूर हालात का आकलन मध्य जुलाई तक ही हो सकेगा।

उल्लेखनीय है कि 23 मई को देश के दक्षिणी तट पर मानसून के आगमन के बाद पिछले दो सप्ताह तक इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई थी। गुजरात अंबुजा एक्सपोर्ट के निदेशक संदीप अग्रवाल ने भी माना कि मौजूदा रकबा से कुल पैदावार में गिरावट का आकलन नहीं लगाया जा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जुलाई के दौरान मानसून यदि सुधरता है तो पिछले साल के मुकाबले पैदावार बढ़ भी सकती है। अमेरिकन ग्रेन काउंसिल के भारत में प्रतिनिधि अमित सचदेवा के मुताबिक फि लहाल सोयाबीन का रकबा बढ़ने के लिए समय पर्याप्त है

No comments:

Post a Comment