
नार्दर्न ग्रिड के एक बड़े अधिकारी के मुताबिक मानसून के आगमन में काफी देरी हो रही है और उत्तर भारत में तापमान औसतन 44 से 45 डिग्री सेंटीग्रेड तक चला गया है। ऐसे में ग्रिड पर बोझ काफी बढ़ गया है। राज्यों की मांग भी बढ़ गई है। खासकर जिन राज्यों में बुवाई का सीजन चल रहा है, वहां से बिजली की मांग का दबाव ज्यादा है। पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में बिजली की मांग नए रिकार्ड बना रही है। ऐसे में बिजली की खपत को पूरा करना मुश्किल साबित हो रहा है। हालात यह है कि बुधवार और गुरुवार को ग्रिड की फ्रिक्वेंसी कई बार 49 से कम हो गई। अगर ज्यादा देर तक इस स्तर पर फ्रिक्वेंसी होती है तो ग्रिड को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ ग्रिड के फेल होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
गुरुवार को फ्रिक्वेंसी दिन में तीन बार से भी ज्यादा 49 से नीचे गई। एक बार तो यह 48.80 पर भी आ गई थी। किसी तरह के अन्य खतरे से बचने के लिए कई राज्यों को बिजली सप्लाई तुरंत रोकनी पड़ी जिसके बाद स्थिति में कुछ सुधार हुआ। उक्त अधिकारी के मुताबिक सिर्फ मांग में ही बढ़ोतरी नहीं हुई है, बल्कि सप्लाई भी कम हुई है। एनटीपीसी का सिंगरौली प्लांट अपनी क्षमता से 500 मेगावाट कम बिजली का उत्पादन कर रहा है। दादरी गैस और थर्मल प्लांट दोनों मिलाकर 150 मेगावाट कम बिजली का उत्पादन कर रहे हैं। भाखड़ा डैम से 633 मेगावाट कम बिजली मिल रही है
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