देश के कई इलाकों में मानसून सक्रिय होने से सोयाबीन में तेजी का दौर थम गया है। मानसून में विलंब और मध्य प्रदेश में बुवाई शुरू नहीं होने के कारण सोमवार को सोयाबीन के भाव बढ़कर खुले थे। लेकिन मानसून सक्रिय होने की खबर मिलने के बाद शनिवार को सोयाबीन के भावों में दो फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। वायदा सौदों में भी सप्ताहांत सोयाबीन के भाव नरम हो गए। इस वजह से सोयाबीन में और नरमी की संभावना व्यक्त की जा रही है।
कोटा के व्यापारी विष्णु पोकार ने बताया कि मानसून में देरी के कारण सोमवार को कोटा मंडी में सोयाबीन के भाव बढ़त के साथ खुले और शुक्रवार तक 2450 से 2475 रुपये क्विंटल पर पहुंच गए थे। लेकिन शुक्रवार को देश के कई इलाकों में मानसून की बारिश और राजस्थान में मानसून पूर्व बारिश होने से शनिवार को सोयाबीन के भाव दो फीसदी से ज्यादा घटकर 2400 से 2425 रुपये क्विंटल रह गए। इंदौर मंडी में भी कमोबेश यही रुख देखा गया। एनसीडीईएक्स में भी सप्ताहांत जुलाई वायदा सोयाबीन में नरमी का रुख रहा। शनिवार को जुलाई वायदा सोयाबीन 2519 रुपये क्विंटल दर्ज की गई। इस वजह से जुलाई वायदा सोयामील के भाव भी नरम होकर फिर 22060 रुपये टन तक उतर गए। उन्होंने बताया कि आमतौर पर मध्य प्रदेश में 15 जून के बाद सोयाबीन की बुवाई शुरू हो जाती है। लेकिन मानसून में देरी के कारण इस साल अब तक बुवाई का काम शुरू नहीं हो सका है। वहीं राजस्थान में भी इस साल बुवाई में विलंब की आशंका है। पैदावार पर इसका कितना असर पड़ेगा, इसका आकलन बुवाई पूरी होने के बाद ही लग पाएगा।
जयपुर के ब्रोकर प्रीति कुमार का कहना है कि आयातित खाद्य तेल सस्ते होने से प्लांटों के पास तेल का स्टॉक बढ़ा है। इस कारण भी जून के दौरान सोयाबीन के भावों पर दबाव बढ़ा है। अब मानसून सक्रिय होने से सोयाबीन में नरमी की धारणा और मजबूत हो गई है। इससे सोयाबीन में नरमी का रुख कुछ दिन और बरकरार रह सकता है। लेकिन बुवाई में देरी से जुलाई में सोयाबीन की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिल सकती है। पिछले वर्ष सोयाबीन की पैदावार लगभग 85 लाख टन ही बैठने से हाजिर में माल ज्यादा नहीं बचा है। वहीं इस साल मानसून कमजोर रहने के पूर्वानुमान को देखते हुए पैदावार में और गिरावट आ सकती है। इस वजह से सोयाबीन में मौजूदा गिरावट अस्थाई साबित हो सकती है।
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