Wednesday, July 1, 2009

आवक घटने के कारण एमपी में सरसों के भाव मजबूत


मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की मंडियों में आवक घटने के कारण सरसों के भाव एक माह के दौरान करीब 100 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ गए हैं। सरसों की तेजी को सोयाबीन का रकबा घटने से भी बल मिल रहा है। बाजार के जानकारों के मुताबिक आने वाले दिनों में सरसों का भाव 2700 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच सकता है।
अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह में सरसों का भाव 2275 से 2325 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा था। वहीं मंगलवार को भिंड, ग्वालियर और मुरैना की मंडियों में सरसों 2425 से 2450 रुपये प्रति क्ंिवटल के बीच बिकी। मौजूदा समय में प्रदेश की कुल 21 कृषि उपज मंडियों मंे आठ से नौ हजार क्विंटल प्रतिदिन की आवक बनी हुई है। जबकि एक माह पूर्व प्रदेश की मंडियों में 42 से 53 हजार क्विंटल प्रतिदिन सरसों की आवक हो रही थी। गौरतलब है कि प्रदश्ेा में सरसों की 9त्त फीसदी फसल इसी क्षेत्र में होती है।

ग्वालियर में सरसों का थोक व्यापार करने वाले व्यापारी नवीन जैन ने कहा कि सरसों के दाम में एक माह के दौरान प्रति क्विंटल 100 से 125 रुपये बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि 41 कंडीशन सरसों का भाव 2450 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है वहीं नॉन कंडीशन सरसों का भाव 2425 रुपये प्रति क्ंिवटल चल रहा है। जैन के मुताबिक मंडियों में आवक कम हो गई है। इसके अतिरिक्त प्रदेश के मालवा और निमाड अंचल में अब तक सोयाबीन की बुवाई शुरू नहीं हो पाई है, जिसके कारण इसका उत्पादन प्रभावित हो सकता है। जैन ने बताया कि ग्वालियर मंडी में इस समय 1500 से 1700 बोरा सरसों प्रतिदिन आ रही है। वहीं मुरैना में मंडी व्यापारी पप्पू अग्रवाल ने कहा कि मुरैना मंडी में इस समय आवक लगभग आधी रह गई है जिसके कारण आने वाले दिनों में सरसों के दाम और बढ़ने की संभावना है।

अग्रवाल के मुताबिक मंगलवार को सरसों 2425 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिकी है। वहीं भिंड के व्यापारी सुनील जैन ने कहा कि सोयाबीन की बुवाई में देरी होने के कारण सरसों के भाव आने वाले 15 दिनों में तेजी से बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि बुवाई की स्थिति स्पष्ट होने के बाद भाव में स्थिरता आ सकती है। क्षेत्र में मुख्य रूप से पूजा बोल्ड, क्रांति और वरुणा सरसों है। गौरतलब है कि इस वर्ष प्रदेश में सरसों की बंपर पैदावार हुई है। रबी सीजन में 10 लाख से अधिक हैक्टेयर क्षेत्र में सरसों की बुवाई की गई थी और 12 लाख टन से अधिक सरसों की पैदावर का अनुमान लगाया गया है

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