जून के महीने में मानसून की बेरुखी से होने वाले नुकसान की भरपाई अब जुलाई-अगस्त में होने वाली बारिश पर टिकी है। हालांकि, इसमें भी धोखा होने की सूरत में किसानों को अन्य विकल्प भी सुझाए जा रहे हैं। कृषि से संबंधित लगभग हर विभाग में मानसून कमेटी का गठन हो गया है। इसी तरह बारिश की कमी की किसी भी समस्या से निपटने की रणनीति बनाई जा रही है।
केंद्रीय कृषि सचिव टी. नंद कुमार ने गुरुवार को कहा कि जुलाई-अगस्त में होने वाली बरसात खरीफ की फसलों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। उनका कहना है कि अगर इन दो महीनों में बारिश अच्छी हो जाती है, तो पिछले वर्ष के बराबर पैदावार प्राप्त की जा सकती है। नंद कुमार ने गुरुवार को मानसून की कमी से प्रभावित सभी राज्यों के सचिवों से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि मानसून को लेकर तकनीकी सलाह देने वाली भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की हेल्पलाइन शुक्रवार से ही शुरू हो जाएगी। इसके अलावा अत्यंत छोटी अवधि में ही पैदावार देने में सक्षम माने जाने वाले बीज भी राज्यों को आवश्यकता पड़ने पर तुरंत उपलब्ध कराए जाएंगे।
इस बीच, मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान के लिए राष्ट्रीय केंद्र (एनसीएमआरडब्ल्यूएफ) के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून के कर्नाटक में अब और आगे बढ़ने के आसार नजर आ रहे हैं। इसके अलावा अगले दो-तीन दिनों में दक्षिण राजस्थान, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ में बारिश होने का अनुमान है
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