Wednesday, June 24, 2009

देश में मानसून सक्रिय होते ही ग्वार में भारी गिरावट


राजस्थान की मंडियों में ग्वार व ग्वार गम में तेजी का दौर थम गया है। मानसून की धीमी चाल के कारण पिछले तीन दिन में ग्वार में दो से तीन फीसदी की तेजी देखने को मिली थी। लेकिन मानसून के सक्रिय होने से ग्वार व ग्वार की लिवाली कमजोर पड़ गई है। इस वजह से मंगलवार को ग्वार व ग्वार गम के भाव तीन फीसदी तक घटाकर बोले गए।

थोक व्यापारियों का कहना है कि रकबा घटने की आशंका और मानसून की धीमी प्रगति के कारण लिवाली निकलने से पिछले तीन दिन में जोधपुर मंडी में ग्वार मिल डिलीवरी के भाव लगभग तीन फीसदी सुधरकर 1875 से 1900 और ग्वार गम के भाव 3725 से 3750 रुपये क्विंटल हो गए थे। कमोबेश यही रुख रहने से जयपुर मंडी में भी ग्वार मिल डिलीवरी 56 रुपये तक बढ़कर 1820 से 1870 रुपये और ग्वार गम के भाव 125 रुपये की तेजी से 3700 रुपये क्विंटल पर पहुंच गए थे। पर जैसे ही मानसून सक्रिय होने की खबर मिली, ग्वार व ग्वार गम में तेजी पर ब्रेक लग गया। इस वजह से मंगलवार को जयपुर में ग्वार के भाव चार फीसदी तक घटकर 1780 से 1800 और जोधपुर मंडी में 1850 से 1875 रुपये क्विंटल रह गए हैं। ग्वार में तेजी थमने से ग्वार गम के भाव भी करीब डेढ फीसदी घटकर 3650 से 3675 रुपये क्विंटल रह गए हैं।

हाजिर में नरमी से एनसीडीईएक्स में जुलाई वायदा सौदों में ग्वार सीड व ग्वार गम में गिरावट दर्ज की गई। मंगलवार को जुलाई वायदा ग्वार गम 3705 और ग्वार सीड के भाव 1784 रुपये क्विंटल पर बंद हुए। जयपुर के ग्वार कारोबार राम अवतार खंडेलवाल ने बताया कि मानसून की धीमी चाल और राजस्थान व हरियाणा के सिंचित क्षेत्रों में रकबा चालीस फीसदी तक घटने की खबरों से ग्वार व ग्वार गम की मांग में सुधार हुआ था। लेकिन मंगलवार को मौसम में बदलाव तथा मानसून सक्रिय होने के समाचार मिलने से ग्वार व ग्वार गम की खरीद धीमी पड़ गई है। अब सब कुछ मौसम पर निर्भर है। अगर मानसून की प्रगति उम्मीद के मुताबिक रहती है तो ग्वार व गम के भावों पर कुछ दबाव देखने को मिल सकता है

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