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Monday, August 31, 2009
FACTBOX-Impact of India~s previous drought on crops

India sugar steady ahead of September non-levy quota
India soybean futures down on weak CBOT, rains
कमोडिटी की कीमतों का क्या ट्रेंड रहेगा?
कमोडिटी की
चीनी के भाव में छह फीसदी गिरावट
सरकार की सख्ती और सितंबर महीने का कोटा ज्यादा आने की संभावना से चीनी की कीमतों में पिछले दो दिनों में करीब 6.3 फीसदी की गिरावट आई है। दिल्ली थोक बाजार में एम ग्रेड चीनी के भाव शनिवार को घटकर 2900 से 2950 रुपये और उत्तर प्रदेश में एक्स-फैक्ट्री भाव 2800 से 2850 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। खाद्य मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक त्यौहारी सीजन के कारण सितंबर महीने के लिए चीनी का कोटा 20 लाख टन जारी होने की संभावना है। जुलाई में सरकार ने 16.5 लाख टन चीनी का कोटा जारी किया था। खाद्य मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार सरकार चीनी की कीमतों पर लगातार नजर रखे हुए है। त्यौहारी सीजन में चीनी की मांग बढ़ जाती है इसलिए सिंतबर महीने का कोटा बढ़ाकर 20 लाख टन जारी करने की संभावना है। पिछले दो महीने से लगातार कोटे में बढ़ोतरी की जा रही है। अगस्त में 16.5 और जुलाई में सरकार ने 14.9 लाख टन का कोटा जारी किया था। उद्योग सूत्रों के अनुसार सरकार द्वारा बड़ी उपभोक्ता कंपनियों पर स्टॉक लिमिट लगा देने से चीनी की मांग पहले की तुलना में काफी घट गई है। साथ ही राज्य सरकारों द्वारा सख्ती करने और आयातकों को पोर्ट पर आयातित चीनी का भंडार 30 दिन से ज्यादा नहीं रखने के निर्देश से भी गिरावट को बल मिला है। दिल्ली थोक बाजार में पिछले दो दिनों में चीनी की कीमतों में 200 रुपये की गिरावट आकर भाव 2900 से 2950 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। मांग घटने के कारण उत्तर प्रदेश में एक्स-फैक्ट्री चीनी के दाम घटकर 2800 से 2850 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। मुंबई में चीनी के भाव घटकर 2950-3000 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। हालांकि फुटकर बाजार में अभी भी चीनी के दाम 32 रुपये प्रति किलो से ऊपर ही बने हुए हैं। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अध्यक्ष समीर एस. सोम्मैया के अनुसार अभी तक 40 लाख टन रॉ शुगर (गैर-रिफाइंड चीनी) के आयात सौदे किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में हुई वर्षा से गन्ने की फसल को फायदा हुआ है। अक्टूबर महीने से शुरू होने वाले नए सीजन में चीनी का उत्पादन बढ़कर 160 लाख टन होने की संभावना है। नए सीजन पर चीनी का बकाया स्टॉक मात्र 20-25 लाख टन ही बचने की संभावना है जबकि पिछले साल नए सीजन पर 100 लाख टन का बकाया स्टॉक था। भारत की मांग से अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले एक महीने में चीनी की कीमतें करीब 23 फीसदी बढ़ चुकी हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में रॉ शुगर के भाव बढ़कर 23.52 सेंट प्रति पाउंड हो गए हैं जबकि 29 जुलाई को इसके भाव 19.09 सेंट प्रति पाउंड थे। रॉ शुगर के भाव भारतीय बंदरगाह पर पहुंच करीब 2500 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर बैठ रहे हैं इसमें रिफाइनिंग और ट्रांसपोर्ट का खर्च जोड़ने के बाद इसके भाव 3000 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा बैठ रहे हैं।
Rains give India soybean new life, more needed
ANALYSIS-As monsoon winds down, risk shifts to winter wheat

India soybean falls for 8th day on overseas cues, rains
TABLE-India rice, oilseed area down; cotton, corn up
India state govts ask firms for sugar stock details
मॉनसून की वापसी से स्थिति में सुधार
पुणे August 28, 2009
देश के केवल 3 इलाकों, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में औसत से कम बारिश हुई है और कमी 50 प्रतिशत से ज्यादा है। तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, उड़ीसा, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, रॉयलसीमा (आंध्र प्रदेश), लक्षद्वीप और अंडमान निकोबार द्वीप समूह में अब बारिश की सीमा सामान्य को पार कर चुकी है।
हालांकि 22 मॉनसून मंडलों में अभी भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है, जिसमें उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के इलाके शामिल हैं। हरियाणा एक मात्र ऐसा मंडल है, जहां बारिश बहुत कम (64 प्रतिशत कम) और गुजरात के सौराष्ट्र-कच्छ इलाके में भारी बारिश (29 प्रतिशत ज्यादा) हुई है।
ये आंकड़े 26 अगस्त तक के हैं, जो भारतीय मौसम विभाग की रिपोर्ट से पता चलता है। शेष भारत में 514.3 मिलीमीटर बारिश हुई है, जो औसत सालाना सामान्य बारिश से 25 प्रतिशत कम है। आईएमडी की रिपोर्ट में कहा गया है कि 26 अगस्त तक सामान्यतया 682 मिलीमीटर औसत बारिश होनी चाहिए।
बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत करते हुए आईएमडी के एक उच्च अधिकारी ने कहा कि अभी इस बात की संभावना है कि कुछ और मंडलों में बारिश सामान्य स्तर पर पहुंच जाए। ऐसा सितंबर के दूसरे सप्ताह तक हो सकता है। अधिकारी ने कहा, 'हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्थिति वाकई बहुत गंभीर है। (बीएस हिन्दी
सरकार जल्द दे सकती है चीनी आयात की इजाजत
नई दिल्ली : आम आदमी की जेब में ही नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ यूपीए के साझेदार दलों के बीच भी कड़वाहट घोलने पर आमादा दिख रही चीनी की बड़ी मात्रा जल्दी ही आयात की जा सकती है। लेवी कोटे के लिए चीनी की मात्रा बढ़ाने पर चीनी उद्योग के साथ सरकार की बातचीत के कई दौर बेनतीजा होने और कांग्रेस के कुछ नेताओं के बाद पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के भी खाद्य एवं कृषि मंत्री शरद पवार को चिट्ठी भेजने से चीनी को लेकर सियासी बेचैनी बढ़ती दिख रही है। इसके चलते सरकार और मंत्रियों का अधिकार प्राप्त समूह (ईजीओएम) अगले चार महीनों में करीब 50 लाख टन चीनी आयात करने को हरी झंडी दिखा सकती है।
INTERVIEW-Recent rains to boost India sugar cane crop, yield
Saturday, August 29, 2009
India soybean end down as rain brightens output hopes
India~s monsoon may be the worst since 1972
India to import 225,000 T raw sugar in Sept-sources
India monsoon worst in 40 yrs, crops, power at risk

Friday, August 28, 2009
Climate change hits crop yields in Nepal - report
India soybean down as rains dampen sentiments
India water reservoirs at 42 pct capacity - govt
सरसों उगाने का सुनहरा मौका
नई दिल्ली August 26, 2009
इस खेती से उन्हें सरसों के साथ-साथ गेहूं बोने का भी मौका मिल जाएगा। दिसंबर तक तैयार होने वाली सरसों की फसल से उन्हें कीमत भी अच्छी मिलेगी। क्योंकि खरीफ में इस साल तिलहन की बुआई में पिछले साल के मुकाबले 7 फीसदी की गिरावट है।
हरियाणा एवं पश्चिम उत्तर प्रदेश के कुछ भागों में किसानों में सरसों की बुआई भी शुरू कर दी है। सरसों मुख्य रूप से रबी की फसल होती है। हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बिहार, एवं दिल्ली के आसपास के इलाकों में बारिश की कमी से किसानों ने धान की रोपाई ही नहीं की। या फिर पानी पटाने का आर्थिक भार नहीं सहने के कारण 40 फीसदी तक धान की खेती को नष्ट कर दिया।
पिछले साल के मुकाबले धान की बुआई देश भर में 18 फीसदी से अधिक कम हुई है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के वैज्ञानिकों के मुताबिक ये किसान हाल-फिलहाल हुई बारिश से बनी नमी का फायदा उठाते हुए सरसों की बुआई कर सकते हैं।
वैज्ञानिकों ने अलग किस्म के सरसों बीज तैयार किए हैं, जिनकी फसल महज 110 दिनों में पक जाती हैं। इन्हें पूसा अग्रणी, पूसा जेके-6 एवं पूसा महक के नाम से जाना जाता है। इसकी खेती आसानी से खरीफ के मौसम में की जा सकती है। सिर्फ बालूयुक्त मिट्टी में इसकी खेती इस मौसम में नहीं हो सकती।
आईसीएआर के अधिकारी डॉ. जेपीएस डबास के मुताबिक सरसों की इस खेती के लिए दिसंबर मध्य तक सिर्फ दो बार पानी की जरूरत होगी। और 15 दिसंबर तक यह फसल पक जाएगी। ऐसे में किसान 15 जनवरी तक गेहूं की बुआई भी कर सकते हैं।
गेहूं की दो किस्मों की बीज पूसा डब्ल्यू आर 544 एवं पूसा गोल्ड की बुआई 15 जनवरी तक आसानी से की जा सकती है। इस प्रकार से सरसों की खेती करने वाले किसान आसानी से धान के नुकसान की भरपाई कर सकते हैं। किसानों के लिए राहत की बात यह है कि सरसों की बुआई में उनकी लागत प्रति एकड़ 100-150 रुपये तक आएगी और उपज प्रति हेक्टेयर 18-20 क्विंटल होगी।
वैज्ञानिकों का कहना है कि किसानों को सिर्फ संतुलित मात्रा में खाद डालने की जरूरत होगी। सल्फर एवं पोटाश खेतों को सूख से लड़ने की क्षमता देने के साथ सरसों में तेल की मात्रा को भी बढ़ाते है। इस साल 20 अगस्त तक कुल 152.47 लाख हेक्टेयर जमीन पर तिलहन की बुआई की गयी है।
जबकि पिछले साल की समान अवधि के दौरान 164।17 लाख हेक्टेयर जमीन पर तिलहन की बुआई हुई थी। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे में इस मौसम में सरसों उगाने वाले किसानों को कीमत भी अच्छी मिल जाएगी। (बीएस हिन्दी
लेवी चीनी नहीं दी तो होगी मिलों पर कार्रवाई
चीनी और गुड़ के लगातार बढ़ते दामों से परेशान उत्तर प्रदेश सरकार ने इन जिंसों पर भी स्टॉक सीमा तय करने की ठान ली है।
सूबे की मुख्यमंत्री मायावती ने लेवी चीनी देने में आनाकानी करने वाली चीनी मिलों पर कार्रवाई करने की चेतावनी दे दी है। राज्य सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को एक आदेश जारी कर कहा है कि जो भी चीनी मिलें लेवी की चीनी देने में आनाकानी करती हैं उन पर आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 37 के तहत कार्रवाई की जाए।
सरकार ने आदेश दिए हैं कि ऐसी चीनी मिलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और हो सके तो गिरफ्तारी भी की जाए। गौरतलब है कि लेवी चीनी जारी न होने से इस महीने और तमाम जिलों में बीपीएल और अंत्योदय राशन कार्ड धारकों को कोटे की चीनी नहीं मिल सकी थी। सरकार का मानना है कि अगर बीपीएल कोटे की चीनी बंट जाती है तो कम से कम 30 फीसदी संकट से निपटा जा सकता है।
इस समय उत्तर प्रदेश सरकार चीनी की बढ़ती कीमतों की हर सप्ताह समीक्षा कर रही है। बीते सप्ताह की समीक्षा बैठक में पाया गया था कि जमाखोरी से मुनाफा बढ़ रहा है। सरकार का मानना है कि खाद्य तेलों पर जिस तरह से स्टॉक सीमा लागू कर कीमतों पर काबू पाया गया था, वैसा चीनी के मामले में भी हो सकता है।
इस समय उत्तर प्रदेश में खुले बाजार में चीनी के दाम 34 रुपये प्रति किलो चल रहे हैं जबकि गुड़ लड्डू 40 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। (बीएस हिन्दी)
राजस्थान के 26 जिले सूखाग्रस्त घोषित किए गए
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बुधवार को सम्पन्न बैठक में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बताया कि गिरदावरी रिपोर्ट के आधार पर राज्य के 26 जिलों के 32,833 गांवों को सूखाग्रस्त पाया गया है। मानसून कमजोर रहने से इन गांवों की 424.64 लाख आबादी प्रभावित हुई है।
राज्य सरकार की ओर से सूखाग्रस्त घोषित जिलों में अजमेर, अलवर, बांसवाड़ा, बाड़मेर, भीलवाड़ा, बीकानेर, बूंदी, चित्तौड़गढ़, चूरू, दौसा, डूंगरपुर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, झुंझुनु, जोधपुर, नागौर, पाली, राजसमंद, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही, टोंक और उदयपुर शामिल है। (बिज़नस भास्कर)
दूसरे देशों की पैदावार पर निर्भर होंगे बासमती के दाम
खरीफ सीजन के दौरान बासमती धान के रकबे में बढ़ोतरी होने की संभावना है। लेकिन सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमईपी) घटाए जाने से इसका निर्यात बढ़ सकता है। ऐसे में बासमती चावल की नई फसल आने पर मूल्य दूसरे देशों की पैदावार के अनुरूप तय होगा। बीते एक सप्ताह के दौरान घरेलू बाजार में बासमती चावल की कीमतों में वृद्धि हुई है। राष्ट्रीय राजधानी की खारी बावली स्थित ग्रेन बाजार में बासमती चावल के दाम 7500-9000 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं। बीते एक सप्ताह के दौरान इनकी कीमतों में 200 रुपये प्रति क्विंटल तक का इजाफा हो चुका हैं।दिल्ली ग्रेन मर्चेट एसोसिएशन के सचिव और चावल कारोबारी सुरेंद्र कुमार गर्ग ने बिजनेस भास्कर को बताया कि बासमती धान के रकबे में बढ़ोतरी होने से आगामी सीजन में बासमती चावल के दाम कम रहने के आसार हैं। कीमतों में कितनी गिरावट आएगी, इस बारे में फिलहाल कुछ कहना जल्दबाजी होगा। दरअसल बासमती चावल के धान का दाम अधिक मिलने के कारण किसानों ने इस बार इसकी बुवाई अधिक की है। अगले सीजन में बासमती चावल के मूल्यों के बारे में दिल्ली व्यापार महासंघ के चैयरमेन ओमप्रकाश जैन का कहना है कि बासमती चावल के मूल्यों की दिशा काफी हद अन्य दूसरे उत्पादक देशों की फसल पर भी निर्भर करेगी। अगर दूसरे देशों में भी अच्छा उत्पादन हुआ तो इसके दाम पिछले साल नई सप्लाई के समय के भाव 6000-6500 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर से भी नीचे जा सकते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार धान के कुल रकबे में पिछले साल के मुकाबले करीब 60 लाख हैक्टेयर की कमी आई हैं। ताजा बुवाई आंकड़ों के अनुसार 20 अगस्त तक 271।83 लाख हैक्टेयर में धान की बुवाई हो चुकी है। पिछली समान अवधि में यह आंकड़ा 341.44 लाख हैक्टेयर था। गर्ग का कहना है कि धान के कुल रकबे में गिरावट आई है लेकिन बासमती धान की बुवाई में इजाफा हुआ है।उधर सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय बासमती चावल के महंगा होने के निर्यात को मिल रही कड़ी टक्कर को देखते हुए एमईपी में 300 डॉलर प्रति टन की कटौती करके इसे 800 डॉलर प्रति टन कर दिया है। इससे बासमती चावल का निर्यात अधिक होने की संभावना है। ओमप्रकाश जैन के अनुसार सरकार द्वारा एमईपी घटाने से अगले सीजन में भारतीय बासमती चावल के निर्यात में और इजाफा होने की उम्मीद है। सरकारी आंकड़ा़े के अनुसार वित्त वर्ष 2008-09 के दौरान 15 लाख टन बासमती चावल का निर्यात हुआ था। जानकारों के अनुसार अगले सीजन में इसके 18-20 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है। गौरतलब है कि बीते महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय बासमती चावल के महंगा होने से इसकी निर्यात मांग में कमी आई थी। दरअसल पाकिस्तान का बासमती चावल सस्ता होने के कारण घरेलू बासमती चावल के बाजार को हथिया लिया था। (बिज़नस भास्कर)
India monsoon 5 pct below normal in Aug 26 wk
Thursday, August 27, 2009
India sugar end losing streak on festival demand, stocks
India Aug 1-Aug 26 monsoon deficit 25 pct-sources
India wheat steady; minister says imports possible
- The Central Pool stock are maintained by FCI and State Govts. and their agencies.
The total stock in Central Pool as on 31/07/2009 is 501.27(Figs. in Lakh MT)
Stock in Central pool as on 31/07/2009
Foodgrains
With FCI
With State Govt. / Agencies
Grand Total
Rice* 138.95 43.57 185.52 Wheat 101.28 212.78 314.06 Total 240.23 256.35 496.58 * Unmilled Paddy with FCI & State agencies also shown in terms of Rice
Stocks of Foodgrains & sugar in Cenral Pool as on 31.07.2009 (Figs. in Lakh MT)
In Storage In Transit Total Rice 182.52 2.52 185.04 Wheat 314.06 2.17 316.23 Wheat at Port 0.00 0.00 0.00 Total 496.58 4.69 501.27 Coarse Grains Sugar 5.79 0.01 5.80 0.17 0.10 0.27 Grand Total 502.54 4.80 507.34
| 16:7 IST | |
There is further progress in kharif sowing as per data received from States. While area under pulses is more than that of last year, acreage of paddy is down. Acreage of coarse cereals is marginally lower. The cropped areas this year and last year for major kharif crops as on 20th August are as follows:
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Wednesday, August 26, 2009
चीनी की उपभोक्ता कंपनियों पर भी स्टॉक लिमिट लागू
खुले बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी उपभोक्ता कंपनियों पर भी स्टॉक लिमिट लगा दी है। केंद्र सरकार द्वारा 22 अगस्त को जारी किए गए आदेश के मुताबिक जो कंपनियां हर माह 10 क्विंटल से ज्यादा चीनी की खपत करती हैं, वे 15 दिन से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकेंगी। बड़ी कंपनियों पर अगले छह महीने के लिए स्टॉक लिमिट लगाई गई है तथा आदेश जारी होने के 21 दिन बाद लिमिट लागू हो जाएगी। हालांकि केंद्र सरकार, राज्य सरकार और केंद्र शासित प्रदेशों से मान्यता प्राप्त चैरिटेबल ट्रस्ट, हॉस्पीटल और होस्टल को लिमिट के दायरे से बाहर ही रखा गया है। बहुराष्ट्रीय कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि इससे चीनी की कीमतों पर आंशिक फर्क पड़ सकता है क्योंकि स्टॉक लिमिट लगा देने से कंपनियों की खरीद पहले की तुलना में घट जाएगी। चीनी के थोक और फुटकर व्यापारी पर क्रमश: 2000 क्विंटल और 200 क्विंटल की लिमिट पहले लगी हुई है। लेकिन कुल उत्पादन का लगभग 60 फीसदी हिस्सा खपत करने वाली बड़ी कंपनियों और हलवाइयों पर अभी तक कोई लिमिट नहीं लगाई गई थी। जिसकी वजह से सरकारी कोशिशों के बाद भी फुटकर बाजार में चीनी की कीमतों में अपेक्षित गिरावट नहीं आ पा रही थी। सूर्या फूड एंड एग्रो लिमिटेड के डायरेक्टर शेखर अग्रवाल ने बताया कि ऊंचे दाम होने की वजह से कंपनियां चीनी का केवल सात-आठ दिन का स्टॉक रख पा रही है इसलिए सरकार के इस कदम से कीमतों पर फर्क पड़ने की संभावना नहीं है।सरकारी बंदिशों के बावजूद फुटकर और थोक बाजार में चीनी के दाम तेज बने हुए है। सोमवार को दिल्ली थोक बाजार में चीनी के दाम बढ़कर 3000 रुपये और एक्स-फैक्ट्री भाव बढ़कर 2900 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। फुटकर बाजार में इस समय चीनी के भाव 32 रुपये प्रति किलो से ऊपर चल रहे हैं। चालू पेराई सीजन में देश में चीनी का उत्पादन 150 लाख टन से भी कम होने की संभावना है। जबकि पिछले साल 264 लाख टन का उत्पादन हुआ था। उत्पादन में कमी के कारण ही इस समय शुल्क मुक्त चीनी का आयात किया जा रहा है। उद्योग सूत्रों के अनुसार अभी तक प्राइवेट कंपनियों द्वारा करीब 40 लाख टन रॉ-शुगर (गैर-रिफाइंड चीनी) के आयात सौदे किये जा चुके हैं। लेकिन भारत और अन्य देशों की मांग के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी के दामों में भारी तेजी बनी हुई है। आयातित चीनी के दाम भारतीय बंदरगाह पर पहुंच 610 डॉलर और रॉ-शुगर के दाम 525 डॉलर प्रति टन हो गए हैं। मौजूदा भावों में चीनी का आयात भी मिलों को घाटे का सौदा साबित हो रहा है। (Business Bhaskar....R S Rana)
देश सूखे से निपटने में सक्षमः मुखर्जी
नई दिल्ली। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने मंगलवार को कहा कि देश के बड़े हिस्से में खराब मानसून के कारण पड़े सूखे के प्रभाव को सीमित करना सरकार की पहली प्राथमिकता है। उन्होंने आश्वस्त किया कि देश के पास खाद्यान का पर्याप्त भंडार है और ऐसे हालात में भी भारतीय अर्थव्यवस्था छह प्रतिशत से ऊपर की विकास दर हासिल करेगी। शीर्ष उद्योगपतियों की एक बैठक में मुखर्जी ने कहा,"इस समय देर से आए मानसून ने देश के अधिकांश क्षेत्रों में कृषि अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। कमजोर मानसून के प्रभाव को सीमित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।"वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष (जुलाई 2008-जून 2009) खाद्यान्न के रिकार्ड 23.387 करोड़ टन उत्पादन की सहायता से इस वर्ष सूखे के मुकाबले के लिए देश के पास पर्याप्त अनाज भंडार है। सामान्य तौर पर गेहूं के 40 लाख टन और चावल के 52 लाख टन सुरक्षित भंडार के साथ ही देश ने 30 लाख टन गेहूं और 20 लाख टन चावल का अतिरिक्त भंडारण किया है।मुखर्जी ने देश की संपूर्ण अर्थव्यवस्था के बारे में कहा कि वैश्विक मंदी के बावजूद पिछले वित्तीय वर्ष में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 6.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई और कठिन स्थिति के बावजूद इस वर्ष छह प्रतिशत से ऊपर की विकास दर कायम रखी जाएगी।अपने आशावाद के कारणों को बताते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र के रफ्तार पकड़ने के संकेत दिखाई देने लगे हैं। पूंजीगत वस्तुओं की मांग में वृद्धि हो रही है। टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं की मांग में पहली तिमाही में बेहतर वृद्धि देखी गई है।उन्होंने कहा कि सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक कर्ज प्रवाह को बिना अवरोध के जारी रखने के लिए निरंतर एक-दूसरे के संपर्क में हैं।मुखर्जी ने कहा कि सरकार वित्तीय स्थिति को सही दिशा में लाने पर जोर दे रही है और वैश्विक वित्तीय संकट के प्रभाव को कम करने के लिए आवश्यकतानुसार प्रोत्साहन पैकेज दे सकती है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के लिए वित्तीय सु़धारों की योजना तैयार होगी। 13वें वित्त आयोग की शीघ्र आने वाली रिपोर्ट में यह शामिल होगी।
स्टॉक लिमिट तय होने से महंगे होंगे चीनी के प्रॉडक्ट्स
नई दिल्ली : केंद्र सरकार के चीनी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने वाली इकाइयों के लिए स्टॉक लिमिट तय करने के फैसले का असर बिस्कुट और मिठाई बनाने वाली इकाइयों पर पड़ना तय है। कारोबारी बता रहे हैं कि स्टॉक लिमिट तय करने से उन्हें लेबर, ट्रांसपोर्टेशन वगैरह पर पहले से ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। कारोबारियों के मुताबिक चीनी पर स्टॉक लिमिट लगाने की वजह से लागत में 5-7 फीसदी का असर पड़ेगा। इस वजह से बिस्कुट और दूसरे उत्पादों की कीमतों में आने वाले वक्त में और इजाफा हो सकता है। दिल्ली हलवाई एंड बेकर्स, रेस्टोरेंट एसोसिएशन के प्रेसिडेंट ईश्वर दयाल के मुताबिक, 'निश्चित तौर पर सरकार के फैसले का कारोबार पर फर्क पड़ेगा।
दिल्ली में अमूल बढ़ा सकता है दूध के दाम
उन्होंने बताया कि देश में मानसून में हुई देर और डेयरी की खरीद लागत बढ़ने के कारण दूध के दाम बढ़ने जरूरी हो गए हैं। पिछले कुछ महीनों में जानवरों का दाना-पानी महंगा होने से दूध उत्पादन की लागत में 15-20 फीसदी की उछाल आई है। पिछले हफ्ते डेयरी सेक्टर के दिग्गज खिलाड़ी नेशनल डेयरी डेवलपमेंट की सहायक इकाई मदर डेयरी ने चुनिंदा श्रेणियों में दूध की कीमतों में इजाफा किया है। मदर डेयरी दिल्ली के बाजार में रोजाना 25 लाख लीटर दूध बेचती है। मदर डेयरी ने पिछले हफ्ते डबल टोंड दूध की कीमतों में 1 रुपए का इजाफा किया था और अब इसकी कीमत 19 रुपए प्रति लीटर हो गई है। वहीं टोंड एंड बल्क वेंडेड मिल्क की कीमत बढ़कर 20 रुपए प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गई है जबकि स्किम्ड मिल्क के दाम 16 रुपए से बढ़कर 17 रुपए प्रति लीटर हो गए हैं। मदर डेयरी अपनी वेंडिंग मशीन के जरिए रोजाना 11 लाख लीटर दूध बेचती है। (इत हिन्दी