Thursday, August 13, 2009

सूखे से बिगड़े हालात

खरीफ फसलों की बुवाई का समय लगभग समाप्त हो चुका है। कृषि मंत्रालय द्वारा 10 अगस्त को जारी बुवाई आंकड़ों के मुताबिक धान की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में 57.75, तिलहन की 5.37 और गन्ने की 1.29 लाख हैक्टेयर कम रही है। जबकि मोटे अनाज की 8.71, कपास की 13.45 और दलहन की 9.17 लाख हैक्टेयर ज्यादा रही है। जहां बुवाई हो चुकी है, वहां भी मानसून की बेरुखी से फसलों की स्थिति खराब है। ऐसे में धान के उत्पादन में 25-30 फीसदी और दलहन, तिलहन तथा मोटे अनाजों के उत्पादन में 15-20 फीसदी तक गिरावट आने की आशंका है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार इस साल मानसून की बारिश 87 फीसदी ही रहने का अनुमान है।

खरीफ फसलों का उत्पादन अनुमानपिछले साल खरीफ में चावल का उत्पादन 845 लाख टन रहा था। लेकिन इस साल क्षेत्रफल में गिरावट और कम बारिश से उत्पादकता पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव से चालू सीजन में चावल का उत्पादन घटकर लगभग 600 लाख टन रह सकता है। बुवाई के बाद से बारिश न होने के कारण दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों का प्रति हैक्टेयर उत्पादन भी पिछले साल के मुकाबले 15-20 फीसदी घटने की आशंका है जबकि दलहन और मोटे अनाज का बुवाई क्षेत्रफल बढ़ा है। देश में वर्ष 2008-09 के खरीफ सीजन में मोटे अनाजों (मक्का, ज्वार और बाजरा) का 283 लाख टन उत्पादन हुआ था। लेकिन प्रतिकूल मौसम से नए सीजन में मोटे अनाजों का उत्पादन घटकर 227 लाख टन रहने की आशंका है।
दालों का उत्पादन पिछले खरीफ सीजन में 47.8 लाख टन का हुआ था। जबकि चालू खरीफ सीजन में दलहन का उत्पादन घटकर 38.3 लाख टन रहने की संभावना है। इसी तरह से तिलहनों का उत्पादन भी खरीफ सीजन में घटकर 1,752 लाख टन रहने की आशंका है। पिछले साल खरीफ में तिलहनों का 1,788 लाख टन उत्पादन हुआ था।
केंद्रीय पूल में खाद्यान्न भंडारसरकार के पास केंद्रीय पूल में 196 लाख टन चावल और 329 लाख टन गेहूं तथा 64.5 लाख टन मोटे अनाज का भंडार मौजूद है। खाद्य मंत्रालय के अनुसार सार्वजनिक वितरण प्रणाली और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए हर माह करीब 32 से 36 लाख टन खाद्यान्न की आवश्यकता होती है। वर्ष 2008-09 में देश की खाद्यान्न की खपत 2190.1 टन आंकी गई है।

No comments:

Post a Comment