देश के अधिकांश हिस्सों में किसानों पर जिस तरह से सूखे की मार पड़ी है उसके चलते आने वाले दिनों में खाद्यान्न संकट और कीमतों में बढ़ोतरी को टाला जाना मुश्किल लग रहा है। चालू खरीफ सीजन के दौरान धान के पैदावारी क्षेत्रफल में आई भारी गिरावट और कम बारिश के कारण उत्पादकता प्रभावित होने के चलते कई राज्य खाद्यान्न संकट का सामना करने पर विवश हो सकते हैं। इस वजह से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।
धान के पैदावारी क्षेत्रफल में आई गिरावट के चलते उत्तर प्रदेश में चावल की कमी 54 लाख टन तक रहने की संभावना है, जबकि बिहार के मामले में यह कमी 21 लाख टन होगी। इसी तरह झारखंड को भी 6.5 लाख टन और पश्चिम बंगाल को करीब 22 लाख टन चावल की भारी कमी का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, आंध्र प्रदेश के मामले में यह कमी सात लाख टन रह सकती है। इसका नतीजा यह होगा कि खरीफ सीजन के बाद केंद्रीय पूल से खाद्यान्न की मांग का सबसे अधिक दबाव उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश से आएगा। वहीं, गैर सरकारी कारोबार को भी इन राज्यों में उत्पादन की यह गिरावट प्रभावित करेगी। नतीजतन देश भर में कीमतों में तेजी का दौर शुरू होगा।
खाद्यान्न संकट और दूसरे खाद्य उत्पादों में तेजी की आशंका प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और कृषि एवं खाद्य मंत्री शरद पवार तीनों जता चुके हैं। उत्पादन में कमी का यह दौर केंद्रीय पूल में चावल की सरकारी खरीद में गिरावट के रूप में भी सामने आएगा जिसके चलते सरकार को आयात का सहारा लेना पड़ सकता है। इस हालात का जहां किसानों की आय पर असर पड़ रहा है, वहीं सरकार भी परेशान दिखने लगी है। इन सभी मुद्दों को ध्यान में रखते हुए ही 17 अगस्त को प्रधानमंत्री ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई है। इस बैठक में खाद्यान्न संकट से निपटने की रणनीति तय की जाएगी।
खाद्यान्न संकट और दूसरे खाद्य उत्पादों में तेजी की आशंका प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और कृषि एवं खाद्य मंत्री शरद पवार तीनों जता चुके हैं। उत्पादन में कमी का यह दौर केंद्रीय पूल में चावल की सरकारी खरीद में गिरावट के रूप में भी सामने आएगा जिसके चलते सरकार को आयात का सहारा लेना पड़ सकता है। इस हालात का जहां किसानों की आय पर असर पड़ रहा है, वहीं सरकार भी परेशान दिखने लगी है। इन सभी मुद्दों को ध्यान में रखते हुए ही 17 अगस्त को प्रधानमंत्री ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई है। इस बैठक में खाद्यान्न संकट से निपटने की रणनीति तय की जाएगी।
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