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Monday, November 30, 2009
Refined Soy Oil gets fresh fundamentals
Soybean prices get Dubai impact
Mustard Seed demand to rise near term
Rabi sowing raises hope of partly making up kharif loss
Rabi sowing has got off to a good start, thanks to ample moisture left in the soil by rain in September, due to delayed withdrawal of the monsoon.
Wheat has already been planted on 700,000 hectares of additional area than in the corresponding period last year. Pulses have also covered more acreage till now, though the sowing of coarse cereals and oilseeds is lagging marginally behind the last season’s corresponding position.
The monsoon began withdrawing from western Rajasthan only on September 25, against the normal date of September 1. It receded from the whole of the key north-western rabi belt only on September 28, instead of the scheduled September 15.
| ON THE GROUND Area sown under rabi crops till November 26 (million hectares) | ||
| Crop | This Year | Last Year |
| Wheat | 13.70 | 13.03 |
| Rice | 0.22 | 0.11 |
| Total coarse cereals | 5.04 | 5.45 |
| Total oilseeds | 7.58 | 7.65 |
| Total pulses | 9.41 | 9.19 |
| Source: agriculture ministry | ||
Brisk crop planting in the early part of the rabi sowing season has raised hopes of making up part of the losses in kharif production due to deficient monsoon rainfall in a large part of the country. Timely sowing of rabi crops, particularly wheat, is deemed important, as this enables the crops to escape the damage caused by the climate change-induced early rise of temperature towards February-end and March, farm experts maintain.
The government has aimed to produce an additional eight million tonnes of foodgrains in the current rabi season, to partly offset the anticipated loss of 15 million tonnes (mt) in the kharif rice output. The acreage under wheat is proposed to be increased by 0.5 million hectares (mha). Along with efforts to boost productivity, this is expected to result in two mt extra production, according to agriculture ministry sources.
About one mt additional rice is planned to be produced by expanding the acreage under the ‘Boro paddy’ (early rabi crop) in states like West Bengal, Orissa, Andhra Pradesh, Tamil Nadu, Bihar and eastern Uttar Pradesh.
Reports from states indicate the crop sowing conditions are generally favourable because of the good moisture status of the soils. All of north and central India had received copious rainfall in the extended period of the last monsoon season.
According to the latest information from the states to the Union agriculture ministry, wheat had been sown till November 26 on over 13.7 mha, against 13 mha planted under this crop till this date last year.
Similarly, pulses have been sown on 9.41 mha, against 9.19 mha last season. Both gram and lentil, the major rabi pulses, have been planted on larger acreage. The sowing of other rabi pulses, notably urad and moong, marginally lags that in the previous season.
However, oilseeds have been planted over 7.58 mha, a little under 100,000 hectares short of the 7.65 mha sown till this date in the last rabi season. The shortfall is mainly in the case of minor oilseeds like sunflower and rabi groundnut.
However, rapeseed-mustard, the main rabi oilseed crop, accounting for the bulk of the oilseed production in this season, has been planted on more ground – nearly 6.01 mha, against 5.84 mha last year.
Among the coarse cereals, the major shortfall in sowing till now has been in the case of jowar. The other crops, notably maize and sorghum, in demand by the poultry, starch and brewing industries, have been planted on larger acreage.
Soybean Meal Exports From India to Miss Target, Processors Say
Thursday, November 26, 2009
विदेश में बेहतर पैदावार से भी नहीं थमी सोयाबीन की तेजी
अमेरिका, ब्राजील और अर्जेटीना में सोयाबीन की बेहतर पैदावार की संभावना है लेकिन भारत में सोयाबीन का उत्पादन गिरने का अनुमान है। ऐसे में सोयाबीन महंगी हो रही है लेकिन सोयामील की निर्यात मांग कमजोर है जबकि सोया रिफाइंड तेल में भी उठान सीमित है। पिछले तीन महीनों में सोयाबीन की कीमतों में 300 रुपये की तेजी आकर प्लांट डिलीवरी भाव 2500- 2525 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। चालू तेल वर्ष में भारत में खाद्य तेलों का 86.68 लाख टन का रिकार्ड आयात हो चुका है जबकि चालू वित्त वर्ष में सोया खली का निर्यात करीब 51 फीसदी घटा है। अमेरिका में सोयाबीन का उत्पादन बढ़कर 880 लाख टन होने की संभावना है तथा इंडोनेशिया में पाम तेल का स्टॉक 14 फीसदी ज्यादा है।सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में सोया खली के निर्यात में 51 फीसदी की कमी आकर कुल निर्यात 8.49 लाख टन का ही हुआ है। साई सिमरन फूड लिमिटेड के डायरेक्टर नरेश गोयनका ने बताया कि सोयाबीन में फंडामेंटल मजबूत नहीं है लेकिन स्टॉकिस्टों की सक्रियता से भाव बढ़ रहे हैं। सोयाबीन का उत्पादन गिरने का अनुमान है। देश में खाद्य तेलों का रिकार्ड आयात हो चुका है तथा ब्याह-शादियों का सीजन होने के बावजूद खाद्य तेलों में मांग सीमित है। खाद्य तेलों के कुल आयात का करीब 30 से 35 स्टॉक बाजार में उपलब्ध है। उधर अमेरिकी कृषि विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में सोयाबीन का उत्पादन बढ़कर 880 लाख टन होने की संभावना है। वहां करीब 90 प्रतिशत फसल की कटाई हो चुकी है। ब्राजील में 50 फीसदी और अर्ज्ेटीना में 41 फीसदी बुवाई का कार्य हो चुका है। ब्राजील और अर्जेटीना में मौसम अनुकूल है इसलिए बुवाई सोयाबीन की बुवाई बढ़ने की संभावना है।इंडोनेशिया में पाम तेल का स्टॉक 14 फीसदी ज्यादा है। सोयाबीन व्यापारी हेमंत जैन ने बताया कि मंडियों में सोयाबीन की आवक कम होने से भाव में तेजी आ रही है। इस समय मंडियों में सोयाबीन के भाव 2300- 2350 रुपये और प्लांट डिलीवरी 2500-2525 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं। सोया रिफाइंड तेल की कीमतों में भी पिछले तीन महीने में 50 रुपये की तेजी आकर भाव 500 रुपये प्रति 10 किलो हो गये। सोया खली की कीमत बढ़कर 20,800 से 21,000 रुपये प्रति टन हो गई। लेकिन इन भाव में निर्यातकों की मांग पहले की तुलना में घट गई है। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी अग्रिम अनुमान के मुताबिक सोयाबीन का उत्पादन 89.3 लाख टन होने की संभावना है जोकि पिछले साल के 99 लाख टन के मुकाबले कम है।
गुजरात में कपास की आवक बढ़ी पर उत्तरी राज्यों में गिरी
घरेलू बाजारों में एक अक्टूबर से शुरू हुए चालू फसली वर्ष में 21 नवंबर तक 48।1 लाख गांठ (प्रति गांठ 170 किलो) कॉटन की आवक रही है। कॉटन कॉरपोरेशनऑफ इंडिया (सीसीआई) के मंगलवार को जारी आंकड़ों में कहा गया है कि इस दौरान आवक में गत वर्ष के मुकाबले 0.4 फीसदी की मामूली बढ़ोतरी रही है। 21 नवंबर को समाप्त सप्ताह में कॉटन की दैनिक आवक 1,45,000 गांठ रही जबकि पिछले सप्ताह दैनिक आवक 1,30,000 गांठ रही थी। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कॉटन उत्पादक है। देश के सबसे बड़े कॉटन उत्पादक राज्य गुजरात में आवक गत वर्ष के मुकाबले 65 फीसदी बढ़कर 18 लाख गांठ रही है। वहीं, महाराष्ट में आवक 19.5 फीसदी घटकर 6 लाख गांठ रही। हालांकि उत्तरी राज्यों में आवक 10 फीसदी घटकर 13.1 लाख गांठ रही, जबकि दक्षिणी राज्यों में आवक 26.6 फीसदी घटकर 6,90,000 गांठ रही। कॉटन कॉरपोरेशन की किसानों से कॉटन खरीद एक अक्टूबर से 19 नवंबर तक गत वर्ष के मुकाबले 77 फीसदी घटकर 2,20,00 गांठ रही। कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि घरेलू बाजार में ऊंची कीमतों के कारण सरकारी खरीद में भारी गिरावट आई है। देश के सबसे बड़े खरीदार कॉटन कॉरपोरेशन ने वर्ष 2008-09 के दौरान 89 लाख गांठ कॉटन की खरीद की थी। सरकार द्वारा नियुक्त कॉटन एडवाइजरी बोर्ड ने इस महीने के शुरू में वर्ष 2009-10 के लिए कॉटन उत्पादन के अनुमान में कटौती कर इसे 295 लाख गांठ कर दिया था। इससे पहले 305 लाख गांठ उत्पादन का अनुमान लगाया गया था। फसली वर्ष 2008-09 में भारत में 290 लाख गांठ कॉटन का उत्पादन हुआ था।
Wednesday, November 25, 2009
आयातित खाद्य पदार्थों की अब होगी ऑनलाइन पड़ताल
विदेश में बेहतर पैदावार से भी नहीं थमी सोयाबीन की तेजी
Cheap edible oil imports hit local oilseed crushing
Refined Soy Oil scenario of the day
Monday, November 23, 2009
Co-operative dairies seek restraint on oil-meal exports
Vegetable oil imports unlikely to breach last year’s level
Ref Soy Oil prices will make a steady impact
यूपी की चीनी मिलों पर बढ़ा दबाव
उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों पर गन्ने के ज्यादा दाम चुकाने का दबाव बढ़ने लगा है। इस सिलसिले में राज्य सरकार ने प्रदेश के डिवीजनल कमिश्नरों को पहल करने का निर्देश दिया है। इन कमिश्नरों से गन्ना विकास समितियों, गन्ना किसान प्रतिनिधियों और चीनी मिलों के बीच जारी गतिरोध खत्म करवाने को कहा गया है, ताकि किसानों को राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) से ऊंची कीमत मिल सके। इसके अलावा किसानों के आक्रोश को देखते हुए राज्य सरकार ने केंद्र से फिलहाल प्रदेश में कच्ची चीनी न भेजने की भी अपील की है।
शशांक शेखर ने कहा, उत्तर प्रदेश शुगर मिल एसोसिएशन किसानों को एसएपी से ज्यादा कीमत देने पर सहमत है, लेकिन गन्ना किसान अब भी मिलों को संभवतया गन्ना बेचने के लिए तैयार नहीं है। इसलिए डिवीजनल कमिश्नरों को इस दिशा में पहल करने का निर्देश दिया गया ताकि राज्य में गन्ने की पेराई जल्द से जल्द शुरू हो सके। उन्होंने दावा किया कि राज्य में अभी तक 14 मिलों ने पेराई का काम शुरू किया है। राज्य के किसान प्रदेश की चीनी मिलों द्वारा आयातित कच्ची चीनी की रिफाइनिंग का भी विरोध कर रहे हैं। इसे देखते हुए राज्य ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह फिलहाल प्रदेश में कच्ची चीनी न भेजे। गौरतलब है कि कृषि मंत्री पवार ने राज्य सरकार को एक पत्र लिखकर कच्ची चीनी का आयात शुरू करने का अनुरोध किया था। इसका विरोध करते हुए कैबिनेट सचिव ने कहा कि इससे किसान फिर आंदोलित हो सकते हैं।
इस बीच, सोमवार को केंद्र सरकार संसद में एफआरपी अध्यादेश में संशोधन के लिए नया बिल लाने वाली है। शुक्रवार को सरकार ने कहा था कि राज्य सरकारें एफआरपी (129।84 रुपये क्विंटल) से अधिक एसएपी तय कर सकेंगी और उनको इन दोनों के अंतर का भुगतान नहीं करना होगा। एफआरपी और एसएपी के अंतर का बोझ राज्यों पर डालने के लिए गन्ना नियंत्रण आदेश, 1966 में गन्ना नियंत्रण आदेश, 2009 के जरिए 22 अक्टूबर को जोड़े गए खंड 3(ख) को हटा दिया जाएगा।
सोना 18 हजारी की ओर अग्रसर
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेजी के रुख के बीच आभूषण निर्माताओं की लगातार लिवाली के चलते दिल्ली सर्राफा बाजार में लगातार छठे दिन भी तेजी जारी रही और सोने के भाव 17600 रुपये प्रति दस ग्राम की रिकॉर्ड ऊंचाई तक जा पहुंचे।इसी तरह चांदी के भाव भी 70 रुपये चढ़कर 28750 रुपये प्रति किलो बंद हुए। मौजूदा शादी-विवाह मौसम के मद्देनजर आभूषण निर्माताओं की भारी लिवाली के चलते सोने की कीमतों में तेजी को बल मिला। पिछले पांच सत्रों में 500 रुपये चढ़ने वाले सोने की कीमत शनिवार को 100 रुपये और चढ़कर 17600 रुपये प्रति दस ग्राम तक पहुंच गई।उल्लेखनीय है कि जब से रिजर्व बैंक ने अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष से 200 टन सोना खरीदा है सोने में मजबूती का रुख बना हुआ है। रिजर्व बैंक की इस पहल के बाद अन्य केन्द्रीय बैंकों द्वारा भी सोने की खरीद किए जाने की संभावना है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव 1154 डॉलर प्रति औंस की रिकॉर्ड ऊंचाई को छू गए।स्थानीय बाजार में सोना स्टैंडर्ड और आभूषण के भाव 100-100 रुपये की तेजी के साथ क्रमश: 17600 रुपये और 17450 रुपये प्रति दस ग्राम की नई ऊंचाई पर बंद हुए। गिन्नी के भाव पूर्वस्तर 13550 रुपये प्रति आठ ग्राम अपरिवर्तित बंद हुए।चांदी तैयार के भाव 70 रुपये की तेजी के साथ 28750 रुपये किलो बंद हुए जबकि चांदी साप्ताहिक डिलीवरी के भाव पूर्वस्तर 28400 रुपये किलो अपरिवर्तित बंद हुए। चांदी सिक्का में भी 34200।34300 रुपये प्रति सैकड़ा पर कोई घट-बढ़ नहीं हुई।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेजी के रुख के बीच आभूषण निर्माताओं की लगातार लिवाली के चलते दिल्ली सर्राफा बाजार में लगातार छठे दिन भी तेजी जारी रही और सोने के भाव 17600 रुपये प्रति दस ग्राम की रिकॉर्ड ऊंचाई तक जा पहुंचे।इसी तरह चांदी के भाव भी 70 रुपये चढ़कर 28750 रुपये प्रति किलो बंद हुए। मौजूदा शादी-विवाह मौसम के मद्देनजर आभूषण निर्माताओं की भारी लिवाली के चलते सोने की कीमतों में तेजी को बल मिला। पिछले पांच सत्रों में 500 रुपये चढ़ने वाले सोने की कीमत शनिवार को 100 रुपये और चढ़कर 17600 रुपये प्रति दस ग्राम तक पहुंच गई।उल्लेखनीय है कि जब से रिजर्व बैंक ने अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष से 200 टन सोना खरीदा है सोने में मजबूती का रुख बना हुआ है। रिजर्व बैंक की इस पहल के बाद अन्य केन्द्रीय बैंकों द्वारा भी सोने की खरीद किए जाने की संभावना है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव 1154 डॉलर प्रति औंस की रिकॉर्ड ऊंचाई को छू गए।स्थानीय बाजार में सोना स्टैंडर्ड और आभूषण के भाव 100-100 रुपये की तेजी के साथ क्रमश: 17600 रुपये और 17450 रुपये प्रति दस ग्राम की नई ऊंचाई पर बंद हुए। गिन्नी के भाव पूर्वस्तर 13550 रुपये प्रति आठ ग्राम अपरिवर्तित बंद हुए।चांदी तैयार के भाव 70 रुपये की तेजी के साथ 28750 रुपये किलो बंद हुए जबकि चांदी साप्ताहिक डिलीवरी के भाव पूर्वस्तर 28400 रुपये किलो अपरिवर्तित बंद हुए। चांदी सिक्का में भी 34200।34300 रुपये प्रति सैकड़ा पर कोई घट-बढ़ नहीं हुई।
दूध की सप्लाई सुधरी, घी हुआ सस्ता
सोना फिर नई ऊंचाई पर, चांदी 29 हजार के पार
कीमतों पर देखने को मिला। चांदी में भी शनिवार को तेजी रही और यह 29 हजार के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई। पिछले 5 कारोबारी सत्रों में चांदी 28,000 रुपये प्रति किलो से पहुंचकर 29,000 पर पहुंच गई। स्टैंडर्ड गोल्ड (99.5 प्यूरिटी)में शनिवार को 160 रुपये की मजबूती दर्ज की गई और यह 17,455 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। शुद्ध सोने (99.9 प्यूरिटी) में भी तकरीबन इतनी ही बढ़त रही और यह 17,540 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। चांदी हाजिर (.999 फिटनेस) में 335 रुपये की तेजी रही और यह 29,190 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई । शुक्रवार को चांदी 28,855 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार न्यूयॉर्क में शुक्रवार को गोल्ड फ्यूचर्स लगातार छठे दिन रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यहां सोने के दिसंबर वायदे में 4.90 डॉलर की तेजी रही और यह 1146.80 आउंस पर बंद हुआ। हालांकि दिसंबर चांदी हल्की गिरावट के साथ 18.44 डॉलर प्रति आउंस पर बंद हुई।
Friday, November 20, 2009
Refined Soy Oil overseas market still firm
Despite Soybean season, arrivals too low
Thursday, November 19, 2009
India soybean hits contract highs on thin arrivals
Soybean CBOT bullish, adds momentum
Mustard Seed goes the high edible way
Refined Soy Oil bullish, trend to continue
खाद्य तेलों के लिए भारत की आयात पर निर्भरता अब 50त्न
Tuesday, November 17, 2009
'चीनी की बढ़ती कीमतों पर सरकार गंभीर'
चीनी के सबसे बड़े उपभोक्ता भारत में सरकार चीनी की कीमतों को लेकर गंभीर है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, घरेलू बाजार में चीनी की खुदरा कीमतें 90 फीसदी बढ़कर 38 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं, जो बीते साल अक्टूबर में 20 रुपये थी। 2008-09 के चीनी सीजन (अक्टूबर से सितंबर) में देश का चीनी उत्पादन घटकर 1.5 करोड़ टन पर आ गया जो इससे पिछले साल 2.64 करोड़ टन था।
सरकार ने कच्ची और सफेद चीनी के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति सहित चीनी के वायदा कारोबार में प्रतिबंध जैसे कई उपाय किए हैं। गन्ने की खेती करने वाले प्रमुख देश ब्राजील में गन्ने की पैदावार घटने के अनुमान से विश्वभर में चीनी की कीमतों में तेजी का रुख बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय चीनी संगठन के मुताबिक, 2008-09 सीजन में चीनी का वैश्विक उत्पादन 7.1 फीसदी तक घटकर 15.53 करोड़ टन पर आने का अनुमान है।
गेहूं आयात की योजना अभी नहीं
देश में गेहूं आयात की तत्काल कोई योजना नहीं है। केंद्रीय कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर ने कहा, 'गेहूं का पर्याप्त स्टॉक है। इसके आयात की कोई योजना नहीं है।' इस साल खरीफ के दौरान सूखे का व्यापक असर रहा है, जिसकी वजह से खरीफ की फसलें प्रभावित हुई हैं।
हालांकि रबी के मौसम में फसलों का उत्पादन बढ़िया रहने का अनुमान है। बावजूद इसके, हाजिर और वायदा बाजार में गेहूं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। कीमतें बढ़ने के कारण यह कयास लगाया जा रहा था कि फौरी तौर पर सरकार गेहूं का आयात कर सकती है।
अक्टूबर में खाद्य तेल आयात में 19 प्रतिशत की गिरावट
वनस्पति तेलों के आयात में वृद्धि घटते-घटते अक्टूबर में नकारात्मक हो गई है। इसकी वजह स्थानीय मिलों में पेराई का शुरू हो जाना है।
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) के आंकड़ों के मुताबिक, बीते तेल वर्ष (नवंबर से अक्टूबर) की पहली तिमाही में खाद्य तेल का आयात उछलकर 76 फीसदी तक चला गया। लेकिन अंतिम तिमाही आते-आते यह गिरकर महज 5 फीसदी रह गया।
तेल वर्ष 2008-09 के अंतिम महीने यानी अक्टूबर में इसका आयात इसके साल भर पहले की समान अवधि के 626,848 टन की तुलना में 19 फीसदी घटकर 667,276 टन रह गया। हालांकि तेल वर्ष 2008-09 के दौरान वनस्पति तेल का कुल आयात 37 फीसदी बढ़कर 86.66 लाख टन हो गया।
मूल्य के लिहाज से इस दौरान कुल 28,000 करोड़ रुपये का आयात हुआ, जो इसके पिछले साल महज 25 हजार करोड़ रुपये रहा था। एसईए के कार्यकारी निदेशक बी.वी. मेहता ने बताया, 'बीते तेल वर्ष की चारों तिमाहियों में खाद्य तेलों का आयात 20 लाख टन से ज्यादा रहा। घरेलू खपत बढ़ने, कच्चे खाद्य तेल पर आयात शुल्क शून्य होने और रिफाइंड पामोलीन पर बहुत मामूली शुल्क रहने से आयात के इस साल भी जारी रहने की उम्मीद है।'
1994 में अनुमति मिलने के बाद खोलने के बाद आयात ने नया रिकॉर्ड बनाया है। वनस्पति तेल का आयात इस दौरान 30 हजार टन घटकर महज 20 हजार टन रह गया है। पड़ोसी देशों से आयात में व्यावसायिक असमानता की वजह से ऐसा हुआ है।
मेहता ने बताया, 'सामान्यत: तेल वर्ष की पहली छमाही में गिरता है, क्योंकि इस समय घरेलू बाजार में काफी तेल मौजूद होता है। लेकिन हार्वेस्टिंग के पीक समय में पेराई बहुत खराब होने से किसानों ने अपना स्टॉक भविष्य के लिए बचा लिया।' डॉलर में 5 फीसदी की कमजोरी ने भी खाद्य तेल आयात को सस्ता बना दिया। पिछले साल की तुलना में खाद्य तेलों का आयात 46 फीसदी बढ़ गया।
इसमें कच्चे पाम तेल का हिस्सा 51.87 लाख टन हो गया, जो पहले 40.44 लाख टन था। आरबीडी पामोलीन तेल का आयात पहले के 7.31 लाख टन से बढ़कर 12.40 लाख टन हो गया। कच्चे पाम तेल और आरबीडी पामोलीन का कुल आयात पहले के 48 लाख टन से बढ़कर 65.35 लाख टन हो गया। सोयाबीन तेल का आयात भी 7.59 लाख टन से बढ़कर 9.9 लाख टन हो गया।
सूरजमुखी तेल का आयात तो 27 हजार टन से उछलकर 5.9 लाख टन हो गया। रिफाइंड पामोलीन तेल के आयात में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। तेल वर्ष 2006-07 के दौरान जहां यह महज 1.26 लाख टन था, वहीं तेल वर्ष 2008-09 में यह बढ़कर 12.4 लाख टन हो गया।
इसकी वजह कम शुल्क और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में कमी होना रही है। खाद्य तेलों के कुल आयात में रिफाइंड तेल का हिस्सा करीब 15 फीसदी रहा, जो दो साल पहले महज 3 फीसदी था।
Monday, November 16, 2009
रबी में भी तिलहन बुवाई की शुरूआती तस्वीर निराशाजनक
Saturday, November 14, 2009
ड्यूटी फ्री रॉ शुगर आयात की अधिसूचना
Thursday, November 12, 2009
खाद्य तेलों की खपत में 5 लाख टन होगा इजाफा
12 November 2009
नई दिल्ली : भारत में खाद्य तेलों की खपत बढ़ने वाली है। विशेषज्ञों का कहना है कि 2009-10 के सीजन में खाद्य तेलों की खपत में तकरीबन 5 लाख टन का इजाफा हो जाएगा। यह सीजन इसी महीने से शुरू हो रहा है। खाद्य तेलों से संबंधित जानेमाने विशेषज्ञ दोराब ई मिस्त्री ने यह बातें कही हैं। मिस्त्री गोदरेज इंटरनेशनल के डायरेक्टर हैं। मिस्त्री के मुताबिक, तेल वर्ष 2009-10 (नवंबर से अक्टूबर) में देश में खाद्य तेलों की कुल खपत बढ़कर लगभग 155 लाख टन हो जाएगी जो पिछले साल 149।2 लाख टन थी। इस साल तेल का आयात पिछले साल की ही तरह 86 लाख टन रह सकता है।
प्लांटों की खरीद बढ़ने से सोयाबीन 17 प्रतिशत और महंगी
तिलहन पैदावार में कमी का असर दिखने लगा खाद्य तेलों के भाव पर
खरीफ सीजन में तिलहनों की पैदावार गिरने की संभावना का असर खाद्य तेलों की कीमत पर दिखने लगा है। पिछले 15 दिनों में सोयाबीन तेल की कीमतों में 2.5 रुपये प्रति किलो और मूंगफली तेल की कीमतों में 5 रुपये प्रति किलो की तेजी आ चुकी है। चालू खरीफ सीजन में तिलहन पैदावार घटकर 152 लाख टन ही रहने का अनुमान है जबकि पिछले साल 178 लाख टन उत्पादन हुआ था। हालांकि आयात में हुई बढ़ोतरी से मौजूदा कीमतों में भारी तेजी की संभावना कम है। दिल्ली वेजिटेबल ऑयल ट्रेडर्स एसोसिएशन के सचिव हेमंत गुप्ता ने बताया कि खरीफ में सोयाबीन और मूंगफली की पैदावार में कमी आने से खाद्य तेलों के दाम में सुधार हुआ है। पिछले 15 दिनों में सोया रिफाइंड तेल की कीमतों में 2.5 रुपये, मूंगफली तेल की कीमतों में 5 रुपये, बिनौला तेल की कीमतों में 2 रुपये और क्रूड पाम तेल की कीमतों में 50 पैसे प्रति किलो की तेजी आ चुकी है। सोमवार को इंदौर में सोया रिफाइड तेल के दाम बढ़कर 465 रुपये, राजकोट में मूंगफली तेल के दाम 690 रुपये, हरियाणा में बिनौला तेल के दाम 415 रुपये और कांडला पोर्ट पर क्रूड पाम तेल के दाम बढ़कर 318 रुपये प्रति दस किलो हो गए। हालांकि इस दौरान सरसों तेल की कीमत में दो रुपये प्रति किलो की गिरावट आकर भाव 512 रुपये प्रति दस किलो रह गए। साई सिरमन फूड लिमिटेड के डायरेक्टर नरेश गोयनका ने बताया कि पिछले 15 दिनों में सोयाबीन की कीमतों में 300 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आकर भाव 2400-2420 हो गए। लेकिन घरेलू बाजार में चालू तेल वर्ष में खाद्य तेलों का रिकार्ड आयात हुआ है जिससे खाद्य तेलों की कीमतों में भारी तेजी के आसार नहीं हैं। साल्वेंट एक्स्ट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार पिछले तेल वर्ष (नवंबर से अक्टूबर) में सितंबर तक 11 माह में खाद्य तेलों के आयात में 57 फीसदी की भारी बढ़ोतरी हुई। अभी तक 79.75 लाख टन का रिकार्ड आयात हुआ है जबकि पिछले साल 54.29 लाख टन का आयात हुआ था।श्री राजमोती इंडस्ट्रीज के मैनेजिंग डायरेक्टर समीर भाई शाह ने बताया कि मूंगफली तेल में निर्यातकों के साथ ही घरेलू मांग अच्छी बनी हुई है। सर्दियों में मूंगफली तेल की मांग में और बढ़ोतरी की संभावना है। जिससे मूंगफली तेल की कीमत में 50 से 75 रुपये प्रति दस किलो की और तेजी की संभावना है। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी आरंभिक अनुमान के मुताबिक खरीफ में तिलहनों की पैदावार 152 लाख टन ही रहने का अनुमान है जोकि पिछले साल के 178 लाख टन से काफी कम है। इसमें मूंगफली का उत्पादन घटकर 45.3 लाख टन और सोयाबीन का उत्पादन 89.3 लाख टन होने का अनुमान है। पिछले साल मूंगफली का 56.3 लाख टन और सोयाबीन का 99.1 लाख टन का उत्पादन हुआ था।
Monday, November 9, 2009
COOIT seeks higher duty on edible oil imports
By Sadananda Mohapatra, edited by Mahul Brahma/NewsWire18
The Central Organisation for Oil Industry and Trade has demanded to raise duties on imported oils to check excessive imports and to save domestic edible oil industry, the trade body said in a press release. "The industry is of the view that zero-import duty regime for import of edible oils is disastrous and must be urgently replaced by 30% customs duty on crude and 40% duty on refined edible oils," the release said.
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SOYBEAN
The trade body also blamed heavy palm oil imports for lower domestic oilseed crushing. "Because of cheap palm oil imports, local oilseeds are not being crushed and large inventories of oilseed are lying with farmers," the COOIT said.
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Refined Soy Oil under weak dollar risk
Refined Soybean Oil (November contract) futures closed lower on account of huge stock of imported edible oils and lower demand at retail ends.
Import of vegetable Oils during the month of September 2009 has set a new record at 8.65 lakh tonnes, up by 39% as compared to 6.23 lakh tonnes for September 2008.
Overall import of vegetable oil during the November 2008 to September2009 was 75.70 lakh tonnes, up by 57% from 48.22 lakh tonnes for the same period of last year.
The benchmark November contract on NBOT Exchange (Indore), Ref Soy oil futures closed lower Rs 5.60 at Rs 438.40/10 Kg on Tuesday, from its high of the day (444.60) and touched a low of MYR 437.20/10 kg.
...अब बीटी मक्के को बा...अब बीटी मक्के को बाजार में उतारने की चल रही है तैयारी जार में उतारने की चल रही है तैयारी
09 November 2009
हैदराबाद November 06, 2009
अमेरिका की वैश्विक बायोटेक खाद्य कंपनी मोनसेंटो की सहायक कंपनी मोनसेंटो इंडिया लिमिटेड (एमआईएल) ने कहा है कि वह 2012-13 तक आनुवांशिक रूप से विकसित मक्के के बीज पेश करने की तैयारी कर रही है।
एमआईएल के निदेशक ज्ञानेन्द्र शुक्ला ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा कि प्रस्तावित मक्के के बीज से न केवल 'बीटी' से लैस किया गया है बल्कि कंपनी 'राउंडअप रेडी' तकनीक का इस्तेमाल भी इसमें करेगी, जिससे कीटों से पौधे का बचाव हो सकेगा।
मोनसेंटो बीटी मक्के में अच्छी संभावनाएं देख रही है, क्योंकि भारत में लोगों के खानपान में बदलाव हो रहा है और भारत में मक्के का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। पॉल्ट्री और पशुधन उत्पादन में मक्के की जबरदस्त मांग है। स्टॉर्च उद्योग में भी मक्के का प्रयोग कच्चे माल के रूप में होता है, जिसका कारोबार बहुत तेजी से बढ़ रहा है।
एमआईएल के मुताबिक इस समय देश में करीब 30 उपभोक्ता उद्योग हैं, जो मक्के का उपयोग 1000 से ज्यादा उत्पाद बनाने में करते हैं। कपड़ा, कागज, दवाओं और अन्य तमाम उद्योगों में इसका प्रयोग होता हौ। 2011-12 तक भारत में मक्के की घरेलू मांग 220 लाख टन से ऊपर पहुंच जाने की उम्मीद है। इसके विपरीत 2008 में देश में मक्का उत्पादन महज 193.1 लाख टन रहा है।
इस समय एमआईएल देश में हाइब्रिड मक्के के बीज का कारोबार करती है, जिसका ब्रांड नाम डेकलैब है। इस ब्रांड के अंतर्गत 14 विभिन्न अधिक उत्पादकता वाली किस्में हैं। 2008-09 के दौरान कंपनी की कुल बिक्री में 5.6 प्रतिशत का इजाफा हुआ है और यह पिछले साल के 219.5 करोड़ रुपये से बढ़कर 231.8 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।
शुक्ला का कहना है कि भारत में 1300 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है, जो 11.3 अरब डॉलर की कंपनी मॉनसैंटो के लिए बहुत महत्वपूर्ण बाजार है। भारत में कपास के क्षेत्रफल में तेजी से हो रहे विस्तार को देखते हुए कंपनी आत्मविश्वास से लबरेज है और वह भारत में बीटी मक्के के लिए बेहतर संभावनाएं देख रही है।
2008 में भारत में 76 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में बीटी कपास की रोपाई हुई, जो देश में कपास के कुल क्षेत्रफल का 82 प्रतिशत है। शुक्ला ने कहा कि कंपनी सूखा प्रतिरोधी मक्के के बीज पर भी काम कर रही है, जो पहले अमेरिका में 2012 में लॉन्च किया जाएगा। उसके बाद कंपनी इसी तरह के सोयाबीन और कपास के बीज लाने की भी तैयारी कर रही है। (बीएस हिन्दी
35 प्रतिशत महंगा हुआ सोयाबीन
कीमत अधिक होने से सोयाबीन की पेराई में 30 फीसदी तक की गिरावट आयी है। मिलर्स का कहना है कि पिछले साल के मुकाबले तेल की कीमत कम होने के कारण वे अधिक कीमत पर सोयाबीन की खरीदारी की स्थिति में नहीं हैं।
वर्ष 2009-10 के दौरान कुल 90.67 लाख टन सोयाबीन उत्पादन का अनुमान है जबकि वर्ष 2008-09 के दौरान सोयाबीन का कुल उत्पादन 90.62 लाख टन रहा। इस साल इसकी उत्पादकता पिछले साल के 967 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 1006 किलोग्राम होने का अनुमान लगाया गया है।
इंदौर मंडी के मुताबिक शुक्रवार को सोयाबीन की कीमत 2225-2275 रुपये प्रति क्विंटल बताई गयी जबकि पिछले साल की समान अवधि के दौरान यह कीमत 1650 रुपये प्रति क्विंटल थी। सोयाबीन के दाम चालू सत्र की पहली आवक से ही गत वर्ष के मुकाबले तेज बताए जा रहे है।
20 सितंबर को इंदौर मंडी में सोयाबीन की आवक शुरू होती है और इस साल सोयाबीन की शुरुआती कीमत 1850 रुपये प्रति क्विंटल रही जबकि पिछले साल इसके शुरुआती भाव 1650 रुपये प्रति क्विंटल थे। इन दिनों सोयाबीन तेल की कीमत 400 रुपये प्रति 10 किलोग्राम चल रही है जबकि पिछले साल भी यह कीमत लगभग इसी स्तर पर थी।
ऐसे में सोयाबीन की कीमत पिछले साल के मुकाबले 30 फीसदी से अधिक होने के कारण मिर्ल्स की लागत अधिक आ रही है। हालांकि अक्टूबर अंतिम सप्ताह में सोयाबीन तेल के भाव पिछले साल की समान अवधि की तुलना में लगभग 12 फीसदी अधिक थे।
सोयाबीन प्रोसेर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के प्रवक्ता राजेश अग्रवाल के मुताबिक अभी सोयाबीन की आवक काफी कम मात्रा में हो रही है। अब तक मात्र 10 फीसदी फसल ही तैयार हो पायी है। जबकि माल सभी को चाहिए। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमत में तेजी से भी सोयाबीन के अंतरराष्ट्रीय बाजार में मनोवैज्ञानिक रूप से मजबूती का रुख है।
मिर्ल्स के मुताबिक अमेरिका में सोयाबीन की फसल में देरी के कारण भी बाजार में तेजी है। सोपा सचिव गिरीश मतलानी के मुताबिक सोयाबीन को मंडी में नहीं भेजकर उसका स्टॉक करने से भी कीमत में गिरावट नहीं हो रही है। हालांकि इस बात की संभावना भी जतायी जा रही है कि पूर्ण रूप से सोयाबीन की आपूर्ति शुरू होने पर इसके दाम में कमी जरूर आ जाएगी। (बीएस हिन्दी)