Thursday, December 24, 2009

जनवरी से सस्ते हो सकते हैं खाद्य पदार्थ

कोलकाता. योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने मंगलवार को कहा कि 10 वर्षों के शिखर पर चल रही खाद्य पदार्थ की कीमतें अगले माह से घटना शुरू हो सकती हैं।
अहलूवालिया ने कहा कि इस समय उत्पादों के खुदरा मूल्य उनके थोक मूल्यों से काफी आगे निकल गए हैं। फिर भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंची कीमतों के कारण बिना सब्सिडी आयात नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा, ‘यह एक जटिल स्थिति है और सिर्फ मौद्रिक उपायों से इसका ठीक होना मुश्किल है। सूखे के बाद कीमतों में आए उछाल का प्रमुख कारण सट्टेबाजी है। सरकार के पास खाद्यान्न के पर्याप्त भंडार मौजूद हैं और जनवरी से उनकी कीमतों को कम किया जा सकता है।’
गौरतलब है कि खाद्य पदार्थों की कीमतें 10 वर्षों के शिखर पर चल रही हैं। दिसंबर के पहले सप्ताह में मुद्रास्फीति करीब २क् फीसदी दर्ज की गई है। आलू समेत अन्य सब्जियों व दालों की कीमतें आसमान छू रही हैं।
प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार समिति के चेयरमैन सी रंगराजन ने कहा था कि रिजर्व बैंक बाजार में तरलता घटाकर और ब्याज दरें बढ़ाकर महंगाई काबू करने का प्रयास कर सकता है।

तिलहन के वायदा कारोबार पर लगे अंकुश : एसईए

तेल उद्योग के संगठन सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) ने वायदा बाजार नियामक, वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) से तिलहन के वायदा कारोबार पर अंकुश लगाने की मांग की है।
उन्होंने कहा है कि तिलहन के वायदा सौदे वर्तमान के 6 माह की बजाय अधिकतम 2 माह के लिए होने चाहिए। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय और नियामक को लिखे गए एक पत्र में एसईए ने तर्क दिया है कि 6 महीने के लिए होने वाले वायदा सौदों से अटकलबाजी बढ़ती है और इससे कीमतों में बढ़ोतरी होती है। यह भारतीय बाजार के लिए बढ़िया नहीं है।
एसईए के निदेशक बीवी मेहता ने कहा कि इस समय तिलहन की आपूर्ति कम है और इसे देखते हुए इसके बारे में किसी तरह की अटकलबाजी पर रोक लगाई जानी चाहिए।
अपनी मांग की पुष्टि करते हुए मेहता ने कहा, 'वनस्पति तेलों के आयात पर इस समय भारत की 28,000 करोड़ रुपये के बराबर की विदेशी मुद्रा का व्यय हो रहा है। इस पर लगाम लगाई जा सकती है। सरकार को कुछ अटकलबाजी हरकतों पर लगाम लगानी होगी, जो तिलहन के बीज को लेकर लगाई जा रही हैं। साथ ही बुआई के क्षेत्रफल में बढ़ोतरी कर पैदावार में भी बढ़ोतरी करनी होगी।'
2008-09 के दौरान कुल तेल आयात 37 प्रतिशत बढ़कर 86.6 लाख टन हो गया है, जो 28,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का है। इसके पहले साल 63.1 लाख टन तेल का आयात हुआ था, जिसकी कीमत 25,000 करोड़ रुपये थी।
इस साल (नवंबर-अक्टूबर) भारत में तेल की कुल खपत 155 लाख टन रहने की उम्मीद है, जबकि उत्पादन 65 लाख टन पर स्थिर रहने के आसार हैं। इस समय तेल मिलें अपनी क्षमता का 50 फीसदी ही काम कर रही हैं।

Saturday, December 19, 2009

अमूल का मक्खन 20 रुपये महंगा

गुजरात को-ऑपरटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरशन (जीसीएमएमएफ) ने अमूल के प्रति किलोग्राम बटर की कीमत में 20 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। पिछले एक साल में बटर के दाम में चार से पांच बार वृद्धि की गई है जिससे आम लोगों को ब्रेड में बटर का स्वाद कड़वा लगने लगा है। इस मूल्यवृद्धि को अगले सप्ताह से लागू किया जाएगा। फेडरशन अमूल ब्रांड के तहत दूध से अनेक वस्तुओं का उत्पादन और उनकी बिक्री का कारोबार करता है। दूध उत्पादित चीजों के दामों में हो रही लगातार वृद्धि पर गुजरात के 13 दूध उत्पादन संघों ने ऐतराज जताया है और केंद्र से इस वृद्धि पर अंकुश लगाने की मांग भी की है।जीसीएमएमएफ के मुख्य महाप्रबंधक आर।एस. सोढी ने बताया कि बटर के कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि के कारण ही प्रति किलोग्राम बटर के दाम में 20 रुपये तक की वृद्धि करना जरूरी हो गया था।

Thursday, December 17, 2009

http://seekingalpha.com/article/178037-commodity-forecast-for-2010-2011?source=yahoo

खाद्य तेलों की खपत 5 प्रतिशत बढ़ी


कम कीमत के चलते देश में वनस्पति तेलों की खपत बीते खाद्य तेल वर्ष में 5 फीसदी बढक़र 13.5 किलोग्राम प्रति व्यक्ति के अप्रत्याशित स्तर तक पहुंच गई।
तेल वर्ष 2007 में इसकी प्रति व्यक्ति खपत 11.4 किलोग्राम रही थी। मशहूर खाद्य तेल विशेषज्ञ और गोदरेज इंटरनैशनल के निदेशक दोराब मिस्त्री ने दिल्ली में एक सेमिनार में अनुमान जताया कि देश में वनस्पति तेल की प्रति व्यक्ति खपत इसी गति से बढ़ती रहेगी।
उन्होंने कहा, 'भारतीय बाजार कीमत के लिहाज से बड़ा लचीला है। यहां तेलों की कीमत कम होने से उसके उपभोग में वृद्धि होती है। नवंबर 2008 से अक्टूबर 2009 तेल वर्ष में वनस्पति तेलों की प्रति व्यक्ति खपत में तेजी से इजाफा हुआ। इससे सूरजमुखी और सोयाबीन तेलों का आयात करने को बाध्य होना पड़ा।'
पाम तेल के आयात में भी वृद्धि हुई। यहां की रिफाइनरियों ने दोहरे पृथक्करण के जरिए सुपर ओलीन नामक तेल का विकास किया है। इस बीच, थोक बाजार में आरबीडी ओलीन की कीमत में जबरदस्त कमी हुई। अक्टूबर 2008 में यह घटकर 42 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच गया था। मार्च 2008 में इसका मूल्य प्रति टन 62 हजार रुपये था। नंवबर-दिसंबर में यह घटकर 30 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच गया।
सीजन 2008-09 में तेल का आयात साल भर पहले के 63 लाख टन से काफी ज्यादा बढ़कर 86 लाख टन हो गया। बायोईंधन के लिए मांग और डॉलर की तुलना में रुपये की मजबूती के चलते आरबीडी ओलीन की कीमत अभी 38 हजार रुपये प्रति टन पर है। एक विश्लेषक ने बताया कि कीमतें घटने से ग्रामीण उपभोक्ता रुपये के बजाय ग्राम के आधार पर खरीदारी करने लगे।
2008 की शुरुआत में सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की ऊंची कीमत को देखते हुए कच्चे अपरिष्कृत वनस्पति तेलों पर आयात शुल्क खत्म कर दिया, जबकि परिष्कृत वनस्पति तेलों पर आयात शुल्क को घटाकर 7.5 फीसदी कर दिया। 2008 की दूसरी छमाही और 2009 की शुरुआत में सरकार महंगाई नियंत्रण नीति पर चलती रही।
यह नीति जनता के बीच लोकप्रिय हुई और इसने मास्टरस्ट्रोक का काम किया। इसके चलते महंगाई दर शून्य तक लाने में कामयाबी मिली। दालों के काफी महंगा होने से भी मूंगफली और सोयाबीन जैसे तिलहनों का उपयोग बढ़ा। इसलिए उम्मीद है कि इस साल प्रति व्यक्ति तेल की खपत 4 से 5 फीसदी बढ़ जाएगी। देश की प्रति व्यक्ति आय भी लगातार बढ़ती जा रही है।
भारतीयों की प्रति व्यक्ति आय अब 1,000 डॉलर पार कर चुकी है। इस स्तर को उपभोग के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। मिस्त्री ने कहा कि सभी खाद्य उत्पादों के महंगा होने के बीच वनस्पति तेलों की कीमत उपभोक्ताओं को राहत दे रही है

सोयामील निर्यात 30 प्रतिशत कम रहने का अनुमान

अमेरिका में सोयाबीन के उत्पादन में बढ़ोतरी और घरेलू बाजार में सोयाबीन के दाम ऊंचे होने के साथ ही डॉलर की कमजोरी से चालू वित्त वर्ष में भारत से सोया खली के निर्यात में तीस फीसदी कमी आने की आशंका है। चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से नवंबर तक भारत से सोया खली का निर्यात घटकर 11,47,307 टन का ही हुआ है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 24,20,255 टन का निर्यात हुआ था।सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के प्रवक्ता राजेश अग्रवाल ने बिजनेस भास्कर को बताया कि घरेलू बाजार में सोयाबीन के दाम ऊंचे होने के कारण प्लांटों को पड़ते नहीं लग रहे हैं। वैसे भी अमेरिका में सोयाबीन के उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है जिससे अमेरिका की सोया खली भारत के मुकाबले सस्ती पड़ रही है। रुपये के मुकाबले डॉलर कमजोर होने से भी बेपड़ता हो गया है। इसीलिए पिछले सात महीने में भारत में सोया खली की कीमतों में करीब 12 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। मई महीने में सोया खली के दाम बंदरगाह पहुंच बढ़कर 23,700 रुपये प्रति टन हो गए थे जबकि इस समय भाव घटकर 20,500 से 20,800 रुपये प्रति टन रह गए हैं। दाम घटने के बावजूद भी भारत से नवंबर महीने में सोया खली का निर्यात घटा है। नवंबर महीने में भारत से सोया खली का निर्यात घटकर मात्र 2,97,661 टन का ही हुआ है जबकि पिछले साल नवंबर महीने में 6,63,776 टन का निर्यात हुआ था।उन्होंने बताया कि निर्यातकों की कमजोर मांग को देखते हुए चालू वित्त वर्ष में भारत से सोया खली का निर्यात घटकर 30 लाख टन ही होने की संभावना है। जबकि वित्त वर्ष 2008-09 में 42।45 लाख टन सोया खली का निर्यात हुआ था। सोपा के अनुसार चालू सीजन में भारत में सोयाबीन का उत्पादन 97.24 लाख टन होने की संभावना है। उधर अमेरिकी कृषि विभाग के अनुसार अमेरिका में सोयाबीन का उत्पादन बढ़कर 903 लाख टन होने की उम्मीद है। साई सिमरन फूड लिमिटेड के डायरेक्टर नरेश गोयनका ने बताया कि स्टॉकिस्टों की सक्रियता के कारण घरेलू बाजार में सोयाबीन की कीमतें बढ़ गई थी जबकि रिकार्ड आयात होने के कारण सोया तेल में तो मांग कमजोर बनी ही हुई है। साथ ही सोया खली के निर्यात में भी लगातार कमी आ रही है। सोयाबीन के दाम उत्पादक मंडियों में मई में बढ़कर 2650 रुपये प्रति क्विंटल हो गये थे जबकि इस समय प्लांट डिलीवरी सोयाबीन का भाव 2350 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। इन भावों में भी मिलों की मांग कमजोर बनी हुई है जिससे मौजूदा कीमतों में और भी गिरावट की आशंका है।

Wednesday, December 16, 2009

Poor weather dims hopes for India's oilseed crop


Weather setbacks are continuing to hurt prospects for all India's main oilseed crops, leaving the country ever-more reliant on palm imports to meet its vegetable oil needs, Washington has said.

The cotton crop in the world's fifth-biggest oilseed producer was damaged by tropical storms last month, which landed heavy rains on some areas while plants were in the sensitive phase when bolls are open.

Meanwhile, the hangover from a weak monsoon has dented hopes for peanut, rapeseed and soybean crops, the US Department of Agriculture said, unveiling a cut of 1.1m tonnes to 32.25m tonnes in its forecast for India's 2009-10 oilseed output.

'Widening discount'

The weak domestic harvest was likely to raise oilseed imports which, in crude form can still be shipped in at zero duty, with palm oil likely to lead the trend.

"Palm oil will be favoured by its widening price discount, currently \$130-\$150 per tonne, to soybean oil," the USDA said.

The department forecast palm oil imports hitting 6.6m tonnes in 2009-10, which it termed "a record", although its own data show a higher figure, of 6.87m tonnes, for 2008-09.

'Negligible rainfall'

Prospects of rapeseed, of which India is the world's fourth-biggest producer, had suffered the most, thanks in the main to "negligible rainfall since July" in Rajasthan, where 40-45% of the domestic crop is grown.

"The supply of irrigation water is also very low due to poor replenishment from last summer's monsoon," the USDA said, adding that the crop, for which the government has maintained its guaranteed price, might lose out to wheat, for which support had been raised.
The forecast for rapeseed output was cut by 500,000 tonnes to 6.6m tonnes.

The harvest estimate for soybeans was reduced by 200,000 tonnes to 8.8m tonnes, reflecting "less favourable moisture conditions" in Maharashtra, the second biggest producing state.

For cottonseed, the output estimate was cut by 200,000 tonnes to 10.1m tonnes, lower than the 10.4m-tonne figure hit two years ago despite record plantings.

"The reduction in crop is expected to moderate the feed use and crushing of cottonseed," the USDA said, in a follow-up report to the key world crop supply and demand data published last week

Veg oils import up in Nov on lower palm prices

Lower prices for palm group of oils resulted in higher imports of vegetable oils in November compared with the same period a year ago.

According to the Solvent Extractors Association of India, vegetable oils import increased 36 per cent in November to 7.53 lakh tonnes (lt). Of this, edible oils comprised 7.12 lt and non-edible the rest.

Prices of refined, bleached and deodorised palmolein dropped to $708 a tonne in November compared with $715 in October, while crude palm oil rate slipped to $660 from $672. Prices of crude sunflower oil and crude soyabean oil, however, increased. In the case of soyabean oil, it was up at $867 ($818) and sunflower rose to $836 ($802).

Drop in palm imports

Of the oils that were imported, crude palm oil made up 4.50 lt and RBD palmolein 1.12 lt. A little over 55,000 tonnes of crude sunflower oil were imported while 78,000 tonnes of crude soyabean oil were brought into the country.

The percentage of palm group oils import dropped to 81 per cent from 98 per cent last year. This was mainly since last year, higher prices for soyabean and sunflower oils made the imports unfeasible.

चीनी की बढ़ती कीमत चिंताजनक : आनंद शर्मा


वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने कहा है कि नवंबर माह के लिए थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के पांच प्रतिशत के करीब पहुंचने की सबसे प्रमुख वजह चीनी की ऊंची कीमतें हैं।शर्मा ने कहा कि खाद्य पदार्थों की कीमतें अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं। इनकी कीमतों में 24।7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि इस दौरान चीनी के दाम 53 प्रतिशत से ज्यादा बढ़े हैं, जो चिंता की बात है और खाद्य पर मंत्रिसमूह इस पर विचार करेगा।उन्होंने कहा कि खाद्य वस्तुओं की ऊंची कीमतों के बावजूद नवंबर में महंगाई की दर 4.78 प्रतिशत रही है, जो पिछले साल की इसी अवधि के 8.47 प्रतिशत से कम है। (नद-टीवी)

वनस्पति तेल आयात नवंबर में 36फीसदी बढ़ा


देश का वनस्पति तेल आयात नवंबर में 36 फीसदी बढ़कर 7।54 लाख टन रहा है। औद्योगिक आंकड़ों के मुताबिक गत वर्ष नवंबर में आयात 5.55 लाख टन रहा था। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने अपने एक वक्तव्य में कहा कि कुल वनस्पति तेल आयात में खाद्य तेलों की मात्रा सबसे ज्यादा 7,12,677 टन रही है, जबकि गैर खाद्य तेलों का आयात 41,289 टन रहा है। वहीं, नवंबर 2008 के आयात में खाद्य तेलों का हिस्सा 5,19,032 टन था जबकि गैर खाद्य तेलों का आयात 36,310 टन रहा था। सरकार ने खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए कच्चे खाद्य तेलों के आयात पर से आयात शुल्क पूरी तरह हटा दिया था जबकि रिफाइंड तेलों के आयात पर शुल्क घटाकर 7.5 फीसदी कर दी थी। आंकड़ों के मुताबिक कुल खाद्य तेल आयात में रिफाइंड तेल की हिस्सेदारी 16 फीसदी रही, जबकि बाकी 84 फीसदी क्रूड ऑयल था। वहीं गत नवंबर में कुल खाद्य तेल आयात में रिफाइंड ऑयल की मात्रा 27 फीसदी थी। नवंबर में क्रूड पाम ऑयल निर्यात 4.5 लाख टन रहा, जबकि गत नवंबर में यह 3.63 लाख टन था। आरबीडी पामोलिन का आयात 1.37 लाख टन से घटकर 1.12 लाख टन इस दौरान रहा। कुल आयात में पाम ऑयल की हिस्सेदारी 81 फीसदी रही जबकि गत वर्ष यह 98 फीसदी थी। एसोसिएशन ने पिछले महीने अपने आंकड़ों में कहा था कि सीजन 2008-09 (नवंबर-अक्टूबर) में 86.6 लाख टन वनस्पति तेलों का आयात किया गया जो 1994 में आयात की इजाजत मिलने के बाद से सबसे ज्यादा है। आयात शुल्क हटाए जाने और डॉलर में रुपये के मुकाबले पांच फीसदी तक की गिरावट ने तेलों के आयात को सस्ता बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

वैजिटेवल ऑयल आयात बढा

नई दिल्ली, 15 दिसम्बर (एनएनएस)। एसईए मुम्बई के कार्यकारी निदेशक डॉ. बीवी मेहता से प्राप्ता विज्ञप्ति के अनुसार नए तेल वर्ष का जो नवम्बर से श्रीगणेश हुआ उसका आगा*ा 5.55 लाख की बजाय लगभग 7.54 लाख टन वैजिटेबल ऑयल से हुआ। इसमें कुछ प्रमुख तेलों की क्वालिटी इस प्रकार रही कोस्टक में पूर्वाकडें हैं-

पामोलिन रिफाइंड (1.38 लाख) 1.13 लाख टन, कच्चा पामऑयल (3.64 लाख) 4.50 लाख से अधिक, कच्चा पामोलिन (शून्य) 3438 टन, तेल सूरजमुखी (8 हजार) 55688 टन, तेल सोयाबीन (शून्य) 78000 टन, तेल गोला (1999) 1199 टन, कच्चा पामगिरी तेल (7496) 11496 टन, सकल आयात (5.19 लाख) 7.13 लाख टन, अखाद्य तेलों में पीकेएफएडी (शून्य) 2295 टन, पीएफएडी (16496) 21998 टन, सीपीएस (5827) 3499, और सीपीकेओ (9988) 13497, अन्य (3999) शून्य, सकल आयात (36310) 41279 टन।

विदेशी तेल दाम

गत अक्टूबर माह में मुम्बई मार्केट में बंदरगाह पहुंच विदेशी तेलों के दाम इस प्रकार रहे कोस्टक में गत वर्ष नवम्बर के भाव दिये गए हैं-

पामोलिन रिफाइंड (565 डॉलर प्रति टन) 708 डॉलर प्रति टन पहुंच, कच्चा पामऑयल (475) 666 डॉलर, कच्चा तेल सोयाबीन (801) 867 डॉलर और तेल सूरजमुखी (825) 836 डॉलर प्रति टन।

उक्तावधि में मुम्बई मार्केट में तेलों के दाम इस प्रकार रहे कोस्टक में पूर्वाकडें हैं-

पामोलिन रिफाइंड (31750 रुपए) 35714 रुपए प्रति टन, कच्चा पामऑयल (25795) 31518 रुपए, सोयाबीन रिफाइंड ऑलय (37773) 42264 रुपए, तेल सूरजमुखी (57727) 40627 रुपए, रेपसीड ऑयल (60909 रुपए ) 50182 रुपए प्रति टन

ऑयलपाम को प्लांटेशन घोषित करो

मुम्बई, 15 दिसम्बर। गोदरेज इंटरनेशनल के निदेशक दोराब मिस्री के अनुसार भारत में ऑयल पाम के वृक्ष केरल, आंध्र, कर्नाटक, गोवा तथा कुछ अन्य क्षेत्रों में लगाए जा सकते हैं लेकिन सिंचाई की व्यवस्था होनी जरूरी है। ऑयलपाम प्लांटेशन फसल है जिसके लिए कॉरपोरेट फर्मिंग की जरूरत है। धारक के पास 50/100 हैक्टयर होने चाहिए। गोदरेज जैसी बडी कम्पनियां इतनी कृषि भूमि नहीं खरीद सकती इसलिए केन्द्र सरकार को ऑयलपाम प्लांटेशन फसल घोषित करनी चाहिए। इसकी मदद से देश में वैजिटेबल ऑयल उत्पादन काफी बढ सकता है और आत्मनिर्भरता भी मिल सकती है। वर्तमान स्थिति में तो देश की खपत का 70 प्रतिशत उत्पादन हो जाए तो गनिमत है। ऑयलपाम की खूबी उत्पादकता में है। एक हेक्टेयर में सरसों औसतन 900 किलो होती है जिससे 300 किलो तेल सरसों प्राप्त होता है। दूसरी ओर एक हेक्टेयर में ऑयलपाम से 3.5/4 टन पाम ऑयल मिल जाएगा। किसान भी इसके वृक्ष लगाना चाहेंगे लेकिन उन्हें चार साल इंतजार करना पडेगा। अगर ऑयल पाम वृक्ष के मध्य अन्य फसलों की खेती की जाए तो उसे अतिरिक्त आय हो सकती है तथापि केन्द्र सरकार को किसानों को अनुदान देना पडेगा। मलेशिया तथा इंडोनेशिया पाम ऑयल उत्पादन में प्रमुख दोनों देशों में फालतू वनीय भूमि है जहां कोई आबादी नहीं रहती। इन वनों को साफ करके मलेशिया में 45 लाख हेक्टेयर में ऑयल पाम बागान लगाए गए जिनसे 180 लाख टन पाम ऑयल हुआ। इंडोनेशिया ने उससे भी बढकर 65 लाख हेक्टेयर में ऑयल पाम वृक्ष लगाए और वहां 220 लाख टन पाम ऑयल उत्पादन हुआ ज्यादातर वृक्ष 1980 के बाद के हैं। इंडोनेशिया हर साल इनका एरिया 5 लाख हेक्टेयर बढा रहा है। (इससे यह संकेत मिलते हैं कि देश में एमपी, महाराष्ट्र, सुंदरवन बंगाल तथा पूर्वोत्तर के वनों की साफ-सफाई करके सिंचाई व्यवस्था के साथ ऑयल पाम के वृक्ष लगाए जा सकते हैं)। भारत में तेल आयात पर निर्भरता कुछ वर्षों में बढी है। पिछले तेल वर्ष में आयात 86 लाख टन हो गया जबकि 2000-01 में 48 लाख टन आयात हुआ था। जाहिर है कि उत्पादन बढाने के अलावा और चारा नहीं तथा पाम ऑयल इसमें समर्थ है

मांग कमःतेल गिरने लगा


नई दिल्ली, 15 दिसंबर (एनएनएस) । अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेल वायदा में उठा-पटक जारी रहने व मांग कमजोर होने से स्थानीय बाजार में खाद्य व अखाद्य तेलों में कारोबार कमजोर रहा। मांग के अभाव में सरसों तेल 50 रुपए टूट गया। सटोरिया बिकवाली के कारण वायदे में सरसों दिसंबर डिलीवरी के भाव 620.60 से घटकर 619 रुपए प्रति 20 किलो रह जाने व तेल मिलों की मांग घटने से लारेंस रोड पर सरसों के भाव 2700/2900 रुपए क्विंटल पर सुस्त रहे। ग्राहकी कमजोर होने से तेल सरसों एक्सपेलर 50 रुपए घटकर 5600 रुपए प्रति क्विंटल रह गया। चावल, तिल व बिनौला तेल की कीमतों भी पूर्व स्तर पर मजबूत रही। शिकागो सोया तेल वायदा के प्लस में होने व मध्य प्रदेश की मंडियों में सोयाबीन की आवक डेढ लाख बोरी के लगभग रह जाने से सोयाबीन के भाव 25/30 रुपए बढकर लूज म 2300/2360 व प्लांट डिलीवरी 2325/2390 रुपए प्रति क्विंटल हो गए। सोयाबीन की कीमतों में सुधरने से सोया तेल में भी मजबूती का रुख रहा। इंदौर में तेल सोया रिफाइंड 4550/4600 रुपए प्रति क्विंटल पर मजबूत रहा। स्थानीय बाजार में सोया तेल 100 रुपए बढकर 4950/5000 रुपए प्रति क्विंटल बोला गया। वनस्पति घी में भी मजबूती रही।

साबुन निर्माताओं की मांग कमजोर होने से अखाद्य तेलों में कारोबार कमजोर रहा। फलस्वरुप एसिड ऑयल, नीम तेल, सोप स्टॉक के भाव दबे रहे। केएलसीई में क्रूड पाम तेल वायदा के प्लस में होने तथा सीमित बिकवाली के कारण कांदला में क्रूड पाम ऑयल 348/350 रुपए पर मजबूत रहा। अन्य खाद्य व अखाद्य में कारोबार कमजोर रहा

MR DORAB MISTRY PAPER- POTS- India by mpoc at new delhi

Mr. Dorab Mistry’s Paper – POTS- India by MPOC at New Delhi

Mr. Dorab Mistry, Director, Godrej International Ltd., London presented a paper on "2008-09 Revisited Economic Downturn & Effect on Palm Oil Trade" at POTS – India by MPOC on 15th December 2009 held at Taj Palace Hotel, New Delhi. Source: The Solvent Extractors' Association of India's Press Release Dt। 15th Dec।, 2009 Download file: Click here:https://www.box.net/shared/i98sc9a5x5

Tuesday, December 15, 2009

सोयाबीन तेल रपट गया


नई दिल्ली, 14 दिसंबर (एनएनएस)। बिकवाली के अभाव में स्थानीय बाजार में सरसों व बिनौला तेल की कीमतों में सुधार का रुख रहा। जबकि उठाव कमजोर होने से सोया तेल में नरमी रही। सरसों में मजबूती का रुख होने के कारण मिलों द्वारा ऊंचे भाव बोले जाने से तेल सरसों एक्सपेलर 50 रुपए बढकर 5650 रुपए प्रति क्विंटल हो गया। स्टॉकिस्टों की बिकवाली घटने से लारेंस रोड पर सरसों के भाव 2700/2900 रुपए प्रति क्विंटल पर मजबूत रहे। लुधियाना में बिनौला तेल के भाव 50/60 रुपए क्विंटल बढ जाने से स्थानीय बाजार में तेल बिनौला के भाव 80 रुपए क्विंटल बढकर 4430 रुपए प्रति क्विंटल हो गए। तिल व चावल तेल की कीमतों में स्थिरता रही। मध्य प्रदेश की मंडियों में सोयाबीन की आवक 1.50/1.75 लाख बोरी के लगभग होने व प्लांटों की लिवाली कमजोर होने से सोयाबीन के भाव 20/25 रुपए घटकर मंडियों में लूज भाव 2270/2300 व प्लांट डिलीवरी 2320/2370 रुपए प्रति क्विंटल रह गए। इंदौर में सोया तेल रिफाइंड भी उठाव न होने से 30/50 रुपए घटकर 4550/4600 रुपए प्रति क्विंटल रह गए। स्थानीय बाजार में भी इसके भाव 100 रुपए टूटकर 4850 रुपए प्रति क्विंटल रह गए। सप्लाई कमजोर होने से गोला तेल के भाव 40/50 रुपए टीन बढकर 925/950 रुपए प्रति टीन हो गए।

साबुन निर्माताओं की मांग कमजोर होने से अखाद्य तेलों में कारोबार सुस्त रहा। एसिड ऑयल, राईस फैट्टी व नीम तेल की कीमतें पूर्व स्तर पर खडी रही। केएलसीई में क्रूड पाम तेल वायदा के माईनस में होने व वनस्पति मिलों की मांग घटने से कांदला में क्रूड पाम ऑयल 348 रुपए प्रति 10 किलो पर सुस्त रहा

सरसों मजबूत बनी रहने की उम्मीद

नई दिल्ली, 12 दिसंबर (एनएनएस) । आने वाले दिनों में भी सरसों मजबूत ही बनी रहने की उम्मीद है क्योंकि इसकी बुआई में कमी आयी है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकडों में बताया गया है कि चालू सीजन के दौरान अभी तक सरसों की बिजाई में लगभग तीन प्रतिशत की कमी आयी है।

मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम आंकडों के अनुसार बीते 10 दिसंबर तक देश में कुल 77.77 लाख हैक्टेयर में विभिन्न रबी तिलहनों की बुआई हुई है। पिछले सीजन की आलोच्य अवधि में तिलहनों की हुई 83.80 लाख हैक्टेयर बुआई की तुलना में वर्तमान बिजाई 6.03 लाख हैक्टेयर या 8.87 प्रतिशत कम है।

तिलहनों की बुआई में यह कमी प्रमुख रबी तिलहन, सरसों की बुआई में आयी करीब 2.45 लाख हैक्टेयर की कमी से हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार चालू सीजन के आरंभ से लेकर अभी तक मौसम सामान्य की तुलना में तापमान ऊंचा रहने से सरसों की बुआई प्रभावित हुई है। मंत्रालय के नवीनतम अनुमानों के अनुसार गत् 10 दिसंबर तक सरसों की 60.85 लाख हैक्टेयर में बुआई हुई है जो कि एक वर्ष पूर्व की आलोच्य अवधि में हुई 63.29 लाख हैक्टेयर बुआई की तुलना में करीब तीन प्रतिशत कम है।

बुआई में कमी के समाचार आते ही घरेलू बाजारों में सरसों व इसके तेल की कीमतें बढनी शुरु हो गयी। हरियाणा की चरखी दादरी, जींद, हांसी, भिवानी और नारनोल जैसी मंडियों में सरसों तेल एक्सपेलर 5425/5550 रुपए प्रति क्विंटल के बीच बोला गया। एक दिन पूर्व की तुलना में इसमें करीब 25/50 रुपए की तेजी आयी। सरसों भी 20/25 रुपए बढाकर बोली जा रही थी।

भिवानी स्थिति व्यापारी विनय कुमार नकीपुरिया ने बताया कि तापमान ऊंचा होने की वजह से न सिर्फ भिवानी मंडल में ही बल्कि हरियाणा के अन्य उत्पादक क्षेत्रों व राजस्थान के भी कुछ क्षेत्रों में सरसों की फसल पर कीडे का प्रकोप हो गया है। यही वजह है कि मनोवृत्ति तेजी की बनी हुई है।

लागत से कम दाम पर बिक रहा है सरसों तेल


सरसों तेल की बिक्री थोक बाजार में लागत के मुकाबले 10 रुपये प्रति किलोग्राम कम कीमत पर हो रही है।
कम कीमत पर हो रही इस आपूर्ति को देख कारोबारी सरसों तेल में मिलावट की पूरी आशंका जाहिर कर रहे हैं। एक किलोग्राम तेल की लागत फिलहाल 70 रुपये प्रति किलोग्राम होती है जबकि थोक बाजार में सरसों तेल का भाव 60 रुपये प्रति किलोग्राम हैं।
थोक बाजार में सरसों तिलहन की कीमत 3000 रुपये प्रति क्विंटल है। 100 किलोग्राम तिलहन की पेराई करने पर लगभग 35 किलोग्राम तेल की प्राप्ति होती है। 62 किलोग्राम केक मिलते हैं और 3 किलोग्राम बेकार चला जाता है। केक की कीमत बाजार में 13 रुपये प्रति किलोग्राम है। इस प्रकार केक से 806 रुपये मिलते हैं।
3000 रुपये के सरसों खरीदने पर 4 फीसदी वैट चुकाने के बाद यह लागत 3120 रुपये हो जाती है। 100 किलोग्राम सरसों की पेराई पर 150 रुपये का उत्पादन खर्च आता है। इस प्रकार यह लागत 3270 रुपये पहुंच जाती है। केक से 806 रुपये मिलते है जिसे घटाने पर 2464 रुपये की लागत बचती है।
लिहाजा 100 क्विंटल सरसों पेराई से मिले 35 किलोग्राम तेल को हर हाल में सिर्फ लागत निकालने के लिए 70.25 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव बेचना पड़ेगा। अगर उत्पादक लाभ कमाना चाहता है तो इसकी कीमत आसानी से 72 रुपये प्रति किलोग्राम तक हो जाएगी।
तेल कारोबारी नाम नहीं छापने की शर्त पर कहते हैं, 'मिलावट के बगैर 10-12 रुपये कम कीमत पर कौन बेच सकता है। पाम तेल या वनस्पति या सोयाबीन तेल की मिलवाट से इस क्षति की पूर्ति आसानी से की जा सकती है।'
हालांकि एक अन्य प्रतिष्ठित ब्रांड के तेल कारोबारी कहते हैं, 'ऐसा नहीं है कि सभी सरसों तेल 60 रुपये प्रति किलोग्राम के दाम पर उपलब्ध है। बाजार में बोतल में बिकने वाले सरसों तेल के भाव 78-80 रुपये प्रति किलोग्राम है। दूसरी बात यह है कि सरसों तिलहन की कीमत कुछ माह पहले 2500 रुपये प्रति क्विंटल थी। इस कीमत पर खरीदने वालों की लागत कम आ रही होगी।' लेकिन वे भी मिलावट की आशंका को खारिज नहीं करते हैं।
बाजार में सरसों की किल्लत भी बतायी जा रही है। कारोबारियों के मुताबिक अभी 22 लाख टन सरसों की पेराई बाकी है। लेकिन तेजी के रुख को देखते हुए हाजिर बाजार में सरसों कम उपलब्ध है। वायदा बाजार में दिसंबर के लिए सरसों की अधिकतम कीमत 625 रुपये प्रति 20 किलोग्राम तो जनवरी, 2010 के लिए यह कीमत 635 रुपये प्रति 20 किलोग्राम के स्तर पर जा चुकी है।
तेल का खेल
सरसों तेल की लागत 70 रुपये किलो और बाजार में बिक रहा है 60 रुपये किलोबाजार में खली की कीमत 13 रुपये प्रति किलोव्यापारी जता रहे हैं मिलावट की आशंका (

Monday, December 14, 2009

सोयाबीन में और तेजी की उम्मीद



नई दिल्ली, 12 दिसंबर (एनएनएस) । अन्तर्राष्ट्रीय और घरेलू हाजिर व वायदा बाजारों में सोया व सोयाबीन उत्पादों की कीमतों में अभी और तेजी आने की उम्मीद है क्योंकि अमरीका से मजबूती के संकेत मिल रहे हैं। व्यापारिक सूत्रों का भी मानना है कि घरेलू बाजारों में सोयाबीन की आवकें कमजोर होने से कीमतें और बढ सकती हैं।

देश के सबसे बडे उत्पादक राज्य, मध्य प्रदेश सहित महाराष्ट्र की मंडियों में भी इन दिनों सोयाबीन की आवकें उम्मीद के अनुरुप नहीं हो रही हैं। इन दोनों राज्यों में संयुक्त रुप से आज 1.75 लाख बोरी सोयाबीन की आवक हुई, जो कि वर्ष की इस समयावधि की तुलना में कम है। यही वजह है कि महाराष्ट्र के जलगांव स्थित थोक तेल-तिलहन बाजार में न सिर्फ सोयाबीन की करीब 40 रुपए तेज होकर 2320/2330 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया बल्कि सोया रिफाइंड तेल भी पांच रुपए बढाकर 490/495 रुपए प्रति 10 किलोग्राम पर बोला गया।

एक अग्रणी व्यापारी कुशल खंडेलवाल ने बताया कि अन्तर्राष्ट्रीय बाजारों से मिल रहे मजबूती के संकेतों तथा कमजोर आवकों के कारण आगामी दिनों में सोयाबीन व इसके उत्पादों में और तेजी आ सकती है।

उधर दूसरी ओर अमरीकी कृषि विभाग ने अपनी नवीनतम मासिक मांग व आपूर्ति रिपोर्ट में कहा है कि अमरीकी सोयाबीन की औसत कीमतें 2009-10 में बढकर 8.75 से 10.25 डॉलर पर पहुंच जाने की उम्मीद है। गौरतलब है कि विभाग ने इससे पूर्व यह कीमतें 8.20 से 10.20 डॉलर के बीच रहने का अनुमान जताया था। सोयाबीन के साथ-साथ विभाग को सोयाबीन मील की औसत कीमतें भी करीब 10 डॉलर बढकर 260-310 डॉलर तथा सोयाबीन तेल की कीमतें 35.5 से 28.5 सैंट प्रति पौंड पर पहुंच जाने की उम्मीद है। विभाग के पूर्व में व्यक्त अनुमानों में इन दोनों उत्पादों की कीमतें क्रमश: 250 से 300 डॉलर तथा 33 से 37 सैंट पर रहने की उम्मीद व्यक्त की थी।

विभाग का मानना है कि ब्राजील और अर्जेटीना के कमजोर उत्पादन को देखते हुए अमरीकी सोयाबीन की आगामी दिनों में काफी मजबूत मांग बनी रहेगी। वैसे भी चालू वर्ष 2009-10 के दौरान अमरीका का कुल तिलहन उत्पादन 9.79 करोड टन रहने का अनुमान है, क्योंकि कपास के उत्पादन में अनुमानों से काफी कम बढोत्तरी हुई है।

दूसरी ओर अमरीका का सोयाबीन निर्यात तेजी से बढ रहा है। अभी तक के अनुमानों के अनुसार सोयाबीन का निर्यात 1.50 करोड बुशल बढकर 1.34 अरब बुशल पर जा पहुंचा है जो कि हाल ही के सप्ताहों का रिकॉर्ड निर्यात है और चीन की मजबूत मांग को देखते हुए आगामी दिनों में निर्यात में और तेजी आने की संभावना है।

अमरीकी कृषि विभाग की यह ताजा रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2009-10 में तिलहनों का वैश्विक उत्पादन 42.86 करोड टन रहने की उम्मीद है जो कि एक माह पूर्व लगाए गए अनुमानों की तुलना में तीन लाख टन कम है। सरसों का अन्तर्राष्ट्रीय उत्पादन करीब 13 लाख टन बढकर 5.94 करोड टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाने की आशा जतायी गयी है क्योंकि कनाडा में इस प्रमुख तिलहन का उत्पादन पूर्व व्यक्त अनुमानों की तुलना में अधिक होने की उम्मीद है हालांकि भारत में सरसों का उत्पादन घटने की आशंका भी है। यह अलग बात है कि कनाडा का रेपसीड उत्पादन 16 लाख टन बढकर 1.18 करोड टन पहुंच जाने की उम्मीद जतायी जा रही है। वहीं दूसरी ओर भारत में सरसों के बिजाई क्षेत्रफल में कमी आयी है। शुष्क मौसम के कारण बुआई क्षेत्रफल में कमी आयी है और आशंका है कि फसल का समुचित विकास भी प्रभावित होगा।

कृषि विभाग का मानना है कि वर्ष 2009-10 के दौरान तिलहनों का वैश्विक व्यापार 9.44 करोड टन का रहेगा जो कि एक माह पूर्व लगाए अनुमानों की तुलना में 7 साल टन ज्यादा है। वैश्विक व्यापार में यह बढोत्तरी मुख्यत: कनाडा से रेपसीड का मजबूत निर्यात तथा अमरीका के सोयाबीन निर्यात में तेजी आने से होगी।

श्री खंडेलवाल का मानना है कि यद्यपि क्रिसमस के कारण आगामी दिनों में शिकागो में सोया व्यापार बाधित होगा लेकिन इसका घरेलू बाजारों पर मामूली प्रभाव ही होने की उम्मीद है। यदि सोयाबीन की आवकें नहीं बढी तो इसके बाजार मजबूत बने रह सकते हैं

Saturday, December 12, 2009

वैश्विक बाजारों का असरःखाद्य तेल सुधरे

नई दिल्ली, 11 दिसंबर (एनएनएस) । अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेल वायदा सुधरने व घटे भावों पर बिकवाली कमजोर होने से स्थानीय बाजार में आज खाद्य तेलों में सुधार का रुख रहा। तिलहन वायदा भी सटोरिया लिवाली से तेजी रही।

सटोरिया लिवाली बढने सरसों वायदा दिसंबर डिलीवरी के भाव 618 से बढकर 620 रुपए प्रति 20 किलो हो जाने व घटे भावों पर स्टॉकिस्टों की बिकवाली घटने से लारेंस रोड पर सरसों के भाव 10/15 रुपए बढकर 2675/2865 रुपए प्रति क्विंटल हो गए। तेल सरसों एक्सपेलर भी 5450 की बजाय 5520 रुपए प्रति क्विंटल हो गया। लुधियाना में भी सरसों तेल के भाव 5650 की बजाय 5700 रुपए प्रति क्विंटल बोला गया। जबकि उठाव कमजोर होने से वनस्पति घी के भाव दस रुपए टीन घटकर 640/810 रुपए टीन हो गए। बिनौला तेल में भी बिकवाली घटने से 30 रुपए बढकर 4380 रुपए प्रति क्विंटल हो गए। चुनाव के कारण मध्य प्रदेश की मंडियों में सोयाबीन की आवक नगण्य रही। फलस्वरुप सोयाबीन की कीमतों में मजबूती का रुख रहा।

अखाद्य तेलों में साबुन निर्माताओं की मांग घटने से कारोबार कमजोर रहा। मांग के अभाव में एसिड ऑयल के भाव 50 रुपए घटकर 2800/2850 रुपए प्रति क्विंटल रह गए। राईस व सीपीओ फैट्टी के भाव भी 40/50 रुपए दबे रहे। नीम तेल की कीमतों में भी 100 रुपए घटकर 4100/4200 रुपए प्रति क्विंटल रह गए।

केएलसीई में क्रूड पाम तेल वायदा के मामूली सुधरने व सीपीओ के भाव 740 डॉलर प्रति टन बोले जाने से कांदला में क्रूड पाम ऑयल दो/तीन रुपए सुधरकर 345/346 रुपए प्रति 10 किला बोला गया, जबकि मुंबई में आरबीडी पाम तेल में नरमी रही।

पाम तेल पर यूरोप में टैक्स छूट संभव


यूरोपीय यूनियन रिन्यूएबल एनर्जी के संबंध में अपने दिशानिर्देश में बदलाव करने जा रहा है। यूरोप में पाम तेल आधारित बायोडीजल के इस्तेमाल से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी के अनुमान में संशोधन किए जाने की संभावना है। मलेशियाई पाम तेल बोर्ड के अनुसार नए दिशानिर्देश जारी होने के बाद पाम तेल को यूरोप में टैक्स छूट मिलने लगेगा। नए दिशानिर्देश दिसंबर 2010 में प्रभावी होने की संभावना है। यूरोपीय यूनियन के मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार पाम तेल आधारित बायोडीजल के इस्तेमाल से अभी सिर्फ 19 फीसदी ग्रीन हाउस गैसों में कमी का अनुमान माना जाता है। इस आधार पर टैक्स में व्यापक छूट पाने में पाम तेल योग्य साबित नहीं होता है। बायोडीजल के लिए कच्चे माल के रूप में पाम तेल के इस्तेमाल की गैर सरकारी संगठन आलोचना कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे पाम तेल के बागान बनाने के लिए जंगल नष्ट होंगे। इसकी वजह से पाम तेल के बायोडीजल से ग्रीन हाउस गैसों में कमी का लाभ बेअसर हो जाता है। पाम तेल के बायोडीजल से ग्रीन हाउस गैसों में कमी होगी लेकिन जंगल कटने से पर्यावरण को नुकसान होगा। इस तरह की आलोचना के बाद उपभोक्ताओं ने इस कमोडिटी का बहिष्कार शुरू कर दिया। इससे पाम तेल और बायोडीजल उत्पादकों के मार्जिन पर बुरा असर पड़ने लगा। अभी यूरोप में पाम तेल का उपयोग मुख्य रूप से कुकिंग तेल के रूप में ही होता है। दूसरी ओर पाम तेल बोर्ड के चेयरमैन साबरी अहमद ने कहा कि यूरोपीय कमीशन के ज्वाइंट रिसर्च सेंटर द्वारा ग्रीन हाउस गैसों के किए गए विश्लेषण से संभावना है कि पाम तेल के बायोडीजल से कहीं ज्यादा ग्रीन हाउस गैस में कमी होगी। इससे पाम तेल की छवि में भी सुधार होगा। ज्वाइंट रिसर्च सेंटर यूरोपीय यूनियन के नीतिगत विकास के तकनीकी और वैज्ञानिक अध्ययन के लिए जिम्मेदार है। हालांकि अहमद ने यह नहीं कहा कि पाम तेल 35 फीसदी ग्रीन हाउस गैस कमी में सफल हो पाएगा। टैक्स छूट के लिए यूरोपीय यूनियन में इतनी कटौती होना आवश्यक है।नवंबर में मलेशिया का पाम तेल उत्पादन 20% गिरानवंबर के दौरान मलेशिया का क्रूड पाम तेल उत्पादन करीब 20 फीसदी गिरकर 16 लाख टन रह गया। मलेशियाई पाम तेल बोर्ड के अनुसार अक्टूबर में पाम तेल उत्पादन 19.8 लाख टन रहा था। यह उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर रहा था। बोर्ड के अनुसार पाम तेल निर्यात नवंबर में अक्टूबर के मुकाबले करीब 1.5% बढ़कर 15 लाख टन रहा था। इस दौरान पाम तेल का स्टॉक २% गिरकर 19.3 लाख टन रह गया। अक्टूबर के अंत में स्टॉक 19.7 लाख टन रहा था। कागरे सर्वेयर कंपनी एसजीएस के अनुसार चालू दिसंबर माह के दौरान पहले दस दिन में पाम तेल निर्यात 5.2 फीसदी गिरकर 399,575 टन रहा।

Thursday, December 10, 2009

Palm falls 1.4pc ahead of stocks data

CPO FUTURES

JAKARTA: Malaysian crude palm oil futures tumbled yesterday as investors pocketed profits from the recent rally ahead of the release of end-November stocks data, traders said.

Industry regulator Malaysian Palm Oil Board (MPOB) is due to release end-November stocks data today.

“The market has been going up for many days, so it is normal to see some profit-taking especially prior to MPOB data,” said a trader at a Kuala Lumpur-based brokerage, adding that weak overseas markets further dented sentiment.

The benchmark February contract on the Bursa Malaysia Derivatives Exchange settled down RM35t, or1.4 per cent, at RM 2,526 a tonne. Overall volume at 20,978 lots of 25 tonnes each was double the usual 10,000 lots.

US soybean for January delivery dropped 1.04 per cent in Asian hours, while most-active September soybean oil contract in China’s Dalian exchange fell 2.4 per cent.

“The end (November) stocks are supposed to be higher and I think the market has anticipated it, so the price fall is temporary,” another Malaysian trader said.

A Reuters poll showed stocks hit a one-year high of 2.03 million tonnes in November as output was still higher than exports despite falling at a faster pace. Analysts have been bullish on a longer-term price outlook, with influential analysts James Fry and Dorab Mistry forecasting the palm oil price would go up to RM3,000 next year assuming that stocks will decline.

In the Malaysian physical palm oil market, asks/bids for December delivery were quoted at RM2,450/2,480
a tonne in the southern region and at RM2,450/2,470 in the central region

विदेश में अब सोयाबीन की पहले जैसी तेजी मुश्किल


सिंगापुर। शानदार तेजी दर्ज कर चुकी सोयाबीन की कीमतों में अब और बढ़त होने की संभावना नहीं है क्योंकि सोयाबीन को अब फंडामेंटल्स का समर्थन नहीं मिल रहा है। हालांकि चीन की ओर से लगातार हो रही जबरदस्त खरीद के कारण सोयाबीन के मौजूदा स्तर से नीचे आने की गुंजाइश नहीं है।सिंगापुर स्थित एक ट्रेडिंग कंपनी के अधिकारी ने कहा कि शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड (सीबॉट) में मध्य नवंबर से जारी तेजी पहले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीन की मांग अपना प्रभाव दिखा चुकी है। ऐसे में और तेजी तभी आ सकती है जब भारी निवेश जारी रहे। बाहरी बाजारों की तेजी से भी सोयाबीन को तेजी का संकेत मिल सकता है। पिछले सप्ताह ही चीन के ग्रेन्स एंड ऑयल्स इन्फोर्मेशन सेंटर ने कहा था कि दिसंबर में चीन का सोयाबीन आयात जून के रिकॉर्ड 47.1 लाख टन को पार कर सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि अर्जेंटीना और ब्राजील में मौसम सोयाबीन की फसल के अनुकूल है। घरेलू सोयाबीन के दाम काफी अच्छे मिलने के कारण चीन को निर्यात भी घट सकता है, ऐसे में फंडामेंटल्स से सोयाबीन की कीमतों पर दबाव बन सकता है। चीन के कारोबारियों को उम्मीद है कि बाजार में इस वर्ष घरेलू सोयाबीन गत वर्ष के मुकाबले ज्यादा पहुंचेगी। चीन की संशोधित सरकारी खरीद योजना के तहत दी गई सब्सिडी ने कोल्हू मालिकों को इस बात के लिए प्रेरित किया है कि जब सोयाबीन की कीमतें एक खास स्तर से नीचे हों तो पेराई में स्थानीय सोयाबीन का इस्तेमाल किया जाए। बीजिंग स्थित एक कमोडिटीज ट्रेडिंग हाउस के एक्जीक्यूटिव ने कहा कि हाजिर बाजार से भी सोयाबीन की कीमतों पर दबाव बन रहा है। ऐसे में भारी आयात और घरेलू सप्लाई बढ़ने से सोयाबीन के एक स्तर का अनुमान तो लगाया ही जा सकता है।

मांग घटी:तेल की धार पतली:सीपीओ नरम

नई दिल्ली, 9 दिसंबर (एनएनएस) । विदेशों के मंदे समाचार आने व ग्राहकी का समर्थन न मिलने से स्थानीय बाजार में अधिकांश खाद्य व अखाद्य तेलों में मंदे का रुख रहा। सटोरिया बिकवाली से तिलहन वायदा में गिरावट रही।

सटोरिया बिकवाली बढने से वायदे में सरसों दिसंबर डिलीवरी के भाव 6/7 रुपए टूटकर 619/650 रुपए प्रति 20 किलो रह जाने तथा तेल मिलों की मांग कमजोर होने से लारेंस रोड पर सरसों के भाव 50 रुपए घटकर 2675/2875 रुपए प्रति क्विंटल रह गया। तेल सरसों एक्सपेलर भी 5620 से घटकर 5500 रुपए रह गया। लुधियाना में बिनौला तेल के भाव 4360 की बजाय 4260 रुपए रह जाने की चर्चा यहां पर बिनौला तेल भी 50/100 रुपए घटाकर बोला गया। इंदौर में सोया रिफाइंड के भाव 4700 की बजाय 4620 रह जाने से यहां पर सोया रिफाइंड के भाव 100/125 रुपए टूटकर 4980 रुपए प्रति क्विंटल रह गए। तेल व चावल तेल में भी नरमी का रुख रहा।

साबुन निर्माताओं की मांग निकलने के कारण अखाद्य तेलों में भी कारोबार कमजोर रहा। एसिड ऑयल व पाम फैट्टी, राईस फैट्टी के भाव भी पूर्व स्तर पर सुस्त रहे। अरंडी तेल में 50 रुपए की गिरावट रही।

केएलसीई के माईनस में होने व सीपीओ के भाव दस डॉलर घटकर 740 डॉलर प्रति टन रह जाने की चर्चा व वनस्पति मिलों की मांग घटने से कांदला में क्रूड पाम ऑयल 348 से घटकर 345 रुपए प्रति 10 किलो रह गया


तेल-तिलहन: खाद्य तेलों में पूरे सप्ताह तेजी के बाद सप्ताहांत में केएलसीई में सीपीओ एवं शिकागो तेल वायदा नरम होने से यहां भी तेजी की बनी रेत की दीवार ढह गई। अलवर लाइन में तेल सरसों 5620/5630 रुपए बिकने के बाद 5500/5550 रुपए रह गए। वहीं सरसों डीओसी 200/300 रुपए बढाकर 12200/12300 रुपए प्रति टन अलवर लाइन के प्लांटों में बोली गई। कांदला में सीपीओ 3420 से बढकर 3480 रुपए प्रति क्विंटल बिकने के बाद 3450 रुपए रह गया। तेल सोया भी तेजी के बाद इंदौर में 50/60 रुपए नीचे आ गया। सोयाबीन भी सप्ताहंात में मुलायम रही जिससे इसकी डीओसी भी 200/300 रुपए घटकर 19800/19900 रुपए प्रति टन रह गई। सूरजमुखी एवं राइस ब्रांड डीओसी भी 100/200 रुपए प्लांटों में नरम रही

Tuesday, December 8, 2009

तेलों की बढती आवक से पामतेल चिंतित



जकार्ता, 7 दिसम्बर। वर्ष 2009-10 में वनस्पति तेलों की वैश्विक आवक इनकी मांग से अधिक रहने की संभावनाएं एशियाई पामतेल व्यापार के लिए भारी चिंता का विषय बनी हुई हैं। विश्लेषकों को पामतेल के मूल्यों में वर्तमान वृद्घि अब शीघ्र ही समाप्त होती दिखाई देने लगी है। ज्ञातव्य है कि पिछले दिनों एशियाई देशों में पामतेल की बढती मांग और प्रमुख उत्पादक क्षेत्रें में शुष्क मौसम के प्रभाव से सोयाबीन की सिकुडती आवक दोनों पामतेल के मूल्यों को खूब उछालती रही हैं। आंकडों के अनुसार इस वर्ष के दौरान अब तक पामतेल लगभग 46 प्रतिशत की वृद्घि दर्ज करा चुका है जबकि गत वर्ष वैश्विक आर्थिक संकट के दौरान पामतेल के मूल्य गत दो तीन दशक के न्यूनतम मूल्य छू आए थे। उधर दूसरी ओर विश्लेषकों के एक अन्य समूह की चिंता का विषय यह है कि अमेरिका और दक्षिण अमेरिकी देशों में सोयाबीन के संभावित रिकार्ड उत्पादन के कारण पामतेल के मूल्यों में कटौती अब अनिवार्य हो चलेगी क्योंकि पामतेल के लिए अब नए व्यापार क्षेत्रें में घुसपैठ आसान न होगी। इस सप्ताह इंडोनेशिया में आयोजित पामतेल पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन और इसके मूल्यों पर चर्चा के दौरान यही चिंता छाए रहने का अनुमान विशेषज्ञ लगा रहे हैं। इधर मौसम के एल नीनो प्रभाव के कमजोर पडने से भी पामतेल उत्पादन में कमी की आशंकाए भी अब समाप्त हो गई हैं। ऐसे में विश्व के सबसे बडे पामतेल उत्पादक इंडोनेशिया ने अपने पामतेल उत्पादन के पूर्वानुमानों में वृद्घि करते हुए अब इसे 205 लाखटन की बजाए 220-230 लाखटन जताया है। दूसरी बडे उत्पादक मलेशिया ने भी अपने पूर्वानुमानों में वृद्घि करते हुए अपने उत्पादन को 170 लाखटन की बजाय 177 लाखटन जताया हैं उधर मलेशिया में मौसम के लिए पूर्वानुमानों में दिसम्बर के अंत में वर्षा जताई गई है जिससे निर्यात क्षेत्रें तथा रिफाइनरीज की ओर परिवहन कठिन हो जाने की आशंका है। परन्तु विश्लेषक इसके परिणामों को नए वर्ष में प्रभावशाली होता देख रहे हैं। इन सब के मद्देनजर विशेषज्ञ वर्ष 2010 के दौरान पामतेल के मूल्यों में कोई उल्लेखनीय वृद्घि की संभावना नही देख पा रहे। उनके अनुसार पामतेल के प्रमुख आयातक भारत और चीन भी पामतेल तब तक ही खरीदेंगे जब तक कि सोयातेल और पामतेल के मूल्यों में अंतर कम से कम 120 डालर प्रति टन रहेगा। वर्तमान में यह अंतर लगभग 150 डालर प्रतिटन है। उधर बायोडीजल क्षेत्र् में भी पामतेल की उपयोगिता तभी तक रहेगी जब तक क्रूड आयल पर्याप्त ऊंचे मूल्यों पर रहे। इस दृष्टि से यदि देखें तो विश्लेषकों के अनुसार क्रूड के औसत मूल्य भी अगले वर्ष 75 डालर प्रति बैरल रहने की संभावना है। क्रूड के लिए यह अनुमान सिंगापुर बैंक ने जताए हैं जो कि पामतेल को आगामी वर्ष 2300 से 2600 रिंगिट प्रतिटन के बीच बिकने का अनुमान लगा रहा है। पामतेल उत्पादन (कृषि) से जुडे विशेषज्ञों का मानना है कि उनके लिए भी पाम कृषि में निवेश तभी तक संभव रहेगा जब कि पामतेल के मूल्य लाभकारी रहेंगे। वैसे वर्तमान में पामतेल का लागत मूल्य 1200 रिंगिट प्रतिटन तथा विक्रय मूल्य लगभग 2400 रिंगिट प्रतिटन है।

India soybean futures ease on weak spot demand

Tue Dec 8, 2009 10:55am IST
MUMBAI, Dec 8 (Reuters) - India soybean futures extended the previous session's losses on Tuesday morning weighed by weak demand in physical market, analysts said.

At 10:50 a.m., the January soybean contract NSBF0 on the National Commodity and Derivatives Exchange was down 0.16 percent at 2,467 rupees per 100 kg.

The benchmark January palm oil futures KPOc3 on Bursa Malaysia Derivatives Exchange was at 2,549 ringgit a tonne, down 0.39 percent at 10:47 a.m.

Analysts said millers were not buying actively in spot market due to a sharp fall in oilmeal exports. Soybean is crushed to produce soyoil and soymeal.

India's oilmeal exports halved to 346,859 tonnes in November, its first monthly fall in three months, as soymeal prices rose following a poor oilseed crop and as shipments to Vietnam, Japan and China fell, a trade body said on Dec. 4.
The losses were capped by thin arrivals and estimate of lower output, they said.

The Central Organisation for Oil Industry and Trade said India's output of summer-sown oilseeds fell 12.5 percent to 13.1 million tonnes in the crop year that began in July 2009, mainly due to lower groundnut and soybean production.

India soybean seen weak on global leads, demand

Tue Dec 8, 2009 9:33am IST
MUMBAI, Dec 8 (Reuters) - India soybean futures may trade weak early in the session on Tuesday weighed by weak global cues and thin domestic demand, analysts said.

The January soybean contract NSBF0 on the National Commodity and Derivatives Exchange last closed at 2,471 rupees per 100 kg, down 0.68 percent.

The benchmark January palm oil futures KPOc3 on Bursa Malaysia Derivatives Exchange was at 2,547 ringgit a tonne, down 0.47 percent at 9:18 a.m.

Analysts said millers were not buying actively due to a sharp fall in oilmeal exports.

Soybean is crushed to produce soyoil and soymeal.

India's oilmeal exports halved to 346,859 tonnes in November, its first monthly fall in three months, as soymeal prices rose following a poor oilseed crop and as shipments to Vietnam, Japan and China fell, a trade body said on Dec. 4.

The Central Organisation for Oil Industry and Trade said India's output of summer-sown oilseeds fell 12.5 percent to 13.1 million tonnes in the crop year that began in July 2009, mainly due to lower groundnut and soybean production.

India soybean drops on weak oilmeal exports

Tue Dec 8, 2009 5:25am IST
MUMBAI, Dec 7 (Reuters) - India's soybean futures dropped on Monday, tracking a weak spot market, where oil millers were not buying actively due to subdued oilmeal exports, analysts said.

"Oil meal exports fell sharply in November. Millers are not ready to buy soybean at higher level. There is no parity in soybean and soymeal prices," said Mehul Agrawal, an analyst with Sharekhan Commodities.

Soybean is crushed to produce soymeal and soyoil.

India's oilmeal exports halved to 346,859 tonnes in November, its first monthly fall in three months, as soymeal prices rose following a poor oilseed crop and as shipments to Vietnam, Japan and China fell, a trade body said on Friday. See [ID:nDEL459269]

The January soybean contract NSBF0 on the National Commodity and Derivatives Exchange ended down 0.68 percent at 2,471 rupees per 100 kg.

Lower output estimates and thin arrivals kept the downside limited, analysts said.

The Central Organisation for Oil Industry and Trade said India's output of summer-sown oilseeds fell 12.5 percent to 13.1 million tonnes in the crop year that began in July 2009, mainly due to lower groundnut and soybean production.

Monday, December 7, 2009

विदेशी गिरावट से सोना 460 रुपये लुढ़का


अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 40 डॉलर प्रति औंस की भारी गिरावट आने से शनिवार को दिल्ली सराफा बाजार में सोने की कीमतें 460 रुपये घटकर भाव 17,890 रुपये प्रति दस ग्राम रह गए। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव 1,200 डॉलर प्रति औंस पर खुला तथा निवेशकों की भारी बिकवाली से 40 डॉलर घटकर 1,160 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करते देखा गया। ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष शील चंद जैन ने बताया कि घरेलू बाजार में सोने की तेजी-मंदी अंतरराष्ट्रीय भाव पर निर्भर करती है इसलिए विदेश में आई गिरावट का असर घरेलू बाजार पर पड़ा है। हालांकि शादियों का सीजन चल रहा है लेकिन दाम महंगे होने के कारण गहनों में बिक्री सामान्य के मुकाबले 50 फीसदी कम है। इस दौरान घरेलू बाजार में चांदी की कीमतों में भी 150 रुपये की गिरावट आई और भाव 29,300 रुपये प्रति किलो रह गये। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी के दाम 18.80 डॉलर प्रति औंस पर खुले और निवेशकों की मुनाफावसूली से 18.47 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करते देखा गये।पिछले 24 सत्रों में से 21 में सोने में बढ़ोतरी ही रही है और इस वर्ष इसके भावों में 32 फीसदी की तेजी आ चुकी है। सितंबर मध्य तक सोना 1,000 डॉलर प्रति औंस था और करीब दो महीनों में ही यह 1,200 डॉलर को पार कर गया। हालांकि सोने की खपत में आई गिरावट से तेजी में ठहराव की संभावना है।

Refined Soy Oil bullish on long term

2009-12-07 13:48:21

Refined Soybean Oil (December contract) futures closed lower on profit taking on Saturday.

As per Dorab Mistry( Analyst, London based vegetable oil Industry)CPO may touch MYR 3000/tonne by March 2010 also added bullish market sentiments.

The benchmark December contract on NBOT Exchange (Indore), Ref Soy oil futures closed lower Rs 4.20 at Rs 492.80/10 Kg on Thursday, from its high of the day (495.90) and touched a low of MYR 490.80/10 kg.

CBOT January soybean oil futures ended higher at 40.13 cents/pounds on Friday up 0.01 cents/pounds as compared to previous close.

The USDA’s Weekly export reports showed that the net oil sales came in at 19,000 tonnes, all for the current marketing year.

Technical Analysis

Ref Soy Oil Prices (NCDEX January Contract) closed lower at 497.450 per 10 Kg on Saturday; its high of the day was 501.45 levels and touched a low 497.00 level.

Prices closed above its 10 day and below its 20 day EMA. 14-Day RSI is at 58.82, which is in neutral zone.

Outlook

Refined soy oil futures are expected to trade slightly higher on firm overseas market due to more use of soy oil in bio-fuel in the month of October may provide support to bulls (for short term). However, in the long term perspectives prices are expected to move southwards on account of huge stock of imported edible oil this year as compared to last year and decision of continue to import of crude edible oil at 0% also in favor of bears in the market.

Courtesy: Angel Commodities

Soybean trade expected to trade lower


2009-12-07 13:11:26

Soybean (NCDEX January Contract) futures closed slightly lower on poor export demand of soy meal.

The Solvent Extractors’ Association of India has just compiled the data for export of oil meals for the month of November 2009. The export during the month of November 2009 is reported at 346,859 tons compared to 678,169 tons in November 2008.

The overall export of oil meals during first eight months of the financial year 2009-10 is reported at 1,890,706 tons compared to 3,360,966 tons for the same period of last year i.e. down by 44% due to weak export demand and lower crushing/processing due to disparity.

Technical Analysis

Prices (NCDEX January Contract) closed lower at Rs.2491.00 per quintal on Saturday; its high of the day was 2500.00 levels and touched a low of 2481.00 levels.

Prices closed above its 10 Day & above its 20 Day EMA. 14-Day RSI is at 63.11, which is in neutral zone.

Outlook

Soybean prices are expected to trade slightly lower on poor export demand of soy meal (for short term). However, in the long term it is expected to trade lower on account of lower export demand of domestic soy meal. Globally soybean production is estimated higher as compared to last year also in favour of bears in the market.

Courtesy: Angel Commodities

Mustard Seed demand from millers increase

2009-12-07 13:13:29

NCDEX December Mustard seed futures closed higher on account of higher prices of other oilseeds and demand from millers.

As per statistics of Canadian government estimated the 2009/10 canola crop 15% higher than their previous estimate at 11.8 million tonnes. This is about 1.0 million tonnes above trade expectations.

Domestic Rabi oilseeds area so far been covered on 75.80 lakh hectare against 76.32 lakh hectare during corresponding period a year ago, as on November 26, 2009.

Latest sowing acreage of mustard seed in Rajasthan were 22.59 lakh hectare vs 27.25 lakh hectare and Madhya Pradesh 8.73 vs 7.30 lakh hectare.

Technical Analysis

Prices (NCDEX January Contract) closed higher at Rs. 637.50 per 20 Kg on Saturday; its high of the day was 639.00 levels and touched a low of 635.00 levels.

Prices closed above its 10 Day & its 20 Day EMA. 14-Day RSI is at 62.05, which is in neutral zone.

Outlook

Mustard Seed prices are expected to trade slightly higher on account of better demand from millers for short term. However, in the long term, overall it is expected to trade lower on account of higher global oilseeds output and huge import of edible oils may provide support to bears.

Courtesy: Angel Commodities

Palm oil demand up on weak soybean crushing


Lower soybean processing due to profit margin issues has helped increase the market share of palm oil among edible oils this winter, industry experts and analysts said.

Palm oil demand usually wanes in winter as it freezes below 24 degrees Celsius.

“Soyoil production is not at its peak this year as it used to be. The pace of crushing is very slow on account of lower profit realisation from soy product sales. (Soy) oil is being replaced by palm oil derivatives, especially RBD palmolien,” said Davish Jain, former president of Central Organisation for Oil Industry and Trade.

Soyoil production usually picks up in November-December after soybean harvest ends in September. The country produces around 200,000 tonnes of soyoil a month during the peak crushing season. But this year, its production has halved, Jain said. Small soybean processors have either stopped or limited crushing in Indore — the soy commodity hub of the country — because of disparity between soybean buying cost and soymeal sales, local crushing plant officials said.

India’s November soymeal export fell 54 per cent on year to 297,340 tonnes as lower crushing led to rise in prices of soymeal, a Solvent Extractors’ Association of India release said today. “We are bullish about soyoil rates. I think soyoil will go up by around Rs 20 soon from the current level due to lower crushing,” Veeresh Hiremath, analyst with Karvy Comtrade, said.

In the Indore spot market, soyoil quoted at Rs 468-472 per 10 kg on Friday. Significant price difference between soyoil and palm oil retail rates has made the latter attractive even as it solidifies in winter, industry sources said. “The price gap between soyoil and palm oil is higher. That’s why winter demand of soyoil is not as good as it should be,” DS Shridhara, owner of Bangalore-based edible oil maker Krishna and Co, said.

Palm oil is being sold at a discount of around Rs 100 to soyoil due to sufficient stock in the country. Palm oil is currently sold at Rs 380 per 10 kg.

Indian palm oil imports rose more than 37 per cent in 2008-09 (November-October) to 5.9 million tonnes as importers took advantage of duty-free regime and cheaper prices.

India surpassed China in 2008-09 as the largest consumer of palm oil.

India would import almost similar quantity of palm oil this year too as it was cheaper and duty-free, said Jain, who is also director of city-based feed meal company Prestige Foods.

Malaysian palm oil exports to India in November were higher at 181,500 tonnes against 124,510 tonnes exported last year, trade sources said.

India currently imposes zero-duty on crude edible oil imports while 7.5 per cent on refined oil. The country imports around 55 per cent of its of its 15 million tonnes annual edible oil requirement, mainly in the form of palm oil from Indonesia and Malaysia.

Wedding season
Soyoil oil demand also fell this marriage season due to lesser number of auspicious days, traders and brokers said.

“Hindu marriage season started late October and will end on December 12, much earlier than other seasons. There will be no marriage season demand for soyoil after December 12,” Rameshchand Malpani, a city-based soy commodity broker said.

At least 25 per cent of Madhya Pradesh’s cooking oil requirement was met by palm oil this year, he said.

The state, which usually consumes soyoil and groundnut oil, requires around 2,000 tonnes cooking oil each day.

चुस्त मांग ने उछाला सोयाबीन

शिकागो, 6 दिसम्बर। शिकागो वायदा व्यापार म गत सत्र लिवालों की भारी मांग से अमेरिकन सोयाबीन लगभग 1.3 प्रतिशत की ऊंची छलांग लगा गया। दूसरी ओर, निर्यात मांग में सुस्ती के कारा लिवाल गेहूं और मक्का से हाथ खींचे रहे। परिणामस्वरूप इन दोनों ही जिंसों के मूल्य गिरावट पर रहे। विश्लेषकों के अनुसार पिछले कुछ सप्ताह से खाद्यान्न व्यापार में जिंसों के मूल्य बाहरी व्यापारी के प्रभाव से रूघटते व बढते रहे हैं लेकिन इस दौरान क्रूड ऑयल यानी पेट्रो के लिए छितराए व्यापार और डॉलर की कमजोरी जैसे आंतरिक रुझान मक्का और गेहूं व्यापार पर भारी रहे और इनके मूल्यों को नियंत्रित करते रहे। दरअसल, विश्वभर में गेहूं उत्पादन में भरपूर वृद्धि यदि गेहूं के मूल्यों को दबाती रही तो दूसरी प्रमुख उत्पादन क्षेत्र मिडवेस्ट में अनुकूल मौसम के कारण उत्पादक किसान अंतत: मक्का का रिकॉर्ड उत्पादन समेटने में लगे हुए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इन दोनों ही जिंसों का रुझान तो हालांकि मंदी का ही है फिर भी इनका व्यापार फंड्स की ओर से उठाए जाने वाले कदम ही इन दोनों के मूल्यों में घटा-बढी के लिए जिम्मेदार हैं।

शिकागो वायदा में आलोच्य सत्र के दौरान दिसम्बर का मक्का 6.5 सैंट की हानि से 385 डॉलर प्रति बुशेल पर तथा दिसम्बर का कोमल लाल शरदीय गेहूं 4.5 सैंट की हानि से 5.50 डॉलर प्रति बुशेल पर तय हुआ। मक्का के वायदा मूल्य 24 नवम्बर से अब तक के न्यूनतम मूल्य रहे लेकिन आलोच्य सत्र में सोयाबीन के वायदा मूल्य निर्यात मांग में चुस्ती के कारण लाभ पर रहे। जनवरी का सोयाबीन 5.5 सैंट की बढत से 10.39 डॉलर प्रति बुशेल पर तय हुआ। सौलुमन सश ने अपने 3 माह और 6 माह के पूर्वानुमान 10.50 डॉलर प्रति बुशेल रहे जबकि इससे पूर्व के अनुमानों में यह मूल्य 10 डॉलर प्रति बुशेल जताए गए थे। गोल्डमन ने गेहूं के लिए 3 माह के पूर्वानुमान 5 डॉलर प्रति बुशेल तथा 6 माह के पूर्वानुमान 5.50 डॉलर प्रति बुशेल जताए हैं। अलबत्ता 12 माह के पूर्वानुमान में वृद्धि करते हुए गोल्डमन ने इन्हें 5.50 डॉलर के मुकाबले 6 डॉलर प्रति बुशेल जताया है। गेहूं के वैश्विक समाचारों के अनुसार कनाडा के गेहूं उत्पादन के लिए 365 लाख टन का अनुमान जताया गया है। कनाडा के सांख्यिकी विभाग द्वारा प्रस्तुत ये अनुमान व्यापारिक अनुमान से तो बढकर हैं ही विभाग द्वारा अक्तूबर में प्रस्तुत अनुमानों से भी 7.9 प्रतिशत अधिक हैं। अमेरिकी कृषि के अनुसार गत सप्ताह अमेरिकन गेहूं निर्यात 390707 से 450000 टन आंका जा रहा था। इजिप्ट के मुख्य गेहूं आयातक गास्क ने जताया कि इसने 1-15 फरवरी के बीच लदान योग्य लगभग 240000 टन रूसी और जर्मन गेहूं 198 डॉलर से 203 डॉलर प्रति टन के बीच मूल्यों पर खरीदा है जबकि अमेरिकन गेहूं का प्रस्ताव 231 डॉलर प्रति टन पर था

पाम तेल 6 माह के सर्वोच्च स्तर पर

कुआलालम्पुर, 5 दिसंबर । गत् सप्ताहांत इंडोनेशिया में चले पाम तेल सम्मेलन में प्रस्तुत टिप्पणियों से समर्थन पाकर मलेशियाई पाम तेल एक ही सत्र के मध्याहन तक 4.8 प्रतिशत की भारी बढत से 6 माह के अपने सर्वोच्च मूल्य स्तर को छूआ था। हालांकि सत्र के उत्तरार्द्घ में गत् मास स्टॉक में हुई वृद्घि तथा निर्यात में सुस्ती की वास्तविकता से दब कर इसके मूल्य कुछ लुढक गए। मलेशिया के बुर्सा वायदा में निर्देशक मास फरवरी के वायदा मूल्य देखते-देखते 118 रिंगिट के लाभ से 2596 रिंगिट (786.3 डॉलर) प्रति टन पर जा पहुंचा और अंतत: 2562 रिंगिट प्रति टन पर बंद हुआ। पाम तेल का यह मूल्य स्तर 5 जून के बाद पहली बार देखने में आया है। ध्यान रहे कि सम्मेलन में पाम तेल उद्योग के शीर्घस्थ विशेषज्ञों दोराब मिस्त्री तथा जेम्स फ्राई ने जताया कि बढती मांग और क्रूड ऑयल (पैट्रो) के मूल्यों में वृद्घि के कारण आगामी वर्ष (2010) में पाम तेल के मूल्य 3000 रुपए प्रति रिंगिट तक पहुंच सकते हैं। पाम तेल स्टॉक में चल रही कभी भी इसी प्रकार के संकेत दे रही है। उधर दूसरी ओर व्यसापारिक अनुमान है कि नवम्बर और दिसम्बर में पॉम तेल का बढता स्टॉक इसके मूल्यों को निरंतर दबाता रहेगा। अलबत्ता वर्षा के कारण इसके उत्पादन में कमी से इसके मूल्यों में वृद्घि की उम्मीद संभावना बन सकती है। उधर फण्ड्स की ओर से बिकवाली के कारण व्यापार में 25-25 टन के 22897 लाख टन की दोगुनी मात्रा व्यापार में उपलब्ध रही। एक सामान्य सत्र में 10 से 12 हजार लाट्स का ही निपटान हो पाता है। आलोच्य सत्र में अन्य वनस्पति तेल व्यापार हालांकि क्रूड ऑयल की नरमी से थोडा बहुत दिशा-निर्देश प्राप्त करते परंतु अधिकतर वे पाम तेल पर ही अपनी एकाग्रता बनाए रहे। जनवरी की डिलिवरी का अमेरिकन सोया तेल 1.4 प्रतिशत की बढत से व्यापार कर गया जबकि चीन के डालियन वायदा व्यापार में सर्वाधिक चर्चित सितम्बर 2010 का सोयाबीन लगभग 2 प्रतिशत की छलांग लगा गया।

विश्व में पाम तेल के सबसे बडे उत्पादक इंडोनेशिया में जकार्ता स्थित सरकारी विक्रय केंद्र में 9000 टन पाम तेल 7226 रुपए (0.768 डॉलर) प्रति किलोग्राम के मूल्यों पर बिका। जकार्ता में ही रिफाइनर्स ने आरबीडी पामोलीन पूर्व के 6900-6950 रुपए प्रति किलोग्राम की बजाय 7000 से 7150 रुपए प्रति किग्रा के मूल्यों पर बेचा

खाद्य तेलों में भारी तेजी के बाद नरमी:डीओसी तेज


नई दिल्ली, 5 दिसम्बर (एनएनएस)। खरीफ सीजन के तिलहनों का उत्पादन कम होने से सरसों में स्टॉकिस्ट माल बेचने से पीछे हट गये, जिसके चलते इसका भाव 50 रुपए महंगा होकर ठहर गया। सरसों तेल 220 रुपए बढने के बाद 40/50 रुपए मुलायम हो गया। इसी क्रम में सोया, मूंगफली, बिनौला एवं तिल तेल भी 50/100 रुपए बढकर कुछ नरम हो गये, जबकि सरसों डीओसी प्लांटों में माल की कमी होने से 500 रुपए एवं सूरजमुखी डीओसी 400 रुपए प्रति टन तेज हो गयी। तेल वाली खलों में भी 50/75 रुपए की तेजी रही।

सरसों की बिजाई कम होने के साथ-साथ सोयाबीन, मूंगफली, बिनौला का उत्पादन घटने से सरसों में स्टॉकिस्ट माल बेचने से पीछे हटने लगे हैं, जिससे 42 प्रतिशत कंडीशन की सरसों 50 रुपए बढकर 2940/2950 रुपए बिक गयी। इसका तेल भी 220 रुपए उछलकर ऊपर में यहां 5700 रुपए बिक गया। बाद में कुछ रि-सेलरों की बिकवाली आने से इसमें 50 रुपए की नरमी आ गयी। सोयाबीन की आपूर्ति घटने से इसका तेल भी 150 रुपए बढकर 5250 रुपए बिकने के बाद पुन: 5100 रुपए पर आ गया। बिनौला तेल भी घटबढकर सप्ताहांत में दब गया। हालांकि मलेशिया में सीपीओ 745 डॉलर पर 10/15 डॉलर प्रति टन सुर्ख रहा। जिससे कांदला में भी इसके भाव 40/50 रुपए तेज बोले गये। लेकिन बढे हुए भावों पर पर सप्ताहांत में ग्राहकी सुस्त पड गयी। वनस्पति घी में पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल एवं झारखंड की शादियों की मांग निकलने से 15/20 रुपए प्रति टीन की तेजी आ गयी। हल्के माल 630/640 रुपए से बढकर 650/660 रुपए प्रति टीन बिक गये। सरसों डीओसी अलवर लाइन में निर्यातकों की पकड मजबूत होने से 12000 से बढकर 12500 रुपए प्रति टन हो गयी, जिससे यहां भी इसके भाव में 13000 रुपए प्रति टन पर 700/800 रुपए की तेजी आ गयी। सूरजमुखी डीओसी भी 13500/13900 रुपए पर 400 रुपए उछल गयी। सोया डीओसी में भी 200 रुपए का और इजाफा हो गया। तेल वाली सरसों खल भी नए बारदाने में 1480 से बढकर 1575 रुपए बिक गयी।

जिंस (क्विं.) सप्ताह पूर्व वर्तमान

भाव भाव

सरसों 2875 2950

तेल सरसों 5580 5700

तेल सोया 5100 5150

तेल बिनौला 4550 4500

सरसों डीओसी टन 12300 13000

सोया डीओसी टन 21400 21600


मार्च तक सीपीओ 20 प्रतिशत और महंगा होने का अनुमान घरेलूसीपीओ बाजार भी तेज हुए


plam oilनई दिल्ली, 5 दिसम्बर (एनएनएस)। पाम तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमतों में और तेजी आने का अनुमान है। यह निष्कर्ष मलेशिया में हाल ही में हुई एक बैठक में उभर कर सामने आया है। गोदरेज इंटरनेशनल के लंदन स्थित निदेशक तथा प्रसिद्ध विश्लेषक श्री दोराब मिस्त्री का मानना है कि आगामी मार्च माह तक पाम तेल की वैश्विक कीमतें करीब 20 प्रतिशत और तेज हो सकती हैं।

श्री मिस्त्री के इस अनुमान के चलते न सिर्फ क्वालालम्पुर स्थित बुर्सा मलेशिया डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (केएलसीई) के सक्रिय तिमाही वायदों में ही तेजी का रुख बना हुआ है बल्कि खाद्य तेलों के घरेलू हाजिर व वायदा बाजारों में भी हाल ही में तेजी दर्ज की गई है। हालांकि सप्ताहांत की वजह से केएलसीई में आज कारोबारी अवकाश रहा लेकिन इससे पूर्व यानी शुक्रवार को काफी तेजी देखी गई। शुक्रवार को कारोबार के आरम्भिक सत्र के अंत में सक्रिय तिमाही वायदों में कोई विशेष तेजी नहीं आई थी। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण यह है कि आरम्भिक सत्र के अंत में नजदीकी माह की वायदा कीमतों में तो कोई उतार-चढाव ही नहीं हुआ था जबकि दूसरे व तीसरे माह के अनुबंधों में भी केवल 10 तथा 15 रिंगिट प्रति टन का ही सुधार हुआ था। लेकिन मध्यान्ह बाद का सत्र तूफानी तेजी का रहा।

विशेषज्ञों की बैठक से आ रहे निष्कर्षों के समाचारों के कारण मध्यान्ह बाद के सत्र के दौरान केएलसीई का नजदीकी माह अनुबंध जहां 19 रिंगिट तेज हुआ वहीं अन्य दोनों महीनों के सौदों में क्रमश: 90 व 97 रिंगिट प्रति टन की तेजी दर्ज की गई। दूसरी ओर, प्रतिस्पर्द्धी सोयाबीन तेल की वायदा कीमतों में नाममात्र का सुधार हुआ। शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड के सक्रिय त्रैमासिक वायदों में आज भी कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं हुआ।

इसके उलट, मल्टी कमॉडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया के सक्रिय वायदों में शुक्रवार को तेजी का वातावरण रहा था। शुक्रवार को सक्रिय दिसम्बर क्रूड पाम तेल वायदा जहां करीब 7 रुपए बढकर 351 रुपए पर पहुंच गया था, वहीं जनवरी वायदा 458 रुपए पर करीब सवा नौ रुपए उछल गया था। हालांकि आज इन वायदों में करीब एक-डेढ रुपए की नरमी आई, लेकिन धारणा मजबूती की ही बनी हुई थी।

अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू वायदा बाजारों में आई इस तेजी को देखते हुए हाजिर बाजारों में भी पाम तेल की कीमतें तेजी से बढ गई। मुम्बई खाद्य तेल बाजार में पाम तेल थोक में 395 रुपए कर अतिरिक्त के स्तर पर बोला जा रहा था। दो दिन के भीतर इसमें लगभग 15 रुपए की तेजी आ चुकी है। जलगांव स्थित अग्रणी व्यापारी कुशल खंडेलवाल ने बताया कि आने वाले दिनों में पाम तेल बाजारों में और तेजी की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय संकेत काफी मजबूती के हैं।

श्री दोराब मिस्त्री का कहना है कि मार्च, 2010 तक क्रूड पाम तेल (सीपीओ) लगभग 20 प्रतिशत बढकर 3000 रिंगिट प्रति टन का स्तर छू सकता है क्योंकि इसका उत्पादन बढती मांग की तुलना में काफी कम होगा। उन्होंने कहा कि अब से लेकर वर्ष 2010 के आरम्भिक तीन महीनों के दौरान सीपीओ बढता हुआ 2800 से 3000 रिंगिट प्रति टन के बीच पहुंच सकता है। उन्होंने सीपीओ में इस तेजी का प्रमुख कारण यह बताया कि अनेक देशों की आर्थिक सेहत में हो रहे सुधार को देखते हुए वर्ष 2010 के दौरान सीपीओ की मांग बढते हुए 55 लाख टन तक पहुंच जाने की उम्मीद है। इसके विपरीत इसका उत्पादन करीब 45 लाख टन के आसपास रहने का अनुमान है।

इधर भारत में प्रमुख खरीफ तिलहन, सोयाबीन, के उत्पादन में कमी आने के कारण खाद्य तेलों का आयात पुन: बढने की आशंका व्यक्त की जा रही है। हाल ही में समाप्त हुए नवम्बर माह के आरम्भ में मध्य प्रदेश की वाणिज्यिक राजधानी समझे जाने वाले इंदौर, में आयोजित हुए सेमिनार में उद्योग व व्यापार ने चालू तेल-तिलहन वर्ष के दौरान सोयाबीन का उत्पादन घटकर 85 लाख टन होने का अनुमान व्यक्त किया था। इससे पूर्व सीजन में इसका 89 लाख टन उत्पादन हुआ था। इतना ही नहीं, व्यापारिक सूत्रों द्वारा प्रमुख रबी तिलहन, सरसों, के उत्पादन के प्रति भी अभी से आशंकाएं व्यक्त की जाने लगी हैं। ऐसे में आशंका यह है कि चालू तेल-तिलहन वर्ष के दौरान खाद्य तेलों का आयात तुलनात्मक रूप से बढ सकता है।

यदि इस बार भी खाद्य तेलों का आयात बढता है तो इन तेलों के उपभोक्ताओं को भी ऊंची कीमतों के रूप में इसका खामियाजा चुकाना पड सकता है।

Sunday, December 6, 2009

उत्पादन घटने से मार्च तक 21 फीसदी बढ़ सकते हैं पाम तेल के दाम


इंडोनेशिया में आयोजित विश्व पाम तेल सम्मेलन में गोदरेज इंटरनैशनल लिमिटेड के निदेशक दोराब ई मिस्त्री ने पाम तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की चेतावनी दी है।
पिछले तीन सप्ताह के भीतर पाम तेल की कीमतों में 300 रिंगिट की तेजी दर्ज की जा चुकी है। मिस्त्री ने आगाह किया है कि पाम तेल के भाव 2010 की पहली तिमाही के आखिर तक 2800-3000 रिंगिट हो जाएंगे।
सीपीओ में इस बढ़ोतरी के लिए उन्होंने मुख्य रूप से मलेशिया एवं इंडोनेशिया में सीपीओ के उत्पादन की बढ़ोतरी में ब्रेक लगने, विश्व स्तर पर खाद्य तेलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए उचित प्रयास नहीं होने के साथ बायोडीजल की बढ़ती मांग को जिम्मेदार बताया है
आने वाले समय में पाम तेल की तेजी के लिए मिस्त्री डॉलर के कमजोर रहने, कच्चे तेल की कीमत प्रति बैरल 80 डॉलर के आसपास रहने एवं आगामी अप्रैल तक वनस्पति तेल के आयात पर भारत सरकार द्वारा कोई आयात कर नहीं लगाने को भी मुख्य कारण मानते हैं।
4 दिसंबर को इंडोनेशिया के बाली शहर में आयोजित पाम सम्मेलन में मिस्त्री के पेश किए आकलन के मुताबिक वर्ष 2009-10 (2009, नवंबर से 2010 अक्टूबर) के दौरान भारत में खाद्य तेल के आयात में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। लेकिन कच्चे पाम तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के लक्षण अभी से दिखने लगे हैं।
डॉलर के कमजोर होने एवं निर्यात मांग मजबूत होने के कारण भी पाम तेल की कीमतें बढ़ी हैं, लेकिन आने वाले समय में यानी कि वर्ष 2010 में पाम तेल के उत्पादन में भी गिरावट की आशंका जाहिर की गई है। दूसरी तरफ इंडोनेशिया सरकार ने पाम तेल से घरेलू बाजार के लिए बायोडीजल बनाने का भी फैसला किया है।
मिस्त्री के मुताबिक गत पांच सालों में विश्व के 17 देशों में खाद्य तेल एवं वनस्पति के उत्पादन में 27.34 मिलियन टन का इजाफा दर्ज किया गया है। इनमें से 11.95 मिलियन टन की हिस्सेदारी पाम तेल की है। ऐसे में पाम तेल के उत्पादन में कमी होने से या उसका बायोडीजल के लिए इस्तेमाल होने से विश्व खाद्य तेलों के भाव में बढ़ोतरी होना लाजिमी है।
मिस्त्री के मुताबिक पाम तेल के लिए पूरा विश्व मुख्य रूप से मलेशिया और इंडोनेशिया पर निर्भर करता है। लेकिन मलेशिया और इंडोनेशिया भी एक सीमा तक ही पाम तेल का उत्पादन कर सकता है। मलेशिया की सीमा समाप्त होने लगी है और इंडोनेशिया भी उस ओर अग्रसर है। और इसका सीधा असर खाद्य तेल की कीमतों पर पड़ेगा।
वर्ष 2010 में खाद्य तेल के उत्पादन में पाम तेल का योगदान कम होने जा रहा है। वर्ष 2008 में मलेशिया में कच्चे पाम तेल (सीपीओ) का उत्पादन 17.734 मिलियन टन रहा। और वर्ष 2009 में यहां सीपीओ का कुल उत्पादन 17.5 मिलियन टन रहने का अनुमान है।
वर्ष 2010 के दौरान मलेशिया के पाम पेड़ों के अधिक उत्पादकता के चक्र के समाप्त होने एवं निम्न उत्पादकता चक्र के शुरू होने के साथ अगले साल वहां एल नीनो असर के कारण पाम तेल के उत्पादन में कमी के आसार हैं। मिस्त्री ने कहा कि मांग के लिहाज से वर्ष 2010 में बायोडीजल की मांग के अलावा और कोई बदलाव आने की संभावना नहीं है।
वर्ष 2010 के लिए 30 लाख टन बायोडीजल की मांग का अनुमान लगाया गया है। लेकिन वे कहते हैं कि बायोडीजल की मांग 10 लाख से 25 लाख टन के बीच रहेगी। खाद्य तेल की मांग लगातार तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसके उत्पादन को बढ़ाने के लिए कुछ खास नहीं किया जा रहा है।

नवंबर में ऑयल मील निर्यात 49फीसदी गिरा

ऊंचे भाव में अंतरराष्ट्रीय मांग कम होने से नवंबर महीने में देश से खली निर्यात 49 फीसदी घट गया। साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के मुताबिक नवंबर महीने में भारत से खली का निर्यात घटकर 346,859 टन का ही हुआ है जबकि पिछले साल नवंबर महीने में 678,169 टन का निर्यात हुआ था। सोयाबीन सीड और सरसों के दाम बढ़ने से पिछले दो महीने में खली की कीमतें करीब 15 फीसदी बढ़ चुकी है। एसईए के अनुसार चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीने अप्रैल से नवंबर के दौरान देश से खली निर्यात में करीब 44 फीसदी की कमी आकर कुल निर्यात 1,890,706 टन का ही हुआ है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसका निर्यात 3,360,966 टन का हुआ था। सोयाबीन और सरसों के दाम घरेलू बाजार में बढ़ने का असर खली की कीमतों पर पड़ा रहा है। घरेलू बाजार में सरसों की कीमतों में पिछले दो महीने में 300 रुपये की तेजी आकर भाव 2900 रुपये और सोयाबीन की कीमतों में 250 रुपये की तेजी आकर प्लांट पहुंच भाव 2450- 2500 रुपये प्रति क्विंटल हो गये। सीड के भाव बढ़ने के कारण पेराई में कमी आने का असर भी निर्यात पर पड़ा है। पिछले दो महीनों में सोयाबीन खली के दाम बंदरगाह पहुंच 390 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 445 डॉलर प्रति टन हो गए जबकि सरसों खली के दाम 227 डॉलर से बढ़कर 260 डॉलर प्रति टन हो गए। सोयाबीन प्लांट ऊचे भाव पर खली बेचने को तैयार है लेकिन विदेश में इस भाव पर खरीदार मौजूद नहीं है।

मलेशिया का क्रूड पाम तेल उत्पादन घटने का अनुमान

मलेशिया में पाम तेल उत्पादन नवंबर के दौरान अक्टूबर के मुकाबले कम रहने का अनुमान है। अक्टूबर में 19।9 लाख टन पाम तेल का उत्पादन हुआ था। हालांकि नवंबर के उत्पादन के आंकड़े अभी नहीं आए हैं लेकिन इस दौरान सीजनल बारिश हल्की रहने से पाम फलों की तुड़ाई हल्की रही। इसके अलावा कई अन्य राज्यों में बाढ़ के कारण रिफाइनरी मिलों और बंदरगाहों तक परिवहन की भी समस्या रही। मलेशियाई पाम तेल बोर्ड ने बताया कि ज्यादातर प्लांटेशन कंपनियों ने नवंबर के दौरान उत्पादन कम से कम दस फीसदी गिरने की रिपोर्ट दी है। बोर्ड जल्दी ही पाम तेल उत्पादन, निर्यात और नवंबर अंत में बाकी स्टॉक के आंकड़े जारी करेगा। प्लांटेशन कंपनियों के अधिकारियों और कारोबारियों का अनुमान है कि नवंबर में उत्पादन गिरकर 17.5 से 17.9 लाख टन के बीच रहेगा। एक प्रमुख प्लांटेशन कंपनी की वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उनकी कंपनी में क्रूड पाम तेल का उत्पादन नवंबर के दौरान 10 से 12 फीसदी कम रहा है। दिसंबर में भी उत्पादन कम ही रहेगा क्योंकि पीक उत्पादन का दौर अक्टूबर में निकल चुका है। कुआलालंपुर में एक ट्रेडिंग कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नवंबर के दौरान पाम तेल का बकाया स्टॉक बढ़कर 19.8 लाख से 20 लाख टन के बीच रह सकता है। इंडोनेशिया में पाम तेल आयात एक से डेढ़ लाख टन रहेगा और घरेलू खपत करीब दो लाख टन रहेगी। कागरे सर्वेयर कंपनियों ने नवंबर में पाम तेल निर्यात 14.2 लाख से 14.6 लाख टन के बीच रहने का अनुमान बताया है।

Saturday, December 5, 2009

सोयाबीन में गिरावट दर्ज



शिकागो, 4 दिसम्बर। डालर में उछाल और हाजिर मूल्यों से प्रभावित अमेरिकन सोयाबीन गत सत्र् शिकागो वायदा व्यापार में मूल्यों की गिरावट दर्ज करा आया। सप्ताहारंभ में 3 मास के अपने सर्वोच्च मूल्य पर पहुंचते ही सोयाबीन व्यापार में जो मुनाफा वसूली आई वह अब तक इसके मूल्यों को दबाती चली आ रही है। कमर्शियल की ओर से चली बिकवाली बरस्तूर जारी रही और तब जा कर रुकी जबकि सोयाबीन के मूल्य हद से ज्यादा नीचे आ गए। ऐसे में जनवरी का सोयाबीन 25.5 सेंट की कमी से 10.34 डालर प्रति बुशेल पर बंद हुआ। पिछडे महीनों का सोयाबीन वायदा 10 से 25 सेंट की हानि से तय हुआ। सोयाबीन की तरह सोया उत्पाद भी गिरावट पर ही रहे। दिसम्बर की सोयाखली 7.40 डालर प्रतिटन लुढक कर 317.30 डालर प्रतिटन पर तय हुई जबकि जनवरी की सोयाखली 7.90 डालर टूटकर 305.50 डालर प्रति टन पर बंद हुई। दिसम्बर का सोयातेल 0.83 सेंट की हानि से 39.75 सेंट प्रति पाउंड पर तथा जनवरी का सोयातेल 40.11 सैंट प्रति पाउंड पर तय हुआ। फण्ड्स की ओर से सोयाबीन के 5-6 हजार तथा सोयाखली और सोयातेल के 2-3 हजार प्रत्येक की बिकवाली हुई। सोयाबीन संबंधी अन्य समाचारों के अनुसार भारी वर्षा से एक बार फिर सोयाफसल की कटाई रुकने की आशंका है। मिडवैस्ट के पूर्वी भागों में सोयाबीन के नकद मूल्य मजबूती पर रहे। दिसम्बर के अनुबंध फिलहाल डिलिवरी में नही आए हैं जबकि सोयातेल के 775 अनुबंध डिलिवरी में आए है। पाकिस्तान ने 100000 टन से भी ज्यादा पामतेल खरीदने की बात की है। वर्ष 2010 के दौरान पामतेल उत्पादन में वृद्घि लगभग इंडोनेशिया में चल रहे सम्मेलन के दौरान जताई गई है।

चीनी उत्पादन 160 लाख टन से भी कम रहने की संभावना

देश में चीनी का उत्पादन सीजन वर्ष 2009-10 के दौरान पिछले अनुमान 160 लाख टन से भी कम रहने की संभावना है। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (आईएसएमए) के अध्यक्ष समीर सोमैया ने बुधवार को कहा कि चीनी उत्पादन 160 लाख टन से भी कुछ कम रह सकता है। हालांकि उन्होंने कहा कि यह गत सीजन के उत्पादन 150 लाख टन से ज्यादा ही रहेगा। इस वर्ष चीनी उत्पादन का आंकड़ा भले ही गत वर्ष के मुकाबले ज्यादा रहेगा लेकिन देश की वार्षिक खपत करीब 230 लाख टन को देखते हुए यह काफी कम होगा। केंद्र सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों और घरेलू मांग को देखते हुए हाल ही में रॉ शुगर और रिफाइंड शुगर दोनों के ड्यूटी फ्री आयात की समय सीमा बढ़ाकर चालू वित्त वर्ष के आखिर तक कर दी थी। चीनी का घरेलू उत्पादन घटने की आशंका से चीनी के दाम बढ़कर गत वर्ष के मुकाबले करीब दोगुने हो चुके हैं। सोमैया ने कहा कि महाराष्ट्र, कर्नाटक और यूपी में चीनी उत्पादन कम रहने का अनुमान है। एक दिन पहले ही खाद्य एवं कृषि मंत्री ने संसद में कहा था कि इस वर्ष चीनी का उत्पादन 160 लाख टन रहने का अनुमान है। गन्ने के कीमतों को लेकर जारी गतिरोध के कारण भी चीनी मिलों में पेराई में देरी हो रही है। किसान चीनी मिलों का घेराव करेंगे मेरठ। उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए गन्ने की ऊंची कीमत की मांग करते हुए राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष अजित सिंह ने कहा है कि जब तक गन्ने की उचित कीमत नहीं मिल जाती, किसान चीनी मिलों का घेराव करेंगे और गन्ने की सप्लाई नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता हर मिल का घेराव करेंगे और जब तक अपेक्षित कीमत की घोषणा नहीं हो जाती, वे नहीं हटेंगे। दूसरी ओर भारतीय किसान यूनियन ने शुगर मिल मालिकों से अपील की है कि वे गन्ना उत्पादकों को उनकी फसल का उचित दाम दें। उसने कहा है कि उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्य गन्ने का यूपी के मुकाबले काफी ज्यादा दाम दे रहे हैं। उत्तराखंड में मिलें किसानों को गन्ने का 220 रुपये प्रति क्विंटल भाव दे रही हैं। (प्रेट्र)

Friday, December 4, 2009

Indian vegoil imports to rise in 2009/10-trade

Thu Dec 3, 2009 4:34pm IST
NEW DELHI, Dec 3 (Reuters) - Edible oil imports by India may rise as much as 8.5 percent in 2009/10 from record purchases last year, industry sources said on Thursday, as demand grows while local soybean and groundnut output falls after poor monsoon rains.

"We estimate at least a half a million tonne higher edible oil imports in 2009/10," said B.V. Mehta, executive director of the Solvent Extractors' Association of India.

Trade officials had initially forecast that imports by the world's top buyer would remain flat after the record 46 percent surge in 2008/09 as growth in consumption would be matched by higher local output, particularly of winter-sown rapeseed.

But dry soil after the worst monsoon in 37 years and high temperatures in the main-producing state of Rajasthan delayed planting, reducing crop area and potentially hurting yields.

Area under rapeseed was 5.45 million hectares last week, down 3 percent from a year ago.

"Initial euphoria over good prospects of winter oilseed has vanished," said Govindbhai G. Patel, managing partner of Rajkot-based trading firm Dipak Enterprise, and a respected trade official who has headed several trade and industry bodies in the past. While it was too early forecast the output of rapeseed, which is sensitive to temperature and is harvested from February, lower crop area had dampened sentiment, said Patel.

For a factbox on the rapeseed crop, please click: [ID:nDEL437470]

The failed June-September monsoon has already lowered soybean output by 4.5 percent to 8.5 million tonnes, the Central Organisation for Oil Industry and Trade (COOIT) has estimated.

LOCAL SUPPLY

Mehta said lower oilseed crop would cut local oil supplies at least by 300,000 tonnes in the year that began in November.

"I don't see any fall in imports as demand is not declining due to ever rising population," said a trader working with a global trading firm who did not wish to be named.

Patel estimated that in addition to the likely fall of 300,000 tonnes in domestic output, India's annual cooking oil consumption will grow by about 550,000 tonnes.

Other trade officials agreed with the estimate.

A part of the demand would be met by surplus imports of 150,000 tonnes, which have been carried forward from the previous year, said Patel, whose estimates are keenly watched by traders and analysts.

After meeting the domestic shortfall with carryover stocks, the country would need an additional 700,000 tonnes on top of last year's imports of 8.2 million tonnes, he said.

Surplus imports were triggered by concerns that the government may raise taxes on imports of edible oils, which account for more than half of Indian demand.

PRICES

Traders say lower prices helped increase Indian demand in 2008/09, and the industry would keenly watch crude oil prices and the size of the soybean crop in Latin America, which influences prices.

"If import taxes are raised and global prices go up, then the import quantum could be different," said Veeresh Hiremath, a senior analyst with Hyderabad-based brokerage Karvy Comtrade.

India allows tax free imports of crude edible oils and charges a 7.5 percent tax on refined cooking oils.

A Mumbai-based trader said India's cooking oil imports would continue to have a bias for palm oils, which constitute almost four fifth of total imports.