Monday, December 7, 2009

मार्च तक सीपीओ 20 प्रतिशत और महंगा होने का अनुमान घरेलूसीपीओ बाजार भी तेज हुए


plam oilनई दिल्ली, 5 दिसम्बर (एनएनएस)। पाम तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमतों में और तेजी आने का अनुमान है। यह निष्कर्ष मलेशिया में हाल ही में हुई एक बैठक में उभर कर सामने आया है। गोदरेज इंटरनेशनल के लंदन स्थित निदेशक तथा प्रसिद्ध विश्लेषक श्री दोराब मिस्त्री का मानना है कि आगामी मार्च माह तक पाम तेल की वैश्विक कीमतें करीब 20 प्रतिशत और तेज हो सकती हैं।

श्री मिस्त्री के इस अनुमान के चलते न सिर्फ क्वालालम्पुर स्थित बुर्सा मलेशिया डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (केएलसीई) के सक्रिय तिमाही वायदों में ही तेजी का रुख बना हुआ है बल्कि खाद्य तेलों के घरेलू हाजिर व वायदा बाजारों में भी हाल ही में तेजी दर्ज की गई है। हालांकि सप्ताहांत की वजह से केएलसीई में आज कारोबारी अवकाश रहा लेकिन इससे पूर्व यानी शुक्रवार को काफी तेजी देखी गई। शुक्रवार को कारोबार के आरम्भिक सत्र के अंत में सक्रिय तिमाही वायदों में कोई विशेष तेजी नहीं आई थी। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण यह है कि आरम्भिक सत्र के अंत में नजदीकी माह की वायदा कीमतों में तो कोई उतार-चढाव ही नहीं हुआ था जबकि दूसरे व तीसरे माह के अनुबंधों में भी केवल 10 तथा 15 रिंगिट प्रति टन का ही सुधार हुआ था। लेकिन मध्यान्ह बाद का सत्र तूफानी तेजी का रहा।

विशेषज्ञों की बैठक से आ रहे निष्कर्षों के समाचारों के कारण मध्यान्ह बाद के सत्र के दौरान केएलसीई का नजदीकी माह अनुबंध जहां 19 रिंगिट तेज हुआ वहीं अन्य दोनों महीनों के सौदों में क्रमश: 90 व 97 रिंगिट प्रति टन की तेजी दर्ज की गई। दूसरी ओर, प्रतिस्पर्द्धी सोयाबीन तेल की वायदा कीमतों में नाममात्र का सुधार हुआ। शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड के सक्रिय त्रैमासिक वायदों में आज भी कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं हुआ।

इसके उलट, मल्टी कमॉडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया के सक्रिय वायदों में शुक्रवार को तेजी का वातावरण रहा था। शुक्रवार को सक्रिय दिसम्बर क्रूड पाम तेल वायदा जहां करीब 7 रुपए बढकर 351 रुपए पर पहुंच गया था, वहीं जनवरी वायदा 458 रुपए पर करीब सवा नौ रुपए उछल गया था। हालांकि आज इन वायदों में करीब एक-डेढ रुपए की नरमी आई, लेकिन धारणा मजबूती की ही बनी हुई थी।

अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू वायदा बाजारों में आई इस तेजी को देखते हुए हाजिर बाजारों में भी पाम तेल की कीमतें तेजी से बढ गई। मुम्बई खाद्य तेल बाजार में पाम तेल थोक में 395 रुपए कर अतिरिक्त के स्तर पर बोला जा रहा था। दो दिन के भीतर इसमें लगभग 15 रुपए की तेजी आ चुकी है। जलगांव स्थित अग्रणी व्यापारी कुशल खंडेलवाल ने बताया कि आने वाले दिनों में पाम तेल बाजारों में और तेजी की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय संकेत काफी मजबूती के हैं।

श्री दोराब मिस्त्री का कहना है कि मार्च, 2010 तक क्रूड पाम तेल (सीपीओ) लगभग 20 प्रतिशत बढकर 3000 रिंगिट प्रति टन का स्तर छू सकता है क्योंकि इसका उत्पादन बढती मांग की तुलना में काफी कम होगा। उन्होंने कहा कि अब से लेकर वर्ष 2010 के आरम्भिक तीन महीनों के दौरान सीपीओ बढता हुआ 2800 से 3000 रिंगिट प्रति टन के बीच पहुंच सकता है। उन्होंने सीपीओ में इस तेजी का प्रमुख कारण यह बताया कि अनेक देशों की आर्थिक सेहत में हो रहे सुधार को देखते हुए वर्ष 2010 के दौरान सीपीओ की मांग बढते हुए 55 लाख टन तक पहुंच जाने की उम्मीद है। इसके विपरीत इसका उत्पादन करीब 45 लाख टन के आसपास रहने का अनुमान है।

इधर भारत में प्रमुख खरीफ तिलहन, सोयाबीन, के उत्पादन में कमी आने के कारण खाद्य तेलों का आयात पुन: बढने की आशंका व्यक्त की जा रही है। हाल ही में समाप्त हुए नवम्बर माह के आरम्भ में मध्य प्रदेश की वाणिज्यिक राजधानी समझे जाने वाले इंदौर, में आयोजित हुए सेमिनार में उद्योग व व्यापार ने चालू तेल-तिलहन वर्ष के दौरान सोयाबीन का उत्पादन घटकर 85 लाख टन होने का अनुमान व्यक्त किया था। इससे पूर्व सीजन में इसका 89 लाख टन उत्पादन हुआ था। इतना ही नहीं, व्यापारिक सूत्रों द्वारा प्रमुख रबी तिलहन, सरसों, के उत्पादन के प्रति भी अभी से आशंकाएं व्यक्त की जाने लगी हैं। ऐसे में आशंका यह है कि चालू तेल-तिलहन वर्ष के दौरान खाद्य तेलों का आयात तुलनात्मक रूप से बढ सकता है।

यदि इस बार भी खाद्य तेलों का आयात बढता है तो इन तेलों के उपभोक्ताओं को भी ऊंची कीमतों के रूप में इसका खामियाजा चुकाना पड सकता है।

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