कुआलालम्पुर, 5 दिसंबर । गत् सप्ताहांत इंडोनेशिया में चले पाम तेल सम्मेलन में प्रस्तुत टिप्पणियों से समर्थन पाकर मलेशियाई पाम तेल एक ही सत्र के मध्याहन तक 4.8 प्रतिशत की भारी बढत से 6 माह के अपने सर्वोच्च मूल्य स्तर को छूआ था। हालांकि सत्र के उत्तरार्द्घ में गत् मास स्टॉक में हुई वृद्घि तथा निर्यात में सुस्ती की वास्तविकता से दब कर इसके मूल्य कुछ लुढक गए। मलेशिया के बुर्सा वायदा में निर्देशक मास फरवरी के वायदा मूल्य देखते-देखते 118 रिंगिट के लाभ से 2596 रिंगिट (786.3 डॉलर) प्रति टन पर जा पहुंचा और अंतत: 2562 रिंगिट प्रति टन पर बंद हुआ। पाम तेल का यह मूल्य स्तर 5 जून के बाद पहली बार देखने में आया है। ध्यान रहे कि सम्मेलन में पाम तेल उद्योग के शीर्घस्थ विशेषज्ञों दोराब मिस्त्री तथा जेम्स फ्राई ने जताया कि बढती मांग और क्रूड ऑयल (पैट्रो) के मूल्यों में वृद्घि के कारण आगामी वर्ष (2010) में पाम तेल के मूल्य 3000 रुपए प्रति रिंगिट तक पहुंच सकते हैं। पाम तेल स्टॉक में चल रही कभी भी इसी प्रकार के संकेत दे रही है। उधर दूसरी ओर व्यसापारिक अनुमान है कि नवम्बर और दिसम्बर में पॉम तेल का बढता स्टॉक इसके मूल्यों को निरंतर दबाता रहेगा। अलबत्ता वर्षा के कारण इसके उत्पादन में कमी से इसके मूल्यों में वृद्घि की उम्मीद संभावना बन सकती है। उधर फण्ड्स की ओर से बिकवाली के कारण व्यापार में 25-25 टन के 22897 लाख टन की दोगुनी मात्रा व्यापार में उपलब्ध रही। एक सामान्य सत्र में 10 से 12 हजार लाट्स का ही निपटान हो पाता है। आलोच्य सत्र में अन्य वनस्पति तेल व्यापार हालांकि क्रूड ऑयल की नरमी से थोडा बहुत दिशा-निर्देश प्राप्त करते परंतु अधिकतर वे पाम तेल पर ही अपनी एकाग्रता बनाए रहे। जनवरी की डिलिवरी का अमेरिकन सोया तेल 1.4 प्रतिशत की बढत से व्यापार कर गया जबकि चीन के डालियन वायदा व्यापार में सर्वाधिक चर्चित सितम्बर 2010 का सोयाबीन लगभग 2 प्रतिशत की छलांग लगा गया।
विश्व में पाम तेल के सबसे बडे उत्पादक इंडोनेशिया में जकार्ता स्थित सरकारी विक्रय केंद्र में 9000 टन पाम तेल 7226 रुपए (0.768 डॉलर) प्रति किलोग्राम के मूल्यों पर बिका। जकार्ता में ही रिफाइनर्स ने आरबीडी पामोलीन पूर्व के 6900-6950 रुपए प्रति किलोग्राम की बजाय 7000 से 7150 रुपए प्रति किग्रा के मूल्यों पर बेचा
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