नई दिल्ली, 12 दिसंबर (एनएनएस) । अन्तर्राष्ट्रीय और घरेलू हाजिर व वायदा बाजारों में सोया व सोयाबीन उत्पादों की कीमतों में अभी और तेजी आने की उम्मीद है क्योंकि अमरीका से मजबूती के संकेत मिल रहे हैं। व्यापारिक सूत्रों का भी मानना है कि घरेलू बाजारों में सोयाबीन की आवकें कमजोर होने से कीमतें और बढ सकती हैं।
देश के सबसे बडे उत्पादक राज्य, मध्य प्रदेश सहित महाराष्ट्र की मंडियों में भी इन दिनों सोयाबीन की आवकें उम्मीद के अनुरुप नहीं हो रही हैं। इन दोनों राज्यों में संयुक्त रुप से आज 1.75 लाख बोरी सोयाबीन की आवक हुई, जो कि वर्ष की इस समयावधि की तुलना में कम है। यही वजह है कि महाराष्ट्र के जलगांव स्थित थोक तेल-तिलहन बाजार में न सिर्फ सोयाबीन की करीब 40 रुपए तेज होकर 2320/2330 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया बल्कि सोया रिफाइंड तेल भी पांच रुपए बढाकर 490/495 रुपए प्रति 10 किलोग्राम पर बोला गया।
एक अग्रणी व्यापारी कुशल खंडेलवाल ने बताया कि अन्तर्राष्ट्रीय बाजारों से मिल रहे मजबूती के संकेतों तथा कमजोर आवकों के कारण आगामी दिनों में सोयाबीन व इसके उत्पादों में और तेजी आ सकती है।
उधर दूसरी ओर अमरीकी कृषि विभाग ने अपनी नवीनतम मासिक मांग व आपूर्ति रिपोर्ट में कहा है कि अमरीकी सोयाबीन की औसत कीमतें 2009-10 में बढकर 8.75 से 10.25 डॉलर पर पहुंच जाने की उम्मीद है। गौरतलब है कि विभाग ने इससे पूर्व यह कीमतें 8.20 से 10.20 डॉलर के बीच रहने का अनुमान जताया था। सोयाबीन के साथ-साथ विभाग को सोयाबीन मील की औसत कीमतें भी करीब 10 डॉलर बढकर 260-310 डॉलर तथा सोयाबीन तेल की कीमतें 35.5 से 28.5 सैंट प्रति पौंड पर पहुंच जाने की उम्मीद है। विभाग के पूर्व में व्यक्त अनुमानों में इन दोनों उत्पादों की कीमतें क्रमश: 250 से 300 डॉलर तथा 33 से 37 सैंट पर रहने की उम्मीद व्यक्त की थी।
विभाग का मानना है कि ब्राजील और अर्जेटीना के कमजोर उत्पादन को देखते हुए अमरीकी सोयाबीन की आगामी दिनों में काफी मजबूत मांग बनी रहेगी। वैसे भी चालू वर्ष 2009-10 के दौरान अमरीका का कुल तिलहन उत्पादन 9.79 करोड टन रहने का अनुमान है, क्योंकि कपास के उत्पादन में अनुमानों से काफी कम बढोत्तरी हुई है।
दूसरी ओर अमरीका का सोयाबीन निर्यात तेजी से बढ रहा है। अभी तक के अनुमानों के अनुसार सोयाबीन का निर्यात 1.50 करोड बुशल बढकर 1.34 अरब बुशल पर जा पहुंचा है जो कि हाल ही के सप्ताहों का रिकॉर्ड निर्यात है और चीन की मजबूत मांग को देखते हुए आगामी दिनों में निर्यात में और तेजी आने की संभावना है।
अमरीकी कृषि विभाग की यह ताजा रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2009-10 में तिलहनों का वैश्विक उत्पादन 42.86 करोड टन रहने की उम्मीद है जो कि एक माह पूर्व लगाए गए अनुमानों की तुलना में तीन लाख टन कम है। सरसों का अन्तर्राष्ट्रीय उत्पादन करीब 13 लाख टन बढकर 5.94 करोड टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाने की आशा जतायी गयी है क्योंकि कनाडा में इस प्रमुख तिलहन का उत्पादन पूर्व व्यक्त अनुमानों की तुलना में अधिक होने की उम्मीद है हालांकि भारत में सरसों का उत्पादन घटने की आशंका भी है। यह अलग बात है कि कनाडा का रेपसीड उत्पादन 16 लाख टन बढकर 1.18 करोड टन पहुंच जाने की उम्मीद जतायी जा रही है। वहीं दूसरी ओर भारत में सरसों के बिजाई क्षेत्रफल में कमी आयी है। शुष्क मौसम के कारण बुआई क्षेत्रफल में कमी आयी है और आशंका है कि फसल का समुचित विकास भी प्रभावित होगा।
कृषि विभाग का मानना है कि वर्ष 2009-10 के दौरान तिलहनों का वैश्विक व्यापार 9.44 करोड टन का रहेगा जो कि एक माह पूर्व लगाए अनुमानों की तुलना में 7 साल टन ज्यादा है। वैश्विक व्यापार में यह बढोत्तरी मुख्यत: कनाडा से रेपसीड का मजबूत निर्यात तथा अमरीका के सोयाबीन निर्यात में तेजी आने से होगी।
श्री खंडेलवाल का मानना है कि यद्यपि क्रिसमस के कारण आगामी दिनों में शिकागो में सोया व्यापार बाधित होगा लेकिन इसका घरेलू बाजारों पर मामूली प्रभाव ही होने की उम्मीद है। यदि सोयाबीन की आवकें नहीं बढी तो इसके बाजार मजबूत बने रह सकते हैं
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