ऑयलपाम को प्लांटेशन घोषित करो
मुम्बई, 15 दिसम्बर। गोदरेज इंटरनेशनल के निदेशक दोराब मिस्री के अनुसार भारत में ऑयल पाम के वृक्ष केरल, आंध्र, कर्नाटक, गोवा तथा कुछ अन्य क्षेत्रों में लगाए जा सकते हैं लेकिन सिंचाई की व्यवस्था होनी जरूरी है। ऑयलपाम प्लांटेशन फसल है जिसके लिए कॉरपोरेट फर्मिंग की जरूरत है। धारक के पास 50/100 हैक्टयर होने चाहिए। गोदरेज जैसी बडी कम्पनियां इतनी कृषि भूमि नहीं खरीद सकती इसलिए केन्द्र सरकार को ऑयलपाम प्लांटेशन फसल घोषित करनी चाहिए। इसकी मदद से देश में वैजिटेबल ऑयल उत्पादन काफी बढ सकता है और आत्मनिर्भरता भी मिल सकती है। वर्तमान स्थिति में तो देश की खपत का 70 प्रतिशत उत्पादन हो जाए तो गनिमत है। ऑयलपाम की खूबी उत्पादकता में है। एक हेक्टेयर में सरसों औसतन 900 किलो होती है जिससे 300 किलो तेल सरसों प्राप्त होता है। दूसरी ओर एक हेक्टेयर में ऑयलपाम से 3.5/4 टन पाम ऑयल मिल जाएगा। किसान भी इसके वृक्ष लगाना चाहेंगे लेकिन उन्हें चार साल इंतजार करना पडेगा। अगर ऑयल पाम वृक्ष के मध्य अन्य फसलों की खेती की जाए तो उसे अतिरिक्त आय हो सकती है तथापि केन्द्र सरकार को किसानों को अनुदान देना पडेगा। मलेशिया तथा इंडोनेशिया पाम ऑयल उत्पादन में प्रमुख दोनों देशों में फालतू वनीय भूमि है जहां कोई आबादी नहीं रहती। इन वनों को साफ करके मलेशिया में 45 लाख हेक्टेयर में ऑयल पाम बागान लगाए गए जिनसे 180 लाख टन पाम ऑयल हुआ। इंडोनेशिया ने उससे भी बढकर 65 लाख हेक्टेयर में ऑयल पाम वृक्ष लगाए और वहां 220 लाख टन पाम ऑयल उत्पादन हुआ ज्यादातर वृक्ष 1980 के बाद के हैं। इंडोनेशिया हर साल इनका एरिया 5 लाख हेक्टेयर बढा रहा है। (इससे यह संकेत मिलते हैं कि देश में एमपी, महाराष्ट्र, सुंदरवन बंगाल तथा पूर्वोत्तर के वनों की साफ-सफाई करके सिंचाई व्यवस्था के साथ ऑयल पाम के वृक्ष लगाए जा सकते हैं)। भारत में तेल आयात पर निर्भरता कुछ वर्षों में बढी है। पिछले तेल वर्ष में आयात 86 लाख टन हो गया जबकि 2000-01 में 48 लाख टन आयात हुआ था। जाहिर है कि उत्पादन बढाने के अलावा और चारा नहीं तथा पाम ऑयल इसमें समर्थ है
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