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Saturday, December 24, 2011
ठंड ने रबी फसल की उम्मीद बढ़ाई
Friday, December 23, 2011
बनेगा खाद्य पैकिंग का स्टैंडर्ड सिस्टम
नमकीन, चिप्स और अन्य खाद्य पदार्थ 1 जुलाई 2012 से उपभोक्ताओं को 18, 39, 48 या फिर 57 ग्राम में नहीं मिलेंगे। सरकार खाद्य पदार्थों की पैकिंग के लिए पूरे देश में स्टैंडर्ड सिस्टम लागू करने जा रही है। इसके बाद कंपनियों को पैकिंग सीधे तौर पर जैसे 10 ग्राम, 20 ग्राम, 60 ग्राम या फिर 90 ग्राम के आधार पर करनी होगी। उपभोक्ता मामले विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खाद्य पदार्थों की पैकिंग में वस्तु की मात्रा तय नहीं होने से कंपनियां अपने हिसाब से मात्रा तय कर पैकिंग कर देती हंै। कई बार कंपनियां पैकेट की कीमत तो बराबर रखती हैं लेकिन पैकेट के अंदर रखे पदार्थ की मात्रा कम कर देती हैं। इसका उपभोक्ताओं को पता ही नहीं चल पाता। उपभोक्ता हितों का ख्याल रखते हुए इनकी पैकिंग के लिए स्टैंडर्ड सिस्टम लागू करने की योजना बनाई गई है। उन्होंने बताया कि कंपनियों को पैकेजिंग मैटेरियल और पुराने स्टॉक को समाप्त करने के लिए 30 जून 2012 तक का समय दिया जाएगा। इसके बाद 1 जुलाई 2012 से देशभर में स्टैंडर्ड सिस्टम लागू हो जायेगा। उन्होंने बताया कि डिब्बाबंद वस्तु अधिनियम के प्रावधान और माप-तौल मानक (पैकेज्ड वस्तु) नियम, देशभर में सितंबर 1977 से लागू हंै। 17 जुलाई 2006 को अधिसूचना और नियमों की समीक्षा की गई तथा उपभोक्ताओं के हितों के लिए नए प्रावधान लागू किए गए। इसके आधार पर वैट के अंतर्गत शामिल खुदरा विक्रेताओं को बेची गई चीजों की कीमत एवं भार की लिखित सूचना कंपनियों को पैकेट पर छापनी होती है। साथ ही प्रत्येक पैकेट पर कंपनी का नाम, पता और टेलीफोन नंबर लिखना होता है ताकि उपभोक्ता अपनी शिकायतों की सूचना दे सकें
तौल और माप
तौल और माप मानक अधिनियम, 1956 के अंतर्गत देश में मैट्रिक प्रणाली पर आधारित माप-तौल के एक समान मानक बनाए गए। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में तौल और माप इकाई इस विषय से सम्बंद्ध सभी गतिविद्धियों के लिए एक प्रमुख एजेंसी है।
वर्ष 1976 के अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत उत्पादन शुरू करने से पहले भार और माप उपकरणों के सभी माँडलों की मंजूरी ली जानी चाहिए। तौल और माप (माँडलों की मंजूरी) नियम, 1987 के मानकों के अनुरूप हैं या नहीं। यह नियम 1987 से प्रभावी है।
संविधान के 42वें संशोधन से तौल और मापों के प्रवर्तन का विषय राज्य सूची से समवर्ती सूची में आ गया। देशभर में प्रवर्तन में एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए एक केंद्रीय अधिनियम-तौल और माप (प्रवर्तन) अधिनियम, 1985 लागू किया गया। इस अधिनियम में व्यापारिक सौदों व औद्योगिक उत्पादन तथा जन-स्वास्थ्य संरक्षण और मानव सुरक्षा संबंधी कार्यों में प्रयुक्त किए जाने वाले तौल, माप तथा तौल/माप यंत्रों के बारे में प्रभावशाली वैधानिक नियंत्रण के प्रावधान शामिल हैं।
भारत अन्तर्राष्ट्रीय विधि माप विज्ञान संगठन का सदस्य है। इस संगठन की स्थापना वैधानिक माप विज्ञान (तौल और माप) से संबंधित कानूनों में विशव व्यापार में एकरूपता लाने के लिए की गई थी ताकि अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार सुगमता और व्यावहारिक रूप से चल सके।
राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वैधानिक मानकों का अंशांकन की सुविधा और सेवाएं प्रदान करते हैं। तौल और माप उपकरणों के माडल यानी प्रतिदर्शी अनुमोदन परीक्षण के लिए भी ये मान्यताप्राप्त प्रयोगशालाएं हैं। पूर्वोत्तर राज्यों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नौवीं पंचवर्षीय योजना में गुवाहाटी में एक प्रयोगशाला स्थापित करने का काम शुरू किया गया। कार्य लगभग पूरा हो चुका है।
मंत्रालय के अंतर्गत रांची स्थित भारतीय वैधानिक माप विज्ञान संस्थान, माप विज्ञान के कानूनी तथा सम्बद्ध विषयों का प्रशिक्षण देता है। राज्यों के प्रवर्तन अधिकारीयों के अलावा कई अफ़्रीकी, एशियाई और लातिनी अमरीकी देशों के प्रतिनिधि संस्थान द्वारा चलाए जाने वाले कार्यक्रमों में भाग लेते हैं। वर्ष 2005-07 के दौरान 8.1 करोड़ की राशि राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को अनुदान के रूप में दी गई। 2007-08 में द्वितीयक मानक भार प्रणाली के 59 सेटों और तौलकांटों की जांच करने वाले के 17 मोबाईल किटों की आपूर्ति पूरी कर ली गई है। संस्थान की गतिविधियों को पुनः केंद्रित करने के लिए ताकि इसका जनादेश ज्यादा प्रभावी तरीके से पूर्ण हो, और इसे उत्कृष्टता का एक केंद्र बनाने के लिए भारतीय प्रबंधन संस्थान में एक अध्याय जोड़ दिया गया है।
खाद्य तेलों की पैकिंग किलो में होगी
बदलाव क्यों
इस समय किलोग्राम और लीटर में पैकिंग से ग्राहकों में भ्रम
लीटर की पैकिंग में वजन के लिहाज से कम तेल मिलता है
पैकिंग की एकरूपता से ग्राहक मूल्य का सही आकलन कर पाएंगे
केंद्र सरकार खाद्य तेलों की पैकिंग मात्रा के बजाय वजन यानि किलोग्राम में करने की अनिवार्यता लागू करने पर विचार कर रही है। उपभोक्ताओं के हितों के साथ ही पैकिंग में एकरूपता लाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। पॉलीथीन, जार या फिर टिन में खाद्य तेलों की पैकिंग किलो में किए जाने की योजना है लेकिन टेट्रा पैक में पैकिंग करने वाली कंपनियों को लीटर में खाद्य तेल बेचने की अनुमति पहले की तरह जारी रहेगी।
उपभोक्ता मामले विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खाद्य तेलों की पैकिंग कंपनियां किलो और लीटर में करती हैं जिससे उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति बनी रहती है।
इसीलिए खाद्य तेलों की पैकिंग किलो में करने को अनिवार्य बनाया जा रहा है। इससे उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा होगी। उन्होंने बताया कि कंपनियों को पुराना स्टॉक समाप्त करने के लिए छह महीने का समय दिया जाएगा। इस आशय की अधिसूचना जल्दी ही जारी की जाएगी।
उन्होंने बताया कि खाद्य तेलों की पैकिंग इस समय कंपनियां किलो और लीटर के आधार पर कर रही है। ऐसे में किलो में तो उपभोक्ताओं को पूरा 15 किलो खाद्य तेल मिल जाता है लेकिन लीटर के आधार पर उपभोक्ता को एक टिन में 13.65 किलो खाद्य तेल ही मिल पाता है। इसी तरह से एक लीटर की पैकिंग में 910 ग्राम खाद्य तेल पैक किया जाता है। सरकार उपभोक्ताओं के लिहाज से ऐसा कदम उठाने पर विचार कर रही है