नमकीन, चिप्स और अन्य खाद्य पदार्थ 1 जुलाई 2012 से उपभोक्ताओं को 18, 39, 48 या फिर 57 ग्राम में नहीं मिलेंगे। सरकार खाद्य पदार्थों की पैकिंग के लिए पूरे देश में स्टैंडर्ड सिस्टम लागू करने जा रही है। इसके बाद कंपनियों को पैकिंग सीधे तौर पर जैसे 10 ग्राम, 20 ग्राम, 60 ग्राम या फिर 90 ग्राम के आधार पर करनी होगी। उपभोक्ता मामले विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खाद्य पदार्थों की पैकिंग में वस्तु की मात्रा तय नहीं होने से कंपनियां अपने हिसाब से मात्रा तय कर पैकिंग कर देती हंै। कई बार कंपनियां पैकेट की कीमत तो बराबर रखती हैं लेकिन पैकेट के अंदर रखे पदार्थ की मात्रा कम कर देती हैं। इसका उपभोक्ताओं को पता ही नहीं चल पाता। उपभोक्ता हितों का ख्याल रखते हुए इनकी पैकिंग के लिए स्टैंडर्ड सिस्टम लागू करने की योजना बनाई गई है। उन्होंने बताया कि कंपनियों को पैकेजिंग मैटेरियल और पुराने स्टॉक को समाप्त करने के लिए 30 जून 2012 तक का समय दिया जाएगा। इसके बाद 1 जुलाई 2012 से देशभर में स्टैंडर्ड सिस्टम लागू हो जायेगा। उन्होंने बताया कि डिब्बाबंद वस्तु अधिनियम के प्रावधान और माप-तौल मानक (पैकेज्ड वस्तु) नियम, देशभर में सितंबर 1977 से लागू हंै। 17 जुलाई 2006 को अधिसूचना और नियमों की समीक्षा की गई तथा उपभोक्ताओं के हितों के लिए नए प्रावधान लागू किए गए। इसके आधार पर वैट के अंतर्गत शामिल खुदरा विक्रेताओं को बेची गई चीजों की कीमत एवं भार की लिखित सूचना कंपनियों को पैकेट पर छापनी होती है। साथ ही प्रत्येक पैकेट पर कंपनी का नाम, पता और टेलीफोन नंबर लिखना होता है ताकि उपभोक्ता अपनी शिकायतों की सूचना दे सकें
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Friday, December 23, 2011
बनेगा खाद्य पैकिंग का स्टैंडर्ड सिस्टम
नमकीन, चिप्स और अन्य खाद्य पदार्थ 1 जुलाई 2012 से उपभोक्ताओं को 18, 39, 48 या फिर 57 ग्राम में नहीं मिलेंगे। सरकार खाद्य पदार्थों की पैकिंग के लिए पूरे देश में स्टैंडर्ड सिस्टम लागू करने जा रही है। इसके बाद कंपनियों को पैकिंग सीधे तौर पर जैसे 10 ग्राम, 20 ग्राम, 60 ग्राम या फिर 90 ग्राम के आधार पर करनी होगी। उपभोक्ता मामले विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खाद्य पदार्थों की पैकिंग में वस्तु की मात्रा तय नहीं होने से कंपनियां अपने हिसाब से मात्रा तय कर पैकिंग कर देती हंै। कई बार कंपनियां पैकेट की कीमत तो बराबर रखती हैं लेकिन पैकेट के अंदर रखे पदार्थ की मात्रा कम कर देती हैं। इसका उपभोक्ताओं को पता ही नहीं चल पाता। उपभोक्ता हितों का ख्याल रखते हुए इनकी पैकिंग के लिए स्टैंडर्ड सिस्टम लागू करने की योजना बनाई गई है। उन्होंने बताया कि कंपनियों को पैकेजिंग मैटेरियल और पुराने स्टॉक को समाप्त करने के लिए 30 जून 2012 तक का समय दिया जाएगा। इसके बाद 1 जुलाई 2012 से देशभर में स्टैंडर्ड सिस्टम लागू हो जायेगा। उन्होंने बताया कि डिब्बाबंद वस्तु अधिनियम के प्रावधान और माप-तौल मानक (पैकेज्ड वस्तु) नियम, देशभर में सितंबर 1977 से लागू हंै। 17 जुलाई 2006 को अधिसूचना और नियमों की समीक्षा की गई तथा उपभोक्ताओं के हितों के लिए नए प्रावधान लागू किए गए। इसके आधार पर वैट के अंतर्गत शामिल खुदरा विक्रेताओं को बेची गई चीजों की कीमत एवं भार की लिखित सूचना कंपनियों को पैकेट पर छापनी होती है। साथ ही प्रत्येक पैकेट पर कंपनी का नाम, पता और टेलीफोन नंबर लिखना होता है ताकि उपभोक्ता अपनी शिकायतों की सूचना दे सकें
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