
कोटा के व्यापारी विष्णु पोकार ने बताया कि खाद्य तेल और सोया खली की कमजोर मांग के कारण 20 जून को समाप्त सप्ताह के दौरान कोटा मंडी में सोयाबीन के भाव लगभग सात फीसदी घटकर 2350 से 2400 रुपये क्विंटल रह गए हैं। कमोबेश यही रुख रहने से इंदौर मंडी में भी प्लांट डिलीवरी सोयाबीन 2400 से 2450 और महाराष्ट्र में 2410 से 2450 रुपये क्विंटल बिक रही है। हाजिर भावों में नरमी से एनसीडीईएक्स में भी पिछले सप्ताह जुलाई वायदा भाव लगभग सात फीसदी घटकर सप्ताहांत में 2450 रुपये क्विंटल रह गए। वहीं निर्यात मांग कमजोर होने से इंदौर में सोयामील के भाव भी करीब चार फीसदी घटकर 22,000 रुपये टन तक उतर गए हैं। उन्होंने बताया कि उम्मीद के विपरीत आवक बढ़ने से सोयाबीन के भावों पर दबाव बढ़ा है। पिछले सप्ताह मध्य प्रदेश में रोजाना करीब 55000 बोरी, महाराष्ट्र में 15000 तथा राजस्थान में 6000 बोरी सोयाबीन की आवक होने का अनुमान है, जबकि बुवाई शुरू होने के कारण आमतौर पर जून के दूसर पखवाड़े में आवक कमजोर पड़ जाती है। लेकिन मानसून में विलंब के चलते बुवाई शुरू नहीं होने से किसानों को बचा हुआ माल मंडियों में लाने का समय मिल गया है। यह देखते हुए फिलहाल सोयाबीन में सुधार के आसार कम है।
जयपुर के ब्रोकर प्रीति कुमार का कहना है कि सोयाबीन के भावों पर दबाव बनने का एक कारण प्लांटों के पास तेल का स्टॉक बढ़ना भी है। वहीं खाद्य तेल आयात बढ़ने की खबरों से भी सोयाबीन में नरमी की धारणा मजबूत हुई है। दूसरी तरफ कमोडिटी विशेषज्ञ चंद्र प्रकाश गोयल का कहना है कि सोयाबीन में नरमी का रुख इस महीने ही बरकरार रह सकता है। जैसे ही मानसून सक्रिय होगा, मंडियों में आवक घट जाएगी। ऐसे में बारिश सामान्य नहीं होती है तो जुलाई में सोयाबीन की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिल सकती है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष सोयाबीन की पैदावार लगभग 85 लाख टन ही बैठने से हाजिर में माल ज्यादा नहीं बचा है तथा इस साल मानसून कमजोर रहता है तो पैदावार में और गिरावट आ सकती है। इस वजह से सोयाबीन में मौजूदा गिरावट अस्थाई साबित हो सकती है क्योंकि अर्जेटीना और ब्राजील में भी सोयाबीन की पैदावार को लेकर मिली खबर अच्छी नहीं है।
No comments:
Post a Comment